केरल कांग्रेस कमेटी को सुप्रीम कोर्ट का शो-कॉज नोटिस, CJI सूर्यकांत पर पोस्ट को लेकर जवाब तलब
सुप्रीम कोर्ट ने केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और सभी पदाधिकारियों से पूछा है कि पार्टी के आधिकारिक X अकाउंट पर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के संबंध में प्रकाशित टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष और सभी पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अदालत ने उनसे जवाब मांगा है कि पार्टी के आधिकारिक X अकाउंट पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के संबंध में की गई कुछ टिप्पणियों को लेकर उनके खिलाफ आपराधिक या दीवानी अदालत की अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान पर जोर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक फैसलों की आलोचना की जा सकती है, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल न्यायपालिका को डराने या उसकी संस्थागत गरिमा को प्रभावित करने के लिए नहीं किया जा सकता।
अदालत ने कहा, “न्यायपालिका की स्वतंत्रता राजनीतिक सुविधा का विषय नहीं है। इस न्यायालय के फैसले हमेशा आलोचना के लिए खुले हैं। हालांकि, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता न्याय व्यवस्था की संस्था को डराने का कवच नहीं बन सकती, चाहे ऐसा करने वाला व्यक्ति या संगठन कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो।”
संविधान से ऊपर कोई संस्था या राजनीतिक दल नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने अपने मौखिक अवलोकन में कहा कि संविधान सर्वोच्च है और कोई भी संस्था या राजनीतिक दल खुद को संविधान से ऊपर नहीं मान सकता।
पीठ ने कहा कि संविधान के अधिकार को कमजोर करने के किसी भी प्रयास से सख्ती से निपटा जाना चाहिए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून अपना रास्ता अपनाएगा और संबंधित व्यक्तियों की पहचान या उनके प्रभाव को कार्यवाही में बाधा नहीं बनने दिया जा सकता।
अदालत ने जताई संस्थागत प्रभाव को लेकर चिंता
सुनवाई के दौरान पीठ ने यह चिंता भी जताई कि यदि इस तरह की टिप्पणियों को बिना कार्रवाई के छोड़ दिया जाता है, तो इसका असर भविष्य में अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर भी पड़ सकता है।
पीठ ने कहा, “एक बार नुकसान हो गया, तो कल ऐसा हर संस्था के साथ हो सकता है। हम संविधान की निर्धारित सीमाओं के भीतर काम करते हैं।”
अब KPCC पदाधिकारियों को देना होगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों को अदालत के सामने अपना पक्ष रखना होगा। अदालत ने उनसे पूछा है कि संबंधित पोस्ट के मामले में उनके खिलाफ आपराधिक या दीवानी अवमानना की कार्यवाही क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए।
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