मुकेश अंबानी की जियो की शेयर बाजार में एंट्री, IPO को मिली 77 अरब डॉलर की बोलियां
मुकेश अंबानी की टेलीकॉम और डिजिटल कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स 28 अक्टूबर को शेयर बाजार में लिस्ट होने जा रही है। कंपनी के 3.2 अरब डॉलर के IPO को करीब 77 अरब डॉलर की बोलियां मिलीं, जो भारत में अब तक की सबसे ज्यादा सब्सक्रिप्शन वाली पेशकश है।
देश के बड़े कारोबारी मुकेश अंबानी की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स आज शेयर बाजार में कदम रखने जा रही है। कंपनी के IPO को निवेशकों का जबरदस्त समर्थन मिला है। करीब 3.2 अरब डॉलर यानी हजारों करोड़ रुपये के इस IPO के लिए लगभग 77 अरब डॉलर की बोलियां आईं। यह भारत में अब तक की सबसे ज्यादा सब्सक्रिप्शन पाने वाली शेयर पेशकश बताई जा रही है।
जियो प्लेटफॉर्म्स रिलायंस इंडस्ट्रीज का हिस्सा है और टेलीकॉम के साथ डिजिटल सेवाओं के कारोबार में काम करती है। कंपनी के 53 करोड़ से ज्यादा ग्राहक हैं। शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद जियो देश की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल हो सकती है। कंपनी का मूल्यांकन करीब 108.3 अरब डॉलर तक रखा गया है।
जियो के IPO को इतना बड़ा रिस्पॉन्स क्यों मिला?
जियो ने साल 2016 में टेलीकॉम कारोबार शुरू किया था। सस्ते इंटरनेट और मुफ्त वॉइस कॉल की शुरुआत ने भारत के मोबाइल बाजार को काफी बदल दिया। इससे बड़ी संख्या में लोगों के लिए इंटरनेट इस्तेमाल करना आसान हुआ और दूसरी टेलीकॉम कंपनियों को भी अपनी रणनीति बदलनी पड़ी।
आज जियो के पास 53 करोड़ से ज्यादा ग्राहक हैं। इतनी बड़ी ग्राहक संख्या कंपनी को डिजिटल सेवाओं, ब्रॉडबैंड, क्लाउड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में कारोबार बढ़ाने का मौका देती है। यही वजह है कि निवेशकों की नजर जियो की लिस्टिंग पर टिकी हुई है।
कंपनी को मेटा और गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट जैसे बड़े निवेशकों का भी समर्थन मिला है। इससे जियो के डिजिटल कारोबार की संभावनाओं को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है।
IPO में 77 अरब डॉलर की बोलियां आने का क्या मतलब है?
IPO यानी Initial Public Offering वह प्रक्रिया है, जिसके जरिए कोई कंपनी पहली बार अपने शेयर आम निवेशकों के लिए बाजार में जारी करती है।
जियो के IPO में करीब 77 अरब डॉलर की बोलियां आने का मतलब है कि निवेशकों ने उपलब्ध शेयरों के मुकाबले काफी ज्यादा रकम लगाने की इच्छा जताई। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि कंपनी को इतनी रकम मिल जाएगी। कंपनी को IPO के तय आकार के हिसाब से ही पैसा मिलेगा।
जियो का IPO करीब 3.2 अरब डॉलर का था, जबकि कंपनी का मूल्यांकन 108.3 अरब डॉलर तक रखा गया है। इस लिस्टिंग के बाद निवेशक शेयर बाजार में कंपनी के शेयर खरीद और बेच सकेंगे।
ग्रे मार्केट में 22% प्रीमियम, क्या निवेशकों को इतना फायदा मिलेगा?
जियो की लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में इसके शेयरों पर करीब 22% प्रीमियम की चर्चा है। ग्रे मार्केट ऐसा अनौपचारिक बाजार है, जहां शेयरों की आधिकारिक लिस्टिंग से पहले सौदे किए जाते हैं।
इस प्रीमियम से संकेत मिलता है कि कुछ निवेशक लिस्टिंग के दिन शेयर की कीमत IPO के भाव से ऊपर जाने की उम्मीद कर रहे हैं। लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है—ग्रे मार्केट का अनुमान आधिकारिक शेयर बाजार की कीमत नहीं होता और इससे मुनाफे की गारंटी भी नहीं मिलती।
लिस्टिंग के दिन शेयर किस भाव पर खुलेगा, यह असली मांग और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इसलिए केवल ग्रे मार्केट प्रीमियम देखकर निवेश का फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है।
मुकेश अंबानी की बड़ी रणनीति क्या है?
जियो की लिस्टिंग मुकेश अंबानी की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वे रिलायंस इंडस्ट्रीज को तेल और केमिकल कारोबार से आगे बढ़ाकर उपभोक्ता और टेक्नोलॉजी सेवाओं वाली बड़ी कंपनी बनाना चाहते हैं।
रिलायंस का कारोबार पहले से ही ऊर्जा, रिटेल और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों में फैला है। जियो की अलग लिस्टिंग से निवेशकों को कंपनी के डिजिटल और टेलीकॉम कारोबार का मूल्यांकन सीधे करने का मौका मिलेगा।
लिस्टिंग समारोह में मुकेश अंबानी के बड़े बेटे और जियो के प्रबंध निदेशक आकाश अंबानी के शामिल होने की उम्मीद है। वे जियो के कारोबार को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
जियो के सामने चुनौतियां भी कम नहीं
जियो की लिस्टिंग को लेकर उत्साह जरूर है, लेकिन कंपनी के सामने कुछ बड़ी चुनौतियां भी हैं। टेलीकॉम बाजार में एयरटेल जैसी कंपनियों से मुकाबला, नेटवर्क और तकनीक पर लगातार खर्च तथा सरकार के नियमों में संभावित बदलाव इसके कारोबार को प्रभावित कर सकते हैं।
स्पेक्ट्रम की कीमत, लाइसेंस और अन्य शुल्क भी टेलीकॉम कंपनियों के खर्च का अहम हिस्सा हैं। इसके अलावा, कंपनी को अपने बड़े ग्राहक आधार से डिजिटल सेवाओं के जरिए कमाई बढ़ाने की क्षमता भी साबित करनी होगी।
इस साल भारत में IPO बाजार काफी सक्रिय रहा है। अब तक 246 कंपनियां शेयर बाजार में लिस्ट हो चुकी हैं। हालांकि, कुल रकम जुटाने के मामले में भारत अमेरिका, चीन और हांगकांग के बाद चौथे स्थान पर है।
जियो की लिस्टिंग सिर्फ मुकेश अंबानी की कंपनी के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय शेयर बाजार के लिए भी एक बड़ा घटनाक्रम है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि शेयर बाजार में कारोबार शुरू होने के बाद जियो के शेयर किस भाव पर खुलते हैं और आगे कंपनी अपने कारोबार को कितनी तेजी से बढ़ा पाती है।
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