गोमती पार के 40 गाँव: बरसात आते ही कट जाता है दुनिया से रिश्ता
पुल की माँग 15 साल पुरानी, प्रस्ताव तीन विभागों में अटका — Uncovered Bharat की ज़मीनी पड़ताल
बाराबंकी ज़िले में गोमती नदी के उस पार बसे लगभग 40 गाँवों के लिए मानसून का मतलब है चार महीने का अलगाव। नदी पार करने का एकमात्र रास्ता एक लकड़ी की नाव है, जो पानी बढ़ते ही बंद हो जाती है।
हमारी टीम ने तीन दिन इन गाँवों में बिताए। बीमारों को अस्पताल तक पहुँचाने के लिए ग्रामीण उन्हें चारपाई पर लादकर 9 किलोमीटर का चक्कर लगाते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों की हाज़िरी जुलाई से सितंबर के बीच लगभग आधी रह जाती है।
ग्रामीणों ने 2011 से अब तक पुल के लिए कम से कम छह बार लिखित आवेदन दिया है। आरटीआई के जवाब से पता चला कि प्रस्ताव लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग और ज़िला पंचायत के बीच घूम रहा है, लेकिन किसी के पास बजट की मंज़ूरी नहीं है।
Uncovered Bharat ने ज़िला प्रशासन से इस पर प्रतिक्रिया माँगी है। जवाब मिलने पर यह रिपोर्ट अपडेट की जाएगी।
- ग्रामीणों से बातचीत, 24–26 सितंबर 2026
- आरटीआई जवाब, लोक निर्माण विभाग
- ज़िला पंचायत बैठक के कार्यवृत्त
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हमारे गाँव की भी यही हालत है। बरसात में बच्चे स्कूल नहीं जा पाते। इस खबर को आगे बढ़ाइए।
आरटीआई का जवाब साझा करने के लिए धन्यवाद। प्रशासन को जवाब देना चाहिए।