भाजपा में पुराने कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामने आई, 11 पूर्व जिलाध्यक्षों ने उठाए संगठन पर सवाल
कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के 11 पूर्व जिलाध्यक्षों ने वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को सम्मानजनक जिम्मेदारी देने और विधानसभा चुनाव लड़ने का अवसर देने की मांग उठाई। संगठन में भागीदारी और उपेक्षा को लेकर उन्होंने नेतृत्व के सामने अपनी बात रखी।
भारतीय जनता पार्टी के कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में वरिष्ठ और पूर्व जिलाध्यक्षों की भूमिका को लेकर नाराजगी सामने आई है। क्षेत्र के 11 पूर्व जिलाध्यक्षों और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने संगठन में पुराने कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान, जिम्मेदारी और राजनीतिक अवसर देने की मांग उठाई है। इस मुद्दे को लेकर नेताओं ने पार्टी के राष्ट्रीय संगठक नागेंद्र नाथ त्रिपाठी के सामने अपनी बात रखी और पत्र के माध्यम से संगठन की कार्यशैली में सुधार की मांग की।
28 अक्टूबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व जिलाध्यक्षों ने पत्र में वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ाने, उन्हें संगठन में जिम्मेदारी देने और प्रदेश नेतृत्व से मुलाकात का समय निर्धारित करने की मांग की। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि प्रत्येक जिले से कम से कम एक पूर्व जिलाध्यक्ष को विधानसभा चुनाव लड़ाने पर विचार किया जाए।
वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने की मांग
पूर्व जिलाध्यक्षों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक संगठन को मजबूत करने के लिए काम किया है। ऐसे में उनके अनुभव और संगठनात्मक क्षमता का उपयोग किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि पार्टी में सरकार और संगठन के स्तर पर जिम्मेदारियों के बंटवारे में पुराने कार्यकर्ताओं को अपेक्षित महत्व नहीं मिल रहा है।
उन्होंने केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार होने का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चुनाव लड़ने और जीतने वाली पार्टी में अनुभवी पूर्व जिलाध्यक्षों को भी चुनाव लड़ने का अवसर क्यों नहीं दिया जाना चाहिए।
पूर्व जिलाध्यक्षों ने संगठन में सम्मानजनक पद और जिम्मेदारी देने के साथ-साथ निगमों तथा बोर्डों में रिक्त पदों पर वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को मनोनीत करने का आग्रह भी किया है। उनका मानना है कि इससे संगठन के अनुभव का उपयोग होगा और लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ेगी।
इन 11 पूर्व जिलाध्यक्षों ने उठाई आवाज
इस सामूहिक पहल में कानपुर देहात के मदन पांडेय, बंशलाल कटियार और राजेश सचान शामिल हैं। इनके अलावा कानपुर दक्षिण के रामदेव शुक्ला, कानपुर ग्रामीण के रविशंकर दीक्षित, औरैया के श्रीकांत पाठक, फतेहपुर के मनोज शुक्ला, हमीरपुर के मनोज गुप्ता, कन्नौज के योगेंद्र सिंह भदौरिया, झांसी के जगदीश सिंह चौहान और इटावा के अजय सिंह धाकरे ने भी अपनी बात रखी।
इन नेताओं की सामूहिक पहल से पार्टी के भीतर पुराने कार्यकर्ताओं की भूमिका और संगठनात्मक निर्णयों में उनकी भागीदारी का मुद्दा चर्चा में आया है।
गुटबाजी और उपेक्षा की शिकायतें
पूर्व जिलाध्यक्षों की शिकायतों से संगठन के भीतर जिम्मेदारियों के बंटवारे और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को अवसर देने को लेकर असंतोष की तस्वीर सामने आती है। हालांकि, गुटबाजी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। इसलिए इसे संगठन के भीतर उठी शिकायतों और असंतोष के संदर्भ में देखना अधिक उचित होगा।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर संगठनात्मक स्तर पर भी बदलाव किए हैं। अब यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि पार्टी नेतृत्व वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की मांगों पर क्या रुख अपनाता है और संगठन में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।
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