भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 300 गीगावॉट के करीब, सौर ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के बड़े अवसर: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो-2026 का उद्घाटन करते हुए स्वच्छ ऊर्जा को ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक मजबूती का आधार बताया। उन्होंने सौर, पवन और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भारत की प्रगति और निवेश के अवसरों पर प्रकाश डाला।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 को दिल्ली में आयोजित ‘भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों ने ऊर्जा सुरक्षा के महत्व को और स्पष्ट कर दिया है। स्वच्छ ऊर्जा को केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा और देश की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी से लेकर पश्चिम एशिया संकट तक दुनिया ने कई बड़े आर्थिक और ऊर्जा संबंधी संकटों का सामना किया है। उनके मुताबिक, भारत ने पिछले वर्षों में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश और नई व्यवस्थाएं विकसित की हैं, जिससे देश को वैश्विक संकटों के बीच अपनी आर्थिक वृद्धि बनाए रखने में मदद मिली है।
2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म क्षमता का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2021 में COP-26 के दौरान भारत ने 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा था।
उन्होंने कहा कि पेरिस जलवायु प्रतिबद्धता के तहत स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य भारत ने निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले, 2025 में हासिल कर लिया। प्रधानमंत्री के अनुसार, वर्तमान में देश की स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों पर आधारित है और कुल क्षमता लगभग 300 गीगावॉट तक पहुंच चुकी है।
उन्होंने कहा कि आने वाले 10 से 11 वर्षों में 500 गीगावॉट नई गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
पीएम सूर्यघर योजना से 65 लाख से अधिक घर जुड़े
प्रधानमंत्री ने फरवरी 2024 में शुरू की गई पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके तहत एक करोड़ घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य है। उनके अनुसार, पिछले 24 से 25 महीनों में 65 लाख से अधिक घर इस अभियान से जुड़ चुके हैं।
प्रधानमंत्री ने एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि इन घरों के बिजली बिलों में लगभग 76 प्रतिशत तक कमी आई है। उन्होंने यह भी बताया कि कई परिवारों के बिजली बिल शून्य हो गए हैं और कुछ परिवार अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचकर आय भी अर्जित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस तरह की योजनाएं विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा के नए अवसर खोल सकती हैं।
किसानों और सरकारी भवनों को सौर ऊर्जा से जोड़ने पर जोर
प्रधानमंत्री ने बताया कि देश में 44 हजार से अधिक सरकारी भवन सौर ऊर्जा से जुड़ चुके हैं, जिससे हर साल करीब 700 करोड़ रुपये की बचत हो रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री कुसुम योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि 30 लाख से अधिक किसानों के लिए सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई की व्यवस्था हुई है।
उन्होंने सौर ऊर्जा के नए उपयोगों की चर्चा करते हुए तालाबों और झीलों के ऊपर सोलर पैनल लगाने की अवधारणा का भी उल्लेख किया। इससे जलाशयों का बेहतर उपयोग करने और जमीन की आवश्यकता कम करने की संभावना बताई गई।
प्रधानमंत्री ने किसानों को केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि ऊर्जादाता बनाने की दिशा में काम करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि किसान अपनी खाली जमीन और खेतों की मेड़ों पर सोलर पैनल लगाकर बिजली उत्पादन में योगदान दे सकते हैं।
ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा कॉरिडोर पर निवेश
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत इस दशक के अंत तक 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य बताया। उन्होंने परिवहन क्षेत्र में भी ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही और भारत में शुरू की गई पहली ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाने के साथ उसे जरूरत वाले क्षेत्रों तक पहुंचाना भी जरूरी है। इसके लिए ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर, विशेष ट्रांसमिशन लाइन और सब-स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री के अनुसार, इस व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भारत ने करीब दो लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य तय किया है।
सोलर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में वृद्धि का दावा
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने सौर ऊर्जा उपकरणों के घरेलू उत्पादन में उल्लेखनीय विस्तार किया है। उनके अनुसार, एक दशक पहले देश की सोलर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता करीब दो गीगावॉट थी, जो अब 200 गीगावॉट से अधिक हो गई है। वहीं, सोलर सेल की विनिर्माण क्षमता लगभग 40 गीगावॉट तक पहुंच गई है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य सौर ऊर्जा से जुड़े अन्य उपकरणों और कंपोनेंट्स के घरेलू उत्पादन को भी बढ़ाना है। इससे आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान को भी मजबूती मिल सकती है।
बैटरी स्टोरेज और ग्रीन जॉब्स में अवसर
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार के लिए ऊर्जा भंडारण की बेहतर तकनीक और स्वदेशी बैटरी समाधान विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने स्टार्टअप, आईआईटी, शोधकर्ताओं और निवेशकों से इस क्षेत्र में नए समाधान तैयार करने का आह्वान किया।
उन्होंने सौर ऊर्जा से खाना पकाने, इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने और डेयरी व कृषि क्षेत्र में सौर उपकरणों के उपयोग की संभावनाओं का भी उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में विनिर्माण, स्थापना, रखरखाव और परिवहन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। भविष्य में सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ने के साथ इन अवसरों का विस्तार हो सकता है।
नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 20 लाख करोड़ रुपये के अवसर
निवेशकों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में बीते एक दशक के दौरान 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 के RE-INVEST सम्मेलन से लेकर अब तक लगभग दो वर्षों में करीब छह लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है।
प्रधानमंत्री ने अनुमान जताया कि इस दशक के अंत तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश अवसर पैदा हो सकते हैं।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री के अनुसार, इंटरनेशनल सोलर अलायंस के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा के लिए जरूरी वित्त, तकनीक और विशेषज्ञता जरूरतमंद देशों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में अफ्रीका के लिए 200 मिलियन डॉलर की अफ्रीका सोलर फैसिलिटी का प्रस्ताव भी रखा गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाला दशक जलवायु लक्ष्यों के लिहाज से महत्वपूर्ण है और स्वच्छ, हरित तथा सुरक्षित भविष्य के निर्माण के लिए सभी देशों और क्षेत्रों की भागीदारी जरूरी है।
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