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ईरान-अमेरिका के बीच बातचीत जारी, लेकिन युद्धविराम पर सहमति नहीं; चीन और रूस ने दी सैन्य कार्रवाई के खिलाफ चेतावनी

आठ महीने से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थों के जरिए बातचीत जारी है। तेहरान ने सात सूत्रीय प्रस्ताव में बदलाव किया है, लेकिन अब तक कोई समझौता नहीं हो सका है।

ईरान-अमेरिका के बीच बातचीत जारी, लेकिन युद्धविराम पर सहमति नहीं; चीन और रूस ने दी सैन्य कार्रवाई के खिलाफ चेतावनी

ईरान और अमेरिका के बीच आठ महीने से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच अब तक किसी समझौते पर सहमति नहीं बन पाई है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को पुष्टि की कि दोनों पक्ष मध्यस्थों के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान कर रहे हैं। कतर की मध्यस्थता में हाल के दिनों में हुई बातचीत के बाद ईरान ने अपने प्रस्ताव में कुछ बदलाव किए हैं, लेकिन वार्ता से कोई निर्णायक नतीजा नहीं निकला।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच संवाद जारी है, हालांकि मुद्दा जटिल है। उनके मुताबिक, मध्यस्थों के माध्यम से बातचीत आगे बढ़ाई जा रही है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले युद्ध दोबारा शुरू होने की आशंका जताई जा रही है। इस बीच चीन और रूस ने भी संभावित सैन्य कार्रवाई के खिलाफ बयान दिए हैं और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है।

ईरान का सात सूत्रीय प्रस्ताव बना बातचीत का आधार

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बघाई ने बताया कि सितंबर में युद्ध समाप्त करने के लिए पेश किया गया सात सूत्रीय प्रस्ताव अभी भी बातचीत का आधार है। हालांकि, अब इस प्रस्ताव को संक्षिप्त कर दिया गया है।

बघाई के अनुसार, संशोधित प्रस्ताव को इस तरह तैयार किया गया है कि इसे दो दिनों के भीतर लागू करना संभव हो सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्ताव को छोटा करने का अर्थ ईरान की मूल शर्तों में बदलाव करना नहीं है।

ईरान के प्रस्ताव में प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें शामिल हैं:

अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नाकेबंदी समाप्त करे।

ईरान रणनीतिक महत्व वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोले।

अमेरिका ईरान के तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों में छूट दे।

ईरान पर लगाए गए नए प्रतिबंध रद्द किए जाएं।

इन शर्तों के बाद अन्य विवादित मुद्दों पर बातचीत शुरू हो।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सितंबर में ईरान के इस सात सूत्रीय प्रस्ताव को पहले ही खारिज कर चुके हैं।

परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत से पहले शर्तें पूरी करने की मांग

ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत तभी शुरू हो सकती है, जब वह अपनी निर्धारित शर्तों के पूरा होने की पुष्टि कर लेगा।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि प्रस्ताव को संक्षिप्त करने से तेहरान का मूल रुख नहीं बदला है।

बातचीत के दौरान ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को किसी दूसरे देश में स्थानांतरित करने की संभावना पर भी सवाल पूछा गया। इस पर बघाई ने कहा कि ऐसा कोई मुद्दा बातचीत में नहीं उठाया गया और ईरान इस दिशा में सहमति देने के लिए तैयार नहीं है।

वार्ता से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, ईरानी वार्ताकार रविवार को वापस लौट गए थे। हालांकि, अधिकारी ने स्पष्ट किया कि उनकी वापसी बातचीत में किसी समस्या के कारण नहीं हुई। उन्होंने यह भी बताया कि एक मसौदा प्रस्ताव विभिन्न पक्षों के बीच साझा किया जा रहा है, लेकिन इसके विस्तृत प्रावधानों की जानकारी नहीं दी।

ईरान को समझौते से ज्यादा अमेरिकी हमले की आशंका

कूटनीतिक बातचीत के बावजूद ईरान से जुड़े कुछ सूत्रों का मानना है कि समझौते की तुलना में अमेरिका की ओर से नए सैन्य हमले की आशंका अधिक है।

दूसरी ओर, सोमवार को कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग चार प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे संकेत मिला कि निवेशक युद्ध समाप्त होने की संभावनाओं पर नजर बनाए हुए हैं।

हालांकि, ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उस पर दोबारा हमला किया गया तो वह आक्रामक जवाब देगा। तेहरान ने मध्य पूर्व के भीतर और बाहर संभावित लक्ष्यों पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

चीन ने सैन्य कार्रवाई के बजाय राजनीतिक समाधान पर दिया जोर

युद्ध के दोबारा भड़कने की आशंकाओं के बीच चीन ने सभी संबंधित पक्षों से सैन्य कार्रवाई के बजाय राजनीतिक समाधान पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की है।

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने सोमवार को बीजिंग में ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी अली बघेरी कनी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि संघर्ष में शामिल सभी पक्षों को हथियारों के इस्तेमाल के बजाय बातचीत और राजनीतिक समाधान को प्राथमिकता देनी चाहिए।

रूस ने भी ईरान के खिलाफ संभावित नई सैन्य कार्रवाई से जुड़ी खबरों पर गंभीर चिंता जताई। रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि ऐसी किसी भी कार्रवाई से क्षेत्रीय तनाव बढ़ सकता है। मॉस्को ने सभी पक्षों से कूटनीतिक प्रयास तेज करने की अपील की।

होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ शुरू किए गए सैन्य अभियान के बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष लगातार गंभीर बना हुआ है। युद्ध के दौरान ईरान ने महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी लागू की।

इस संघर्ष के दौरान खाड़ी देशों को ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों का सामना करना पड़ा है। यमन में भी संघर्ष फिर से तेज हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसके बाधित होने से तेल और गैस की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है।

ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता उस समय और बढ़ गई, जब शुक्रवार को फारस की खाड़ी में कतर की एक एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) टैंकर को अज्ञात वस्तुओं से नुकसान पहुंचा। जहाज संचालक कंपनी नकिलात ने रविवार को इस घटना की पुष्टि की।

युद्ध के दौरान खाड़ी और लाल सागर में तेल टैंकरों पर हमलों की घटनाएं सामने आती रही हैं, लेकिन एलएनजी वाहक जहाजों पर हमले अपेक्षाकृत दुर्लभ रहे हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और समुद्री परिवहन की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

कूटनीतिक प्रयासों के बीच दुनिया की नजरें अमेरिका पर

ईरान और अमेरिका के बीच जारी बातचीत का भविष्य अभी स्पष्ट नहीं है। एक ओर ईरान अपने सात सूत्रीय प्रस्ताव को बातचीत का आधार बनाए रखना चाहता है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर चुके हैं।

चीन और रूस की ओर से कूटनीतिक समाधान की अपील तथा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताएं इस संघर्ष के अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को दर्शाती हैं।

फिलहाल, मध्यस्थों के जरिए संवाद जारी है, लेकिन युद्धविराम की दिशा में कोई अंतिम सहमति सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में दोनों देशों का रुख और मध्यस्थों के प्रयास तय करेंगे कि यह संघर्ष बातचीत के जरिए समाप्त होने की ओर बढ़ता है या क्षेत्र में सैन्य तनाव फिर बढ़ता है।

✓ संपादकीय जाँच: प्रूफ़रीडिंग DP Singh · प्रकाशन की मंज़ूरी DP Singh · हमारे मानक

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