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जयपुर की नींदड़ पहाड़ियों में गुमनाम धरोहर, खंडहर बन रहा छोटा किला

जयपुर की नींदड़ पहाड़ियों में झाड़ियों के बीच छिपी एक पुरानी किले जैसी इमारत शहर की अनदेखी विरासत की कहानी कहती है। सवाल है कि क्या ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने के लिए सिर्फ मशहूर पर्यटन स्थलों पर ही ध्यान दिया जाएगा?

जयपुर की नींदड़ पहाड़ियों में गुमनाम धरोहर, खंडहर बन रहा छोटा किला

जयपुर को आमतौर पर उसके किलों, महलों और ऐतिहासिक इमारतों के लिए जाना जाता है। आमेर का किला, नाहरगढ़ और हवा महल देखने हर साल देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। लेकिन शहर की पहचान सिर्फ इन्हीं जगहों तक सीमित नहीं है। अरावली की पहाड़ियों में कुछ ऐसी पुरानी जगहें भी हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।

ऐसी ही एक जगह जयपुर की नींदड़ पहाड़ियों में दिखाई देती है। यहां एक छोटी किले जैसी इमारत है, जो चारदीवारी से घिरी हुई है। इसे देखकर लगता है कि कभी यहां रहने या किसी खास काम के लिए एक व्यवस्थित परिसर रहा होगा। हालांकि, इसके निर्माण का समय, असली उद्देश्य और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की पुष्टि करने वाले प्रमाण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं।

पहाड़ी का रास्ता भी अपने आप में खास है

इस जगह तक पहुंचने के लिए पथरीले रास्ते और छोटी पगडंडी से होकर गुजरना पड़ता है। रास्ते में एक पुराना शिव मंदिर दिखाई देता है। आसपास पेड़-पौधे और झाड़ियां हैं। बरसात के मौसम में यह इलाका और हरा-भरा हो जाता है। यहां मोर भी दिखाई दे सकते हैं।

करीब एक घंटे की चढ़ाई के बाद जब इस इमारत तक पहुंचते हैं, तो इसकी हालत निराश करती है। चारों ओर घनी झाड़ियां हैं और अंदर का हिस्सा भी काफी जर्जर दिखाई देता है। जिस जगह को ऐतिहासिक या स्थानीय विरासत के रूप में देखा जा सकता है, वहां तक पहुंचने और उसकी देखरेख की कोई स्पष्ट व्यवस्था नजर नहीं आती।

क्या यह जगह इतिहास के रिकॉर्ड में दर्ज है?

जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के एक मास्टर प्लान दस्तावेज में “Nendar Fort & Palace” को ऐतिहासिक महत्व वाली इमारतों की सूची में शामिल किया गया है। नाम की समानता से यह नींदड़ की इस जगह से संबंधित हो सकती है, लेकिन उपलब्ध दस्तावेज से यह निश्चित नहीं होता कि दोनों एक ही स्थान हैं।

यह अंतर समझना जरूरी है। किसी इमारत का ऐतिहासिक महत्व होना और उसका सरकार की ओर से संरक्षित स्मारक घोषित होना दो अलग बातें हैं। राजस्थान के प्राचीन स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों की सुरक्षा के लिए 1961 का कानून मौजूद है। लेकिन इस विशेष इमारत का वर्तमान संरक्षण दर्जा और इसके इतिहास की पुष्टि संबंधित विभाग के रिकॉर्ड से होनी चाहिए।

क्या केवल मशहूर पर्यटन स्थलों को बचाना काफी है?

जयपुर की ऐतिहासिक पहचान बनाने में यहां के किलों, महलों, मंदिरों और पुरानी बस्तियों की बड़ी भूमिका रही है। राजस्थान सरकार का पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण, सर्वेक्षण, शोध और दस्तावेजीकरण का काम करता है।

लेकिन किसी कम चर्चित जगह को बचाने के लिए पहले उसका सर्वेक्षण होना चाहिए। उसके निर्माण की तारीख, वास्तुकला, स्थानीय इतिहास और मौजूदा स्थिति की जानकारी जुटानी होगी। उसके बाद तय किया जा सकता है कि मरम्मत, सफाई, सुरक्षा या पर्यटन की दृष्टि से कौन-से कदम जरूरी हैं।

नींदड़ की इस किले जैसी इमारत के मामले में भी पहला कदम यही होना चाहिए। संबंधित विभाग को मौके का निरीक्षण कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि इमारत कौन-सी ऐतिहासिक धरोहर है, उसका संरक्षण किसके जिम्मे है और उसे बचाने के लिए क्या किया जा सकता है।

विरासत बचाना सिर्फ पर्यटन बढ़ाना नहीं है

हर ऐतिहासिक जगह से कमाई हो, यह जरूरी नहीं। कुछ जगहों का महत्व इसलिए होता है क्योंकि वे किसी शहर के अतीत और उसकी सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी होती हैं। अगर किसी पुरानी इमारत को केवल इसलिए नजरअंदाज कर दिया जाए कि वहां पर्यटक नहीं आते, तो धीरे-धीरे उसका इतिहास भी लोगों की यादों से मिट सकता है।

सरकारें बदलती हैं, योजनाओं के नाम बदलते हैं और विकास की प्राथमिकताएं भी बदलती रहती हैं। लेकिन इतिहास को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती।

जयपुर की पहचान को बचाना है, तो आमेर और नाहरगढ़ जैसे प्रसिद्ध स्थलों के साथ-साथ उन कम चर्चित जगहों पर भी ध्यान देना होगा, जिनकी कहानी अभी सामने आनी बाकी है। नींदड़ की पहाड़ियों में मौजूद इस इमारत का इतिहास खोजा जाए, उसकी हालत का आकलन हो और जरूरी संरक्षण किया जाए। तभी आने वाली पीढ़ियों को अपने शहर की विरासत के बारे में जानने का मौका मिलेगा।

स्रोत
  1. भ्रमण
✓ संपादकीय जाँच: प्रूफ़रीडिंग DP Singh · प्रकाशन की मंज़ूरी DP Singh · हमारे मानक

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ashutosh chauhan 1 सप्ताह पहले

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