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फर्जी बैनामा मामले में 33 साल बाद फैसला, दोषी को 10 साल की कैद और 2 लाख रुपये जुर्माना

कानपुर देहात की FTC-1 अदालत ने 1991 के फर्जी बैनामा और धोखाधड़ी मामले में मथुरा लोधी को दोषी ठहराते हुए 10 साल के साधारण कारावास और 2 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।

फर्जी बैनामा मामले में 33 साल बाद फैसला, दोषी को 10 साल की कैद और 2 लाख रुपये जुर्माना

उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में 33 साल पुराने फर्जी बैनामा और धोखाधड़ी के मामले में न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए अभियुक्त को 10 वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। फास्ट ट्रैक कोर्ट (FTC-1) ने दोषी मथुरा लोधी पर दो लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर उसे एक वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।

1991 में दूसरे के खेत का कराया था फर्जी बैनामा

मामला थाना डेरापुर क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार, 27 मार्च 1991 को अभियुक्त मथुरा लोधी पुत्र मुल्ला लोधी, निवासी मायाराम निवादा, मजरा असालतगंज, थाना रसूलाबाद ने कथित तौर पर धोखाधड़ी कर दूसरे व्यक्ति के खेत का फर्जी बैनामा करा लिया था।

इस मामले में थाना डेरापुर में मुकदमा अपराध संख्या 35/1991 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467 और 468 में मुकदमा दर्ज किया गया था।

1991 में ही न्यायालय भेजा गया था आरोप पत्र

मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने साक्ष्य संकलित किए और 20 सितंबर 1991 को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया था। इसके बाद न्यायालय में मामले की सुनवाई चली।

ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत हुई प्रभावी पैरवी

पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत थाना डेरापुर पुलिस, कोर्ट पैरोकार, अभियोजन पक्ष और मॉनिटरिंग सेल ने मामले में प्रभावी पैरवी की।

लगातार की गई पैरवी और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर FTC-1 न्यायालय, कानपुर देहात ने मथुरा लोधी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।

कानून व्यवस्था के लिहाज से अहम फैसला

पुलिस प्रशासन ने इस फैसले को पुराने आपराधिक मामलों में प्रभावी पैरवी और न्यायिक प्रक्रिया के तहत दोषियों को सजा दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

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