कानपुर देहात: राजपुर की ग्राम पंचायतों में भुगतान अभिलेखों पर सवाल, जांच के आदेश
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर फर्मों के नाम दर्ज भुगतान और अपलोड बिल-वाउचर में कथित विसंगतियां सामने आई हैं। डीपीआरओ ने एडीओ पंचायत से जांच कराने और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की बात कही है।
राजपुर विकासखंड की ग्राम पंचायतों में सरकारी धनराशि के इस्तेमाल और भुगतान से जुड़े अभिलेखों पर सवाल उठे हैं। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर फर्मों के नाम लाखों रुपये के भुगतान दर्ज होने के बावजूद उनसे जुड़े अपलोड बिल और वाउचर में कथित विसंगतियां सामने आई हैं। कुछ मामलों में सामग्री खरीद का विवरण देने के बजाय सीधे कार्य का नाम बिल में दर्ज होने की बात कही जा रही है। वहीं, कुछ भुगतान के समर्थन में फर्म के बजाय व्यक्तिगत नाम से जुड़े दस्तावेज अपलोड होने का आरोप है।
इन अभिलेखों को लेकर सरकारी धन के खर्च की पारदर्शिता और भुगतान प्रक्रिया की जांच की मांग उठ रही है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन विसंगतियों के पीछे तकनीकी या दस्तावेजी त्रुटि है अथवा वित्तीय अनियमितता। इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर दर्ज भुगतान की जांच जरूरी
ग्राम पंचायतों में वित्तीय लेनदेन और विकास कार्यों का विवरण सार्वजनिक करने के लिए ई-ग्राम स्वराज और प्रिया सॉफ्ट जैसे पोर्टल का उपयोग किया जाता है। इनका उद्देश्य पंचायतों में होने वाले खर्च का रिकॉर्ड उपलब्ध कराना और वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाना है।
राजपुर विकासखंड में पोर्टल पर दर्ज भुगतान और उनके समर्थन में अपलोड किए गए दस्तावेजों के बीच अंतर होने के आरोप हैं। कुछ मामलों में फर्म के नाम भुगतान दर्ज होने के बावजूद बिल पर सामग्री का विवरण नहीं होने और सीधे कार्य का नाम लिखे होने की बात सामने आई है।
इसके अलावा, कुछ भुगतानों की तारीख और संबंधित कार्य या खरीद की तारीख में अंतर होने का दावा किया गया है। अगस्त, सितंबर और अक्टूबर के दौरान दर्ज भुगतानों के दस्तावेजों में भी कथित विसंगतियों की ओर ध्यान दिलाया गया है। कुछ वाउचर पर संबंधित व्यक्तियों के हस्ताक्षर नहीं होने और फर्म के नाम भुगतान के साथ व्यक्तिगत नाम के दस्तावेज अपलोड होने की बात भी कही जा रही है।
छह से अधिक ग्राम पंचायतों के अभिलेख जांच के दायरे में
राजपुर विकासखंड की अमराहट, खोजाफूल, सिल्हौला बुजुर्ग, फिरोजपुर, मानपुर और महमूदपुर समेत अन्य ग्राम पंचायतों के भुगतान अभिलेखों की जांच की मांग उठ रही है।
वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए पोर्टल पर दर्ज भुगतान का मूल बिल, वाउचर, बैंक अभिलेख और संबंधित विकास कार्यों से मिलान जरूरी है। जिन फर्मों के नाम धनराशि जारी की गई है, उनसे हुई सामग्री आपूर्ति और कराए गए कार्यों का मौके पर सत्यापन भी महत्वपूर्ण होगा।
यदि दस्तावेजों में अंतर पाया जाता है तो यह भी जांचना होगा कि भुगतान किस अधिकारी या कर्मचारी की स्वीकृति से हुआ और उसकी प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन किया गया या नहीं।
निगरानी व्यवस्था की जवाबदेही पर भी सवाल
पंचायतों के वित्तीय लेनदेन की निगरानी करने वाले ब्लॉक और जिला स्तर के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। सवाल यह है कि यदि भुगतान से जुड़े दस्तावेजों में विसंगतियां थीं, तो उनकी जांच और सत्यापन किस स्तर पर किया गया।
इस संबंध में जिला पंचायत राज अधिकारी विकास पटेल ने बताया कि उन्हें इस तरह के प्रकरण की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि विकास कार्यों के नाम पर नियमों के विपरीत भुगतान किया गया है तो यह गंभीर अनियमितता है। एडीओ पंचायत से मामले की जांच कराई जाएगी और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि भुगतान संबंधी दस्तावेजों में मिली कथित विसंगतियां केवल रिकॉर्ड की त्रुटियां हैं या इनके पीछे कोई वित्तीय अनियमितता हुई है।
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