कानपुर देहात के सिठमरा में स्वास्थ्य शिविर, 60 मरीजों की जांच; 22 में बुखार, एक में डेंगू के संभावित लक्षण
डेरापुर क्षेत्र के सिठमरा गांव में स्वास्थ्य विभाग ने शिविर लगाकर मरीजों की जांच और उपचार किया। डेंगू के संभावित लक्षण वाले एक मरीज का रक्त नमूना जांच के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा गया है।
बदलते मौसम के बीच बुखार और अन्य मौसमी बीमारियों की शिकायतों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार को ग्राम सिठमरा में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया। शिविर में कुल 60 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इनमें 22 मरीज बुखार से पीड़ित पाए गए, जबकि एक मरीज में डेंगू के संभावित लक्षण दिखाई दिए। स्वास्थ्य टीम ने मरीजों को आवश्यक परामर्श और दवाइयां उपलब्ध कराईं।
मुख्य चिकित्साधिकारी के निर्देश पर आयोजित इस शिविर में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में घर-घर जाकर भी लोगों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी जुटाई। बीमार पाए गए ग्रामीणों को जांच और उपचार के लिए शिविर तक लाया गया। यहां चिकित्सकों ने मरीजों की जांच कर उनकी शिकायतों के अनुसार दवाइयां दीं।
22 मरीजों में बुखार के लक्षण
शिविर में शामिल चिकित्सक डॉ. तौसीफ अली ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण वायरल बुखार, सर्दी और जुकाम की शिकायतें सामने आ रही हैं। शिविर में पहुंचे 22 मरीजों ने बुखार के साथ सर्दी-जुकाम की समस्या बताई। स्वास्थ्य टीम ने उनका परीक्षण किया और मौके पर ही आवश्यक उपचार तथा दवाइयां उपलब्ध कराईं।
डॉक्टर ने ग्रामीणों को सलाह दी कि बुखार या अन्य लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराएं। समय पर जांच और उपचार से बीमारी की स्थिति का सही आकलन किया जा सकता है।
एक मरीज में मिले डेंगू के संभावित लक्षण
शिविर के दौरान एक मरीज में तेज बुखार, शरीर में दर्द और आंखों में जलन जैसी शिकायतें सामने आईं। चिकित्सक के अनुसार, मरीज में प्लेटलेट्स कम होने की जानकारी के साथ डेंगू के कुछ संभावित लक्षण भी पाए गए।
स्वास्थ्य टीम ने मरीज का रक्त नमूना एकत्र किया, जिसे जांच के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा जा रहा है। चिकित्सक ने स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही डेंगू संक्रमण की पुष्टि हो सकेगी। फिलहाल मरीज की हालत स्थिर बताई गई है और उसे आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है।
डेंगू और मलेरिया से बचाव के लिए दी जानकारी
शिविर के दौरान डॉ. तौसीफ अली ने ग्रामीणों को डेंगू और मलेरिया से बचाव के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि मच्छरों के पनपने से रोकने के लिए घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से कूलर, गमलों, पुराने टायरों और अन्य बर्तनों में जमा पानी को नियमित रूप से साफ करने की सलाह दी। इसके साथ ही मच्छरदानी का प्रयोग करने और घर के आसपास साफ-सफाई बनाए रखने पर जोर दिया।
डॉक्टर ने ग्रामीणों से अपील की कि बुखार होने पर झोलाछाप से उपचार कराने के बजाय नजदीकी सरकारी अस्पताल में जांच कराएं। जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विभाग की सेवाओं का लाभ लें।
स्वास्थ्य टीम और आशा कार्यकर्ताओं ने किया सहयोग
स्वास्थ्य शिविर के आयोजन में फार्मासिस्ट देवेश्वर दयाल, स्टाफ नर्स विष्णु शर्मा, दीपा पांडेय और सबीना बानो ने सहयोग किया। आशा कार्यकर्ताओं ने गांव में भ्रमण कर ग्रामीणों को शिविर की जानकारी दी और बीमार लोगों को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए पहुंचाने में मदद की।
शिविर में पहुंचे ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग की इस पहल की सराहना की। उन्होंने गांव में नियमित अंतराल पर ऐसे स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने की मांग भी की, ताकि ग्रामीणों को समय पर जांच और उपचार की सुविधा मिल सके।
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