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दिल्ली-NCR में प्रॉपर्टी खरीदने से पहले सावधान! बिना RERA रजिस्ट्रेशन वाले प्रोजेक्ट में पैसा लगाने से हो सकता है नुकसान

गुरुग्राम के रियल एस्टेट नियामक हरेरा ने खरीदारों को बिना पंजीकरण वाले प्रोजेक्ट से दूर रहने की सलाह दी है। जानिए फ्लैट या प्लॉट खरीदने से पहले किन दस्तावेजों की जांच जरूरी है और बिल्डर या एजेंट पर कब कार्रवाई हो सकती है।

दिल्ली-NCR में प्रॉपर्टी खरीदने से पहले सावधान! बिना RERA रजिस्ट्रेशन वाले प्रोजेक्ट में पैसा लगाने से हो सकता है नुकसान

दिल्ली-NCR में अपना घर या प्लॉट खरीदना कई लोगों का सपना होता है। कोई परिवार के रहने के लिए फ्लैट खरीदता है, तो कोई भविष्य में अच्छा रिटर्न पाने की उम्मीद में प्रॉपर्टी में निवेश करता है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे शहर इस लिहाज से खरीदारों के पसंदीदा बाजार हैं।

लेकिन यहां एक सवाल सबसे ज्यादा जरूरी है: जिस प्रॉपर्टी में आप अपनी मेहनत की कमाई लगा रहे हैं, क्या वह कानूनी रूप से पंजीकृत है?

कई बार बिल्डर सस्ते दाम, जल्दी कब्जा देने या शानदार सुविधाओं का वादा करके लोगों को प्रॉपर्टी खरीदने के लिए आकर्षित करते हैं। खरीदार भी अच्छा ऑफर देखकर जल्दबाजी में बुकिंग करा लेते हैं। बाद में पता चलता है कि प्रोजेक्ट का जरूरी पंजीकरण नहीं है या उसके दस्तावेजों में कोई समस्या है। ऐसी स्थिति में खरीदार को पैसा फंसने, निर्माण में देरी और कानूनी विवाद जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

इसी तरह के जोखिम से लोगों को बचाने के लिए हरियाणा रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (हरेरा), गुरुग्राम ने सलाह दी है कि किसी भी प्रॉपर्टी की बुकिंग या खरीद से पहले उसके रेरा रजिस्ट्रेशन और दूसरी जरूरी जानकारियों की जांच जरूर करें।

RERA रजिस्ट्रेशन क्यों जरूरी है?

RERA यानी रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी। भारत में रियल एस्टेट क्षेत्र को ज्यादा पारदर्शी बनाने और घर खरीदारों के हितों की रक्षा करने के लिए रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 लागू किया गया था।

इस कानून के तहत जिन रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स पर पंजीकरण की शर्त लागू होती है, उन्हें संबंधित राज्य के रेरा प्राधिकरण में पंजीकरण कराना होता है। पंजीकरण से खरीदार को प्रोजेक्ट से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां आधिकारिक रिकॉर्ड में देखने का मौका मिलता है।

हालांकि, सिर्फ रेरा नंबर होना ही इस बात की गारंटी नहीं है कि प्रॉपर्टी से जुड़ी हर समस्या खत्म हो गई है। खरीदार को जमीन के मालिकाना हक, स्वीकृत नक्शे, संबंधित सरकारी मंजूरियों और समझौते की शर्तों की भी जांच करनी चाहिए।

फ्लैट या प्लॉट खरीदने से पहले ये दस्तावेज जांचें

हरेरा की सलाह का सबसे अहम हिस्सा यही है कि खरीदार केवल बिल्डर या प्रॉपर्टी एजेंट की बात पर भरोसा न करें। संबंधित प्रोजेक्ट की जानकारी आधिकारिक रेरा पोर्टल पर खुद भी जांचें।

1. रेरा रजिस्ट्रेशन नंबर और प्रमाणपत्र

सबसे पहले बिल्डर से प्रोजेक्ट का रेरा रजिस्ट्रेशन नंबर और प्रमाणपत्र मांगें। इसके बाद संबंधित राज्य के आधिकारिक रेरा पोर्टल पर जाकर देखें कि नंबर उसी प्रोजेक्ट का है या नहीं। प्रोजेक्ट का नाम, प्रमोटर और पता भी मिलाकर जांचें।

2. प्रोजेक्ट का सही नाम और पता

कभी-कभी विज्ञापन में इस्तेमाल किया गया नाम और आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज नाम अलग हो सकता है। इसलिए सिर्फ नाम देखकर फैसला न करें। रेरा पोर्टल पर दर्ज पते और उस जगह की जानकारी का मिलान करें, जहां आपको प्रॉपर्टी दिखाई जा रही है।

3. स्वीकृत नक्शा और जरूरी मंजूरियां

यह पता करें कि प्रोजेक्ट के लिए जरूरी सरकारी मंजूरियां ली गई हैं या नहीं। जमीन के दस्तावेज, स्वीकृत साइट प्लान और लागू होने वाली दूसरी अनुमतियों की जांच भी जरूरी है। जरूरत पड़ने पर स्वतंत्र प्रॉपर्टी वकील की मदद लें।

4. बिल्डर के वादों की पुष्टि

अगर बिल्डर कहता है कि प्रोजेक्ट जल्द पूरा हो जाएगा, सड़क या मेट्रो पास में है या कोई खास सुविधा मिलने वाली है, तो इन दावों की पुष्टि करें। केवल ब्रोशर, सोशल मीडिया पोस्ट या मौखिक आश्वासन के आधार पर भुगतान न करें।

5. भुगतान और एग्रीमेंट की शर्तें

बुकिंग से पहले यह पढ़ें कि भुगतान किस चरण में करना है, कब्जा कब मिलने का वादा है, देरी होने पर क्या शर्तें लागू होंगी और बुकिंग रद्द करने पर पैसे वापस मिलने के क्या नियम हैं। बिना पढ़े किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर न करें।

क्या हर प्रॉपर्टी के लिए RERA रजिस्ट्रेशन जरूरी है?

यह बात समझना बेहद जरूरी है कि हर तरह की प्रॉपर्टी पर रेरा पंजीकरण की शर्त एक जैसी लागू नहीं होती। कानून में कुछ छूट और अपवाद भी हैं। उदाहरण के लिए, अधिनियम की धारा 3 के तहत कुछ छोटे प्रोजेक्ट और कुछ विशेष परिस्थितियों वाले प्रोजेक्ट पंजीकरण से छूट पा सकते हैं।

इसी तरह, पहले से बने किसी फ्लैट की रीसेल खरीद और बिल्डर से नए प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीदने की स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए किसी प्रोजेक्ट का रेरा नंबर नहीं मिलने पर तुरंत यह मान लेना सही नहीं होगा कि वह गैरकानूनी है। पहले यह जांचना जरूरी है कि उस प्रोजेक्ट पर पंजीकरण की कानूनी शर्त लागू होती भी है या नहीं।

फिर भी, यदि बिल्डर नया प्रोजेक्ट बेच रहा है और उस पर रेरा पंजीकरण जरूरी है, तो पंजीकरण की पुष्टि किए बिना बुकिंग या भुगतान करना जोखिम भरा हो सकता है।

बिना रजिस्ट्रेशन प्रोजेक्ट बेचने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?

रियल एस्टेट अधिनियम की धारा 3 उन परियोजनाओं पर लागू होती है जिन्हें कानून के अनुसार पंजीकरण कराना जरूरी है। ऐसी परियोजना का पंजीकरण कराए बिना विज्ञापन करना, मार्केटिंग करना, बुकिंग लेना या बिक्री की पेशकश करना कानून का उल्लंघन हो सकता है।

अधिनियम की धारा 59 में इसके लिए दंड का प्रावधान है। इसके तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रमोटर पर प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत के 10% तक जुर्माना लगाया जा सकता है। अगर उल्लंघन के बावजूद कानून का पालन नहीं किया जाता, तो धारा 59(2) के तहत तीन साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों का प्रावधान हो सकता है। कार्रवाई मामले के तथ्यों और कानून के अनुसार होती है।

इसका मतलब यह है कि बिल्डर के लिए केवल आकर्षक विज्ञापन देकर प्रोजेक्ट बेचना पर्याप्त नहीं है। उसे लागू होने वाले पंजीकरण और नियामकीय नियमों का पालन करना जरूरी है।

प्रॉपर्टी एजेंट भी नियमों के दायरे में आते हैं

खरीदारों को यह भी देखना चाहिए कि उनके साथ सौदा करा रहा एजेंट पंजीकृत है या नहीं। रियल एस्टेट अधिनियम की धारा 9 के तहत, जिन एजेंटों को रेरा के तहत पंजीकरण कराना जरूरी है, उन्हें पंजीकरण के बिना पंजीकृत परियोजनाओं की बिक्री या खरीद में सुविधा देने का काम नहीं करना चाहिए।

एजेंट का रजिस्ट्रेशन नंबर और संबंधित प्राधिकरण के रिकॉर्ड की जांच करना भी उपयोगी है। अगर कोई एजेंट आपको दस्तावेज दिखाने से बच रहा है या तुरंत पैसा जमा करने का दबाव बना रहा है, तो सावधानी बरतें।

भ्रामक विज्ञापन और प्री-लॉन्च ऑफर से रहें सावधान

कई बार खरीदारों को ऐसे ऑफर दिखाई देते हैं जिनमें दावा किया जाता है कि शुरुआती बुकिंग पर बहुत कम कीमत में फ्लैट मिलेगा या आगे चलकर बड़ा मुनाफा होगा। कुछ विज्ञापनों में प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने से पहले ही बिक्री का प्रचार किया जा सकता है।

ऐसे मामलों में सबसे पहले यह पता करें कि प्रोजेक्ट की वास्तविक स्थिति क्या है और क्या उसे विज्ञापन या बिक्री के लिए जरूरी मंजूरी मिली है। केवल 'प्री-लॉन्च ऑफर', 'सीमित समय की डील' या 'गारंटीड रिटर्न' जैसे शब्दों से प्रभावित होकर पैसा न लगाएं।

अगर किसी प्रोजेक्ट के दस्तावेज या विज्ञापन संदिग्ध लगते हैं, तो संबंधित रेरा प्राधिकरण से जानकारी लें। भुगतान से पहले सभी जरूरी दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच कराना ज्यादा सुरक्षित तरीका है।

नोएडा या गुरुग्राम में निवेश करने वालों के लिए क्या सीख है?

दिल्ली-NCR में प्रॉपर्टी खरीदते समय केवल लोकेशन, कीमत और भविष्य में दाम बढ़ने की उम्मीद को देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। प्रोजेक्ट की कानूनी स्थिति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

गुरुग्राम में संबंधित जानकारी के लिए हरेरा गुरुग्राम के आधिकारिक पोर्टल पर जांच करें। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में प्रोजेक्ट की स्थिति के लिए उत्तर प्रदेश रेरा (UP RERA) का पोर्टल देखें। किसी दूसरे शहर में निवेश कर रहे हैं, तो वहां के संबंधित राज्य प्राधिकरण के रिकॉर्ड की जांच करें।

सबसे जरूरी बात यह है कि अपनी जीवनभर की बचत किसी भी प्रोजेक्ट में लगाने से पहले समय निकालकर दस्तावेजों की पुष्टि करें। बिल्डर या एजेंट भरोसेमंद हो सकता है, लेकिन अंतिम फैसला आधिकारिक रिकॉर्ड और स्वतंत्र कानूनी जांच के आधार पर ही लेना चाहिए। थोड़ी-सी सावधानी आपको बड़े आर्थिक नुकसान और लंबे कानूनी विवाद से बचाने में मदद कर सकती है।

✓ संपादकीय जाँच: प्रूफ़रीडिंग DP Singh · प्रकाशन की मंज़ूरी DP Singh · हमारे मानक

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