चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर जगन मोहन रेड्डी को अफसोस, बोले- 2023 के कानून का समर्थन करना गलती थी
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए निष्पक्ष व्यवस्था बनाने की मांग की है। उन्होंने 2023 के कानून का समर्थन करने पर अफसोस जताया और राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान गड़बड़ियों के आरोप भी लगाए।
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के प्रमुख वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया में बदलाव की मांग की है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति ऐसी व्यवस्था के तहत होनी चाहिए, जिसमें केंद्र या राज्य की सत्ताधारी सरकार का अनुचित प्रभाव न हो।
रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को ताडेपल्ली स्थित पार्टी कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जगन ने 2023 के उस कानून का समर्थन करने पर अफसोस जताया, जो मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया तय करता है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने संसद में इस कानून का समर्थन किया था, लेकिन अब उन्हें लगता है कि ऐसा करना गलती थी।
जगन ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की तुलना परीक्षा में परीक्षक की नियुक्ति से करते हुए कहा कि जिस तरह किसी छात्र को अपना परीक्षक चुनने का अधिकार नहीं होना चाहिए, उसी तरह चुनाव कराने वाली संस्था के प्रमुखों की नियुक्ति भी निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। उनके मुताबिक, नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल उठने से चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है।
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले वाईएसआरसीपी ने सत्ताधारी तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के नेतृत्व वाले गठबंधन पर विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने के आरोप लगाए हैं। सत्ताधारी गठबंधन पर लगाए गए इन आरोपों को स्वतंत्र रूप से साबित किया जाना बाकी है।
2023 के कानून पर जगन को क्यों हुआ अफसोस?
मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 में चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए समिति की संरचना तय की गई है।
इस कानून के तहत चयन समिति में प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं।
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट के मार्च 2023 के अंतरिम आदेश के तहत चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल थे। संसद से 2023 का कानून पारित होने के बाद मुख्य न्यायाधीश को वैधानिक चयन समिति में जगह नहीं दी गई।
जगन का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया में सत्ताधारी सरकार को अधिक प्रभाव मिलने से निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ सकते हैं। उन्होंने मांग की कि चयन प्रक्रिया में किसी तटस्थ व्यवस्था को शामिल किया जाए, ताकि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर सभी राजनीतिक दलों और जनता का भरोसा बना रहे।
यह जगन की राजनीतिक मांग और कानून को लेकर उनकी आलोचना है। कानून की वैधता और नियुक्ति व्यवस्था से जुड़े कानूनी सवालों का फैसला संबंधित संवैधानिक और न्यायिक प्रक्रियाओं के तहत होता है।
राज्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति भी निष्पक्ष तरीके से हो
जगन मोहन रेड्डी ने केवल केंद्र में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का मुद्दा नहीं उठाया। उन्होंने राज्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया में भी बदलाव की मांग की।
उन्होंने कहा कि राज्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति मुख्यमंत्री या सत्ताधारी सरकार के नियंत्रण में नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार, ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें चयन करने वाली संस्था राजनीतिक पक्षपात से दूर रहे।
राज्य चुनाव आयोग नगर निकायों और पंचायतों जैसे स्थानीय निकायों के चुनावों की जिम्मेदारी निभाता है। इसलिए उसकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता स्थानीय स्तर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है।
टीडीपी नेतृत्व वाले गठबंधन पर लगाए गंभीर आरोप
जगन ने आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया को लेकर सत्ताधारी टीडीपी नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने के लिए धमकियों, हमलों और पुलिस के कथित दुरुपयोग का सहारा लिया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि वाईएसआरसीपी के कुछ उम्मीदवारों के नामांकन पत्र छीन लिए गए या उन्हें जमा करने से रोका गया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमले, अपहरण, आगजनी और झूठे मुकदमे दर्ज कराने जैसे आरोप भी लगाए।
जगन ने कहा कि इन घटनाओं से उम्मीदवारों को स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने में परेशानी हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और सरकारी अधिकारी सत्ताधारी दल के पक्ष में काम कर रहे हैं।
पुलिवेंदुला, कडप्पा और तिरुपति में गड़बड़ी के आरोप
जगन ने पुलिवेंदुला, कडप्पा, पुंगनूर और तिरुपति सहित कई स्थानों पर वाईएसआरसीपी उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर परेशान किए जाने का आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि कुछ जगहों पर नामांकन पत्र स्वीकार नहीं किए गए, पार्टी समर्थकों के वाहनों पर हमले हुए और उम्मीदवारों को नामांकन केंद्रों तक पहुंचने में बाधाओं का सामना करना पड़ा।
पुलिवेंदुला के बारे में उन्होंने पुलिस पर पक्षपात करने और नामांकन दाखिल करने आए उम्मीदवारों को डराने के लिए पत्थर फेंकने तथा हवा में गोली चलाने का आरोप लगाया।
जगन ने कहा कि सत्ताधारी दल के समर्थकों को समूहों में इकट्ठा होने दिया गया, जबकि विपक्षी उम्मीदवारों और उनके समर्थकों को नामांकन केंद्रों में प्रवेश करने से रोका गया। उन्होंने दावा किया कि तिरुपति, कडप्पा, कमलापुरम, रायचोटी, पुंगनूर, दारसी, गुरजाला, दाचेपल्ली, पिदुगुराल्ला, बडवेल और राजमपेट जैसे क्षेत्रों में उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने में परेशानी हुई।
मतदाता सूची और चुनाव कार्यक्रम पर भी उठाए सवाल
जगन ने चुनाव कार्यक्रम जारी करने के समय और मतदाता सूची को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि आरक्षण का विवरण जारी होने के तुरंत बाद चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया गया, जिससे विपक्षी दलों को तैयारी के लिए कम समय मिला।
उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार, लगभग 46 लाख फर्जी मतदाताओं की पहचान होने के बावजूद सूची में जरूरी बदलाव किए बिना चुनाव कराने का फैसला किया गया।
आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों का कार्यक्रम
आंध्र प्रदेश राज्य चुनाव आयोग की ओर से घोषित कार्यक्रम के अनुसार, राज्य में अलग-अलग चरणों में स्थानीय निकाय चुनाव कराए जाने हैं।
शहरी स्थानीय निकाय: 28 अक्टूबर 2026 को मतदान और 30 अक्टूबर को मतगणना।
मंडल परिषद और जिला परिषद क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्र (MPTC और ZPTC): 3 नवंबर को मतदान और 5 नवंबर को मतगणना।
ग्राम पंचायत चुनाव: 26 नवंबर, 29 नवंबर और 2 दिसंबर को तीन चरणों में मतदान। प्रत्येक चरण के मतदान वाले दिन नतीजे घोषित किए जाने हैं।
इन चुनावों में नगर निगमों, नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों और ग्रामीण स्थानीय निकायों से जुड़े पदों के लिए मतदान होना है। चुनाव कार्यक्रम के संबंध में किसी भी बदलाव या अतिरिक्त निर्देश के लिए राज्य चुनाव आयोग की आधिकारिक अधिसूचना को अंतिम आधार माना जाना चाहिए।
जगन की मांग का क्या है महत्व?
जगन मोहन रेड्डी के बयान के दो प्रमुख पहलू हैं। पहला, उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए तटस्थ प्रक्रिया की मांग की और 2023 के कानून का समर्थन करने पर अफसोस जताया। दूसरा, उन्होंने आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान विपक्षी उम्मीदवारों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया।
चुनाव आयोग की स्वतंत्रता लोकतंत्र में महत्वपूर्ण है, क्योंकि चुनाव की निष्पक्षता केवल मतदान के दिन पर निर्भर नहीं करती। उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने का अवसर मिलना, मतदाता सूची का सही होना, प्रशासन का निष्पक्ष व्यवहार और शिकायतों पर उचित कार्रवाई भी जरूरी हैं।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव आयोग और संबंधित प्रशासन इन आरोपों पर क्या कदम उठाते हैं और स्थानीय निकाय चुनाव निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए क्या व्यवस्था की जाती है।
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