शुक्रवार, 6 नवम्बर 2026 हमारे बारे में संपर्क विज्ञापन दें न्यूज़रूम
सच की खोज
जनता की आवाज़
ज़मीनी हकीकत, जनता की आवाज़
ब्रेकिंग न्यूज़
बलिया: बजरंग पीजी कॉलेज के खेल मैदान में झाड़ियां और गंदगी, प्राचार्य ने बताई सफाई में देरी की वजह

जब ब्रिटिश सेना को मिल रही थीं लगातार हार, तब लंदन ने भेजा अपना सबसे भरोसेमंद सेनापति

दिसंबर 1899 में बोअर युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना को लगातार हार का सामना करना पड़ा, जिसे इतिहास में ‘ब्लैक वीक’ कहा जाता है। इन पराजयों के बाद ब्रिटेन ने अनुभवी सेनापति लॉर्ड रॉबर्ट्स को दक्षिण अफ्रीका भेजा।

जब ब्रिटिश सेना को मिल रही थीं लगातार हार, तब लंदन ने भेजा अपना सबसे भरोसेमंद सेनापति

10 जनवरी 1900 दक्षिण अफ्रीका में चल रहे दूसरे एंग्लो-बोअर युद्ध के इतिहास में एक महत्वपूर्ण तारीख थी। इसी दिन फील्ड मार्शल लॉर्ड फ्रेडरिक रॉबर्ट्स केप टाउन पहुंचे और दक्षिण अफ्रीका में ब्रिटिश सेना की सर्वोच्च कमान संभाली। उन्हें ब्रिटिश सेना की कमान ऐसे समय दी गई थी जब युद्ध के शुरुआती महीनों में ब्रिटेन को कई महत्वपूर्ण सैन्य झटके लग चुके थे।

लॉर्ड रॉबर्ट्स पहले से ही ब्रिटिश सैन्य इतिहास में एक प्रसिद्ध नाम थे। अफगानिस्तान में अपने सैन्य अभियान, विशेषकर कंधार तक पहुंचकर वहां मौजूद ब्रिटिश सेना को राहत दिलाने के कारण उन्हें काफी प्रतिष्ठा मिली थी। दक्षिण अफ्रीका में उनकी नियुक्ति से ब्रिटिश नेतृत्व को उम्मीद थी कि वे युद्ध की दिशा को बदलने में मदद करेंगे।

“ब्लैक वीक” के बाद बदली ब्रिटिश रणनीति

दूसरे बोअर युद्ध की शुरुआत अक्टूबर 1899 में हुई थी। शुरुआती महीनों में बोअर कमांडो ने ब्रिटिश सेना को कई मोर्चों पर चुनौती दी। दिसंबर 1899 में Stormberg, Magersfontein और Colenso में ब्रिटिश सेना को लगातार पराजय मिली। इन घटनाओं के कारण इस अवधि को “Black Week” कहा गया।

इन सैन्य असफलताओं के बाद लॉर्ड रॉबर्ट्स को ब्रिटिश सेना का नया सर्वोच्च कमांडर नियुक्त किया गया। हालांकि उनकी नियुक्ति दिसंबर 1899 में हो चुकी थी, लेकिन उन्होंने 10 जनवरी 1900 को केप टाउन पहुंचकर कमान संभाली। उनके साथ लॉर्ड किचनर भी दक्षिण अफ्रीका पहुंचे, जिन्होंने उनके चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

व्यक्तिगत त्रासदी के बीच संभाली कमान

लॉर्ड रॉबर्ट्स के लिए यह समय केवल सैन्य चुनौती का ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत दुख का भी था। दक्षिण अफ्रीका रवाना होने से पहले उन्हें अपने इकलौते बेटे की युद्ध में मृत्यु की खबर मिली थी। उनके बेटे की मौत Colenso की लड़ाई के दौरान हुई थी। इसके बावजूद रॉबर्ट्स ने दक्षिण अफ्रीका पहुंचकर ब्रिटिश सैन्य अभियान की जिम्मेदारी संभाली।

रॉबर्ट्स के आने के बाद बदला युद्ध का रुख

दक्षिण अफ्रीका पहुंचने के बाद रॉबर्ट्स ने ब्रिटिश सेना की रणनीति को पुनर्गठित किया। उन्होंने पश्चिमी मोर्चे पर आगे बढ़ने की योजना बनाई और Kimberley को राहत दिलाना महत्वपूर्ण लक्ष्य बनाया। इसके बाद ब्रिटिश सेना ने तेजी से अभियान आगे बढ़ाया। 15 फरवरी 1900 को Kimberley की घेराबंदी समाप्त हुई और फरवरी के अंत में Paardeberg में जनरल Piet Cronjé की बोअर सेना को आत्मसमर्पण करना पड़ा।

इसके बाद ब्रिटिश सेना ने Bloemfontein की ओर बढ़ना जारी रखा और 13 मार्च 1900 को ऑरेंज फ्री स्टेट की राजधानी पर कब्जा कर लिया। इस प्रकार 10 जनवरी को लॉर्ड रॉबर्ट्स के आगमन ने दूसरे बोअर युद्ध के उस चरण की शुरुआत की जिसमें ब्रिटिश सेना ने बड़े पैमाने पर आक्रामक अभियान चलाया।

स्रोत
  1. South African History Online — Lord Roberts arrives at the Cape
  2. South African History Online — The South African War 1899–1902
  3. anglo-Boer War Museum — Introduction to the War
✓ संपादकीय जाँच: प्रूफ़रीडिंग DP Singh · प्रकाशन की मंज़ूरी DP Singh · हमारे मानक

पाठकों की राय (0)

अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली राय आपकी हो सकती है।

संबंधित खबरें