बीरबल वर्मा का दावा है कि वह करीब 19 महीने से परिवार के साथ घर के बाहर रहने को मजबूर हैं
सिकंदरपुर के महथापार गांव में बीरबल वर्मा ने छोटे भाई पर मकान में हिस्सा नहीं देने और परिवार सहित घर में प्रवेश रोकने का आरोप लगाया है। तहसीलदार ने अभिलेखों की जांच के बाद कार्रवाई की बात कही है।
संपत्ति में हिस्सेदारी को लेकर महथापार गांव में दो भाइयों के बीच विवाद सामने आया है। गांव निवासी बीरबल वर्मा ने अपने छोटे भाई सकलदेव वर्मा और उनके परिवार पर मकान में हिस्सा नहीं देने तथा उन्हें परिवार सहित घर में प्रवेश करने से रोकने का आरोप लगाया है। बीरबल का कहना है कि वह पिछले करीब 19 महीने से अपने परिवार के साथ घर के बाहर रहने को मजबूर हैं। उन्होंने इस मामले में प्रशासन और पुलिस से कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक विवाद का समाधान नहीं हुआ है।
असम में मेहनत करके खरीदी थी जमीन
बीरबल वर्मा के अनुसार, करीब 40 वर्ष पहले वह रोजी-रोटी की तलाश में असम चले गए थे। वहां मेहनत-मजदूरी करके उन्होंने दो बीघा जमीन खरीदी थी। उनका कहना है कि उन्होंने अपने छोटे भाई सकलदेव वर्मा का नाम भी जमीन के दस्तावेजों में दर्ज कराया था।
बीरबल के मुताबिक, कुछ वर्षों बाद गांव लौटने पर उन्होंने रहने के लिए मकान के कमरे और चारदीवारी का निर्माण कराया। उनके पिता स्वर्गीय बाल किशुन वर्मा को नसबंदी कार्यक्रम के तहत कांग्रेस सरकार के समय जमीन मिलने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इस जमीन और बाद में खरीदी गई संपत्ति के स्वामित्व तथा हिस्सेदारी की स्थिति राजस्व अभिलेखों से स्पष्ट होनी बाकी है।
मकान में प्रवेश रोकने और मारपीट के आरोप
बीरबल वर्मा का आरोप है कि कुछ महीने पहले उनके छोटे भाई सकलदेव वर्मा ने असम स्थित अपने हिस्से की जमीन बेच दी। इसके बाद जब वह महथापार स्थित मकान में अपने हिस्से में रहने पहुंचे तो उन्हें घर में प्रवेश नहीं करने दिया गया।
उनका कहना है कि संपत्ति विवाद को लेकर गांव में कई बार पंचायत हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। उन्होंने सकलदेव वर्मा के बेटों पर उनके और परिवार के सदस्यों के साथ करीब आठ बार मारपीट करने का भी आरोप लगाया है। इन घटनाओं के संबंध में उन्होंने पुलिस थाने और तहसील में शिकायतें की हैं।
बीरबल ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी पक्ष को भाजपा के एक पूर्व विधायक और स्थानीय नेता का संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण उनकी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हो रही है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों का जवाब उपलब्ध नहीं है।
भाकपा माले नेता ने किया समर्थन का आह्वान
इस मामले को लेकर भाकपा माले के नेता राम चौधरी की ओर से अपील जारी की गई थी। इसमें छात्र-नौजवानों, मजदूरों, किसानों और न्यायप्रिय लोगों से 28 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे महथापार पहुंचने और बीरबल वर्मा को न्याय दिलाने की मांग के समर्थन में संघर्ष में शामिल होने का आह्वान किया गया था।
तहसीलदार ने अभिलेखों की जांच की बात कही
मौके पर पहुंचे तहसीलदार अमित कुमार सिंह ने बताया कि मामला दो भाइयों के बीच संपत्ति विवाद का है और प्रशासन के संज्ञान में है। उन्होंने कहा कि संबंधित अभिलेखों की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल विवाद में जमीन और मकान के वास्तविक स्वामित्व, दोनों भाइयों के हिस्से तथा लगाए गए आरोपों की पुष्टि राजस्व अभिलेखों और संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर होनी बाकी है।
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Ji mai ye kahna chahta hu ki jab makan pustaaini hai jamin sajhidari me hai to dono ko hissa milna chahiye