यूपी से एमपी शिफ्ट हुए हरदीप पुरी, बीजेपी ने नहीं लिया कोई रिस्क!
भाजपा ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री को मध्य प्रदेश की खाली राज्यसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। 12 नवंबर को मतदान होना है। पंजाब चुनाव और एपस्टीन विवाद के बीच इस फैसले के राजनीतिक मायने भी तलाशे जा रहे हैं।
एप्सटीन फाइल से चर्चा में रहने बाले केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप पुरी की एमपी में एंट्री से आगे की सियासत का रास्ता साफ हो गया। यूपी में दूसरी बार मौका न मिलने के बाद उनके इस्तीफे के कयास शुरू हो गए थे। मगर यूपी, पंजाब समेत अन्य राज्यों के चुनाव के मद्देनजर बीजेपी ने कोई रिस्क नहीं लिया और पुरी को एमपी शिफ्ट कर दिया। शनिवार को पुरी ने भोपाल में अपना नामांकन दाखिल कर दिया। इस तरह भाजपा ने उनके संसदीय भविष्य को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की है।
पुरी का उत्तर प्रदेश से राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होने वाला है। भाजपा ने यूपी की राज्यसभा सीटों के लिए घोषित आठ उम्मीदवारों में उनका नाम शामिल नहीं किया था। इसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। हालांकि, पार्टी ने मध्य प्रदेश की एक खाली सीट से उन्हें उम्मीदवार बनाकर नई राह दे दी। यह सीट केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थी।
पंजाब चुनाव से पहले भाजपा की रणनीति?
हरदीप सिंह पुरी को मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजने के फैसले को केवल एक संसदीय सीट का इंतजाम मानना पर्याप्त नहीं होगा। इसके पीछे भाजपा की व्यापक राजनीतिक रणनीति भी देखी जा रही है। पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए पुरी की केंद्रीय मंत्रिमंडल में मौजूदगी और सिख नेतृत्व को प्रतिनिधित्व देना पार्टी के लिए अहम माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, भाजपा पंजाब में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश में है। ऐसे में हरदीप पुरी को मंत्रिमंडल में बनाए रखना पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, इस फैसले के पीछे पार्टी की वास्तविक रणनीति क्या है, इस पर भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है।
एपस्टीन फाइल को लेकर भी विपक्ष के निशाने पर
हरदीप सिंह पुरी का नाम जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों के संदर्भ में भी राजनीतिक विवाद में आया है। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर सवाल उठाए हैं और स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं पुरी पहले ही विपक्ष के आरोपों को खारिज कर चुके हैं। ऐसे में मध्य प्रदेश से उनकी राज्यसभा उम्मीदवारी ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
12 नवंबर को होगा फैसला
मध्य प्रदेश की खाली राज्यसभा सीट के लिए 12 नवंबर को मतदान और मतगणना निर्धारित है। भाजपा के पास विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल होने के कारण पुरी की जीत की संभावना मजबूत मानी जा रही है। नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
बड़ा सियासी सवाल:
क्या भाजपा ने हरदीप पुरी को मध्य प्रदेश भेजकर सिर्फ उनका संसदीय भविष्य सुरक्षित किया है या पंजाब चुनाव से पहले सिख नेतृत्व और राजनीतिक समीकरणों को साधने की भी तैयारी की है? आने वाले दिनों में इसके संकेत मिल सकते हैं।
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