जहरीली शराब से मौतों से लेकर थाना प्रभारी की मौत तक, मध्य प्रदेश में शराब माफिया पर सियासी घमासान
सागर और देवास में संदिग्ध जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद देवास में तस्करी रोकने पहुंचे थाना प्रभारी दिलीप पुरी की मौत ने अवैध शराब के कारोबार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस ने सरकार को घेरा, जबकि मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस नेताओं पर आरोप लगाए।
मध्य प्रदेश में अवैध शराब का कारोबार अब केवल कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं, बल्कि प्रदेश की सियासत का बड़ा मुद्दा बन गया है। सागर के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि देवास में संदिग्ध जहरीली शराब से 13 लोगों की मौत और फिर तस्करी रोकने पहुंचे थाना प्रभारी दिलीप पुरी की ट्रक से कुचलकर हुई मौत ने सरकार से लेकर विपक्ष तक को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
सागर और देवास की घटनाओं को मिलाकर करीब 49 मौतों का आंकड़ा सामने आया है। इन घटनाओं ने अवैध शराब के कारोबार, उसकी आपूर्ति व्यवस्था, प्रशासनिक निगरानी और कथित राजनीतिक संरक्षण को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सागर में मौतों के बाद चला बुलडोजर, मुठभेड़ों में पकड़े गए आरोपी
सागर जिले के बंडा क्षेत्र में सितंबर में जहरीली शराब पीने से लोगों की मौतों का सिलसिला शुरू हुआ। शुरुआती दौर में प्रशासनिक आंकड़ों और स्थानीय स्तर पर सामने आए मृतकों की संख्या में अंतर रहा। बाद की रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 29 से अधिक और कुछ रिपोर्टों में 33 से ज्यादा बताई गई। इसी प्रकरण में मुख्य आरोपियों में शामिल रवि लखेरा को पुलिस ने सितंबर में बरायठा के जंगल में मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए फायरिंग की थी और जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी।
इसके बाद अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भी पुलिस ने अभियान चलाया। आरोपियों के ठिकानों पर बुलडोजर कार्रवाई की गई और अवैध शराब बनाने तथा पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की गई। मामले में पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद विपक्ष ने सवाल उठाया कि इतने बड़े स्तर पर अवैध कारोबार आखिर लंबे समय तक कैसे चलता रहा।
कांग्रेस ने खुरई क्षेत्र के शराब कारोबारियों और भाजपा से जुड़े लोगों के कथित संबंधों तथा राजनीतिक संरक्षण को लेकर भी आरोप लगाए। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और किसी जनप्रतिनिधि की संलिप्तता का अंतिम निष्कर्ष जांच से ही सामने आएगा।
देवास में 13 मौतों के बाद तस्करों के हौसले का खौफनाक चेहरा
सागर के बाद देवास जिले के चंदाना और बिंजाना गांवों में संदिग्ध जहरीली शराब पीने के बाद 13 लोगों की मौत का मामला सामने आया। मृतकों के परिजनों ने शराब पीने के बाद तबीयत बिगड़ने और मौत होने की बात कही। मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ा तो कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी समेत विपक्षी नेताओं ने सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए।
सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक कार्रवाई भी की। देवास के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को हटाया गया, जबकि आबकारी विभाग के अधिकारियों को निलंबित किया गया। अवैध शराब की आपूर्ति और बिक्री से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी का अभियान भी शुरू हुआ।
तस्करी रोकने पहुंचे थाना प्रभारी को ट्रक से कुचला
देवास के खातेगांव में अवैध शराब तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के दौरान रविवार देर रात एक ऐसी घटना हुई जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। शराब से भरे वाहन को रोकने पहुंचे खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी को चालक ने ट्रक से कुचल दिया। गंभीर रूप से घायल थाना प्रभारी की उपचार के दौरान मौत हो गई।
पुलिस ने वाहन से 1800 लीटर से अधिक शराब बरामद की। इस मामले में पुलिस ने शराब तस्करी के नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। जांच में हरदा जिले के टिमरनी से जुड़े राहुल जायसवाल और उनके भाई मनीष जायसवाल का नाम सामने आया। पुलिस के मुताबिक राहुल जायसवाल का कांग्रेस से जुड़ाव और शराब दुकान में हिस्सेदारी भी जांच का हिस्सा है। बाद की रिपोर्टों में राहुल जायसवाल समेत तीन लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई।
दिल्ली रैली के खर्च को लेकर मंत्री सारंग का बड़ा आरोप,
देवास की घटना के बाद प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया। मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने आरोप लगाया कि अवैध शराब के कारोबार से होने वाली कमाई का इस्तेमाल कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय के खर्च, बिजली बिल और धरना-प्रदर्शनों में किया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि एक नवंबर को दिल्ली में कांग्रेस की महारैली में शामिल होने गए नेताओं और कार्यकर्ताओं के खर्च का इंतजाम भी शराब माफिया ने किया था।
सारंग ने राहुल जायसवाल4 और उनके भाई मनीष जायसवाल का नाम लेते हुए उनके शराब कारोबार से जुड़े होने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। दूसरी ओर कांग्रेस ने सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में माफिया बेखौफ हैं और सरकार उन्हें रोकने में नाकाम साबित हो रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल: शराब माफिया का नेटवर्क इतना मजबूत कैसे हुआ?
सागर में जहरीली शराब से मौतें, देवास में 13 लोगों की जान जाना, आरोपियों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई, पुलिस मुठभेड़ और अब ड्यूटी पर तैनात थाना प्रभारी की मौत—ये घटनाएं बताती हैं कि अवैध शराब का कारोबार केवल कुछ ठिकानों तक सीमित नहीं है। इसके पीछे निर्माण, पैकिंग, परिवहन, बिक्री और वितरण का संगठित नेटवर्क होने की आशंका है।
मोहन यादव सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती केवल आरोपियों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचना है। साथ ही यह भी पता लगाना होगा कि जिन इलाकों में लंबे समय से अवैध शराब का कारोबार चल रहा था, वहां जिम्मेदार विभागों की निगरानी आखिर क्यों नाकाम रही।
सियासत में आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह हैं, लेकिन जहरीली शराब से जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों और कर्तव्य निभाते हुए जान गंवाने वाले थाना प्रभारी के परिजनों को न्याय मिलना सबसे जरूरी है। प्रदेश की जनता अब बुलडोजर और गिरफ्तारियों से आगे बढ़कर उस कार्रवाई का इंतजार कर रही है, जो शराब माफिया के पूरे नेटवर्क को खत्म कर सके।
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