हस्तिनापुर में गन्ना मूल्य बढ़ाने की मांग को लेकर पानी की टंकी पर चढ़े तीन किसान
मेरठ के हस्तिनापुर क्षेत्र के अलीपुर मोरना गांव में किसानों ने 700 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य घोषित करने और बकाया भुगतान ब्याज सहित कराने की मांग उठाई। देर शाम तक प्रशासन और किसानों के बीच सहमति नहीं बन सकी।
गन्ने का उचित मूल्य घोषित करने और बकाया भुगतान की मांग को लेकर बुधवार को हस्तिनापुर थाना क्षेत्र के अलीपुर मोरना गांव में तीन किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। किसान शौकीन, बालू और आजाद गांव की पुरानी पानी की टंकी पर चढ़ गए। उन्होंने सरकार से 700 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य घोषित करने और चीनी मिलों का पेराई सत्र शुरू होने से पहले ही गन्ने का भाव तय करने की मांग की। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। देर शाम तक किसानों का प्रदर्शन जारी रहा।
किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। खाद, बीज, डीजल और मजदूरी पर पहले के मुकाबले अधिक खर्च करना पड़ रहा है, लेकिन गन्ने का उचित मूल्य तय करने में देरी हो रही है। उनका कहना है कि चीनी मिलों का पेराई सत्र शुरू होने से पहले ही सरकार को गन्ने का भाव घोषित कर देना चाहिए, ताकि किसान अपनी फसल और आगामी खेती की योजना बना सकें।
बकाया भुगतान ब्याज सहित कराने की मांग
किसानों ने गन्ना मूल्य बढ़ाने के साथ चीनी मिलों पर बकाया भुगतान का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि गन्ने की फसल तैयार करने में किसान पूरे साल मेहनत और पूंजी लगाता है, लेकिन मिलों से भुगतान समय पर नहीं मिलने के कारण आर्थिक परेशानियां बढ़ जाती हैं। किसानों ने बकाया गन्ना भुगतान ब्याज सहित कराने की मांग की।
टंकी के नीचे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी करते रहे बातचीत
तीनों किसानों के पानी की टंकी पर चढ़ने की सूचना पर थाना प्रभारी दुष्यंत शर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों से बातचीत कर उन्हें सुरक्षित नीचे उतरने के लिए समझाने का प्रयास किया। इसके बाद नायब तहसीलदार भी मौके पर पहुंचे और किसानों से वार्ता की।
हालांकि, किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी समस्याओं के समाधान को लेकर ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक वे टंकी से नीचे नहीं उतरेंगे।
जिलाधिकारी को मौके पर बुलाने की मांग
प्रदर्शन के दौरान किसान लगातार जिलाधिकारी को मौके पर बुलाने की मांग करते रहे। उनका कहना था कि गन्ना मूल्य और बकाया भुगतान का मामला किसानों की आर्थिक स्थिति से जुड़ा है। इसलिए जिले के वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनें और समाधान का भरोसा दें।
देर शाम तक पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी किसानों से बातचीत कर उन्हें नीचे उतारने का प्रयास करते रहे, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। फिलहाल तीनों किसान टंकी पर डटे हुए थे।
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