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परशदेपुर के माता मिरिन धाम का विकास कार्य अधूरा, श्रद्धालुओं में नाराजगी

वंदन योजना के तहत करीब 1.70 करोड़ रुपये की परियोजना मार्च 2026 तक पूरी होनी थी। समयसीमा बीतने के बाद भी निर्माण कार्य अधूरा है। नगर पंचायत प्रशासन ने ठेकेदार को दो बार नोटिस जारी किया है।

परशदेपुर के माता मिरिन धाम का विकास कार्य अधूरा, श्रद्धालुओं में नाराजगी

नगर पंचायत परशदेपुर स्थित माता मिरिन धाम क्षेत्रीय लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर परिसर के विकास के लिए वंदन योजना के अंतर्गत करीब 1 करोड़ 70 लाख रुपये की परियोजना स्वीकृत की गई थी। इसके तहत बारादरी, पुजारी भवन, बाउंड्रीवाल और सौंदर्याकरण सहित अन्य विकास कार्य कराए जाने थे। हालांकि, निर्धारित समयसीमा मार्च 2026 बीतने के बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। इससे मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में नाराजगी है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परियोजना के लिए अप्रैल 2024 में पहली किश्त के रूप में करीब 89 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ। परियोजना को मार्च 2026 तक पूरा किया जाना था, लेकिन तय समयसीमा बीतने के बावजूद काम अधूरा है।

मंदिर संस्थान के अध्यक्ष संजय पाण्डेय ने निर्माण कार्य को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि वंदन योजना के तहत काम शुरू होने के बाद से ठेकेदार या किसी विभागीय अधिकारी ने मंदिर संस्थान से न तो कोई सलाह-मशविरा किया और न ही निर्माण की प्रगति से संबंधित जानकारी साझा की।

संजय पाण्डेय ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही निर्माणाधीन परिसर में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। उनके अनुसार, इससे मंदिर परिसर की धार्मिक गरिमा और पवित्रता प्रभावित हुई।

वहीं, नगर पंचायत परशदेपुर की अधिशासी अधिकारी निमिषा भारद्वाज ने बताया कि वंदन योजना के तहत निर्माण कार्य करा रहे ठेकेदार महेश सोनी को दो बार नोटिस जारी किया जा चुका है। प्रशासन की ओर से निर्माण कार्य जल्द से जल्द पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है।

निर्माणाधीन परिसर में कार्यक्रम आयोजित किए जाने के संबंध में पूछे जाने पर अधिशासी अधिकारी ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।

दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल नोटिस जारी करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। निर्माण कार्य में देरी के लिए जिम्मेदारी तय करते हुए आवश्यक विधिक कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि परियोजना जल्द पूरी हो और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

अब सवाल यह है कि करीब 1.70 करोड़ रुपये की इस विकास परियोजना को पूरा कराने के लिए संबंधित विभाग और नगर पंचायत प्रशासन कब प्रभावी कदम उठाएंगे।

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