गंगा में गिरने वाले नालों की होगी हर महीने जांच, प्रदूषण मिलने पर जिम्मेदार विभागों पर कार्रवाई के निर्देश
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के निदेशक रावल हमेंद्र कुमार ने रायबरेली के डलमऊ और ऊंचाहार क्षेत्र में गंगा में गिरने वाले नालों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने जल की गुणवत्ता की मासिक जांच और जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए।
गंगा नदी को प्रदूषणमुक्त और स्वच्छ बनाए रखने के प्रयासों के तहत राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG), जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के निदेशक रावल हमेंद्र कुमार (आईएएस) ने रायबरेली के डलमऊ और ऊंचाहार क्षेत्र में गंगा नदी में गिरने वाले नालों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने नालों से नदी में पहुंचने वाले दूषित जल और उसके उपचार की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
निरीक्षण से पहले संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसमें गंगा में गिरने वाले नालों की मौजूदा स्थिति, जल शोधन व्यवस्था और नदी में प्रदूषण रोकने के उपायों पर चर्चा हुई।
डलमऊ और ऊंचाहार के नालों का किया निरीक्षण
निदेशक रावल हमेंद्र कुमार ने प्रभागीय निदेशक प्रखर मिश्र की उपस्थिति में कल्यानी, खरौली और एनटीपीसी परिसर से निकलने वाले नालों सहित डलमऊ एवं ऊंचाहार क्षेत्र में गंगा नदी में गिरने वाले नालों की स्थिति का निरीक्षण किया।
उन्होंने मौके पर नालों से निकलने वाले पानी और उसके शोधन से संबंधित व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। इस दौरान अधिकारियों से जल के प्रबंधन, उपचार और प्रदूषण के संभावित स्रोतों के बारे में जानकारी ली।
हर महीने होगी नालों के पानी की गुणवत्ता की जांच
निरीक्षण के बाद निदेशक ने निर्देश दिया कि गंगा नदी में सीधे प्रवाहित होने वाले सभी नालों और नालियों के पानी की गुणवत्ता की उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के माध्यम से हर महीने अनिवार्य रूप से जांच कराई जाए।
उन्होंने कहा कि जांच में यदि किसी नाले के पानी में निर्धारित मानकों से अधिक प्रदूषण या अनुपचारित जल का प्रवाह पाया जाता है, तो संबंधित विभागीय अधिकारियों और जिम्मेदार कार्यदायी संस्थाओं की जवाबदेही तय की जाए। ऐसे मामलों में नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
प्रदूषण के स्रोतों की पहचान कर उपचार के निर्देश
निदेशक ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रदूषण के स्रोतों की तत्काल पहचान की जाए और नालों के पानी को निर्धारित मानकों के अनुरूप उपचारित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि प्रत्येक महीने की जांच रिपोर्ट जिला गंगा समिति के समक्ष प्रस्तुत की जाए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या निर्देशों की अवहेलना सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
समीक्षा बैठक में कई विभागों के अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में प्रभागीय निदेशक प्रखर मिश्र, एनटीपीसी की महाप्रबंधक प्रीति सिन्हा, जिला परियोजना अधिकारी संजय कुमार, क्षेत्रीय वन अधिकारी रवि शंकर, जल निगम (ग्रामीण), लखनऊ के अधिशासी अभियंता, नगर पंचायत डलमऊ के अधिशासी अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कर्मचारी और सामाजिक कार्यकर्ता जितेन्द्र द्विवेदी उपस्थित रहे।
गंगा की स्वच्छता के लिए व्यवस्थाओं का आकलन
निरीक्षण का उद्देश्य गंगा नदी में गिरने वाले दूषित जल के प्रबंधन और नालों के पानी के समुचित शोधन की मौजूदा व्यवस्था का आकलन करना था। अधिकारियों को दिए गए निर्देशों के अनुसार अब नालों के पानी की नियमित जांच और उसकी रिपोर्टिंग के जरिए प्रदूषण नियंत्रण की निगरानी की जाएगी।
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