फॉर्म-6 से SIR का घोषणा पत्र हटाने पर बोले शशि थरूर, चुनाव आयोग की कार्यशैली पर सवाल
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने फॉर्म-6 से SIR का घोषणा पत्र अलग करने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के कुछ फैसलों से आम मतदाताओं को परेशानी हुई।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने चुनाव आयोग द्वारा फॉर्म-6 से SIR से जुड़ा घोषणा पत्र अलग करने के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि फॉर्म-6 में अलग से घोषणा जोड़ने के कारण लोगों को परेशानी हो सकती थी। थरूर ने इस मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग के कामकाज पर भी सवाल उठाए।
तिरुवनंतपुरम में मीडिया से बातचीत करते हुए थरूर ने कहा कि जब कोई व्यक्ति पहली बार मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरता है, तो उसमें SIR से जुड़ी एक अतिरिक्त घोषणा भी जोड़ दी गई थी। उनका आरोप है कि इस तरह का बदलाव चुनाव से जुड़े नियमों और कानूनों के अनुसार नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के दो अन्य सदस्यों ने भी इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी।
फॉर्म-7 के इस्तेमाल पर भी उठाए सवाल
शशि थरूर ने फॉर्म-7 को लेकर भी चिंता जताई। फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी नाम को हटाने पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है।
थरूर का आरोप है कि पश्चिम बंगाल सहित कुछ राज्यों में हजारों लोगों के नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में फॉर्म-7 एक साथ भरे गए। उन्होंने कहा कि केवल शक के आधार पर कई लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ा। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित राज्यों और चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़े जरूरी हैं।
विपक्ष क्या मांग कर रहा था?
थरूर ने कहा कि विपक्ष लंबे समय से SIR की प्रक्रिया में हो रही गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठा रहा है। विपक्ष की मांग थी कि केवल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा ही नहीं होना चाहिए, बल्कि SIR के दौरान जिन लोगों के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं, उनके नाम दोबारा जोड़े जाने चाहिए और गलत फैसलों को वापस लिया जाना चाहिए।
उन्होंने अपने बयान में मतदाता सूची से 11.3 करोड़ नाम हटाए जाने की बात भी कही। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह आंकड़ा किन राज्यों या किस अवधि से जुड़ा है। इसलिए इस संख्या को चुनाव आयोग का आधिकारिक आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
फॉर्म-6 पर चुनाव आयोग ने क्या कहा?
इस मामले में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि फॉर्म-6 में कानून के तहत कोई बदलाव नहीं किया गया था। आयोग के अनुसार, SIR से जुड़ा घोषणा पत्र एक अलग दस्तावेज था, जिसे ऑनलाइन आवेदन करते समय फॉर्म-6 के साथ दिखाया जा रहा था।
आयोग ने बताया था कि 21 अक्टूबर को दोनों दस्तावेजों को अलग-अलग जमा कराने का फैसला लिया गया। इसके बाद 4 और 5 नवंबर को ECINET पोर्टल पर यह बदलाव लागू किया गया। अब नए मतदाता के रूप में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 और SIR का घोषणा पत्र अलग-अलग जमा करना होता है।
सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है मामला
फॉर्म-6 में किए गए बदलाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सवाल उठे थे। 12 अक्टूबर को अदालत ने स्पष्ट किया था कि उसने इस नए प्रारूप को न तो मंजूरी दी थी और न ही इसे खारिज किया था।
SIR से जुड़े दूसरे मामलों पर भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। इस मामले में अगली सुनवाई 17 नवंबर को निर्धारित की गई है।
गलती बताएँ
संबंधित खबरें
बलिया: बजरंग पीजी कॉलेज के खेल मैदान में झाड़ियां और गंदगी, प्राचार्य ने बताई सफाई में देरी की वजह
यूपी में ग्राम प्रधानों का प्रशासक कार्यकाल बढ़ाने की तैयारी, शासन को भेजा गया प्रस्ताव
बलिया में मंदिर चोरी के आरोप में पांच गिरफ्तार, पुलिस मुठभेड़ में दो घायल
पाठकों की राय (0)
अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली राय आपकी हो सकती है।