दिलजीत दोसांझ ने आलोचकों को दिया जवाब, बोले- पंजाबियों को लड़ना सिखाने की जरूरत नहीं
दिल्ली में अपने इंडिया टूर के पहले शो के दौरान दिलजीत ने छात्र आंदोलन पर चुप्पी को लेकर उठे सवालों का जवाब दिया। इसके बाद CJP नेता अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर खुला पत्र लिखकर माफी मांगी।
पंजाबी गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने दिल्ली में अपने इंडिया टूर के पहले कार्यक्रम के दौरान आलोचकों को जवाब दिया। करीब 70 हजार से अधिक दर्शकों की मौजूदगी में उन्होंने कहा कि वह एक कलाकार हैं और लोगों से प्यार करते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी चुप्पी को समर्थन की कमी नहीं समझा जाना चाहिए।
दिलजीत ने दर्शकों से कहा, "मैं आप सभी से प्यार करता हूं क्योंकि मैं एक कलाकार हूं, भाई। मैं चुप हूं, तो मुझे चुप ही रहने दो। मैं आप सभी का समर्थन करता हूं। लेकिन पंजाबियों को यह मत सिखाओ कि लड़ते कैसे हैं।"
उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब छात्र आंदोलन को लेकर उनकी भूमिका और सार्वजनिक चुप्पी पर सवाल उठाए जा रहे थे।
CJP ने दिलजीत पर क्या आरोप लगाए थे?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनों के दौरान संगठन की ओर से दिलजीत पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने राजनीतिक मुद्दों से दूरी बनाए रखी और छात्र आंदोलन का सार्वजनिक रूप से समर्थन नहीं किया।
इसको लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा हुई। आलोचकों की ओर से यह सवाल उठाया गया कि सार्वजनिक प्रभाव रखने वाले कलाकारों को सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बात रखनी चाहिए या नहीं।
दिलजीत ने क्या संदेश दिया?
दिल्ली के कार्यक्रम में दिलजीत ने अपने बयान के जरिए यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि उनकी चुप्पी को गलत तरीके से नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह लोगों का समर्थन करते हैं, लेकिन एक कलाकार के तौर पर उन्हें अपनी बात रखने और चुप रहने का भी अधिकार है।
पंजाबियों को लड़ना सिखाने वाली उनकी टिप्पणी को उनके आलोचकों के लिए जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। इस बयान में उन्होंने पंजाबियों के संघर्ष और उनकी पहचान का भी उल्लेख किया।
CJP नेता अभिजीत दीपके ने लिखी खुली चिट्ठी
दिलजीत के बयान के बाद CJP नेता अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर एक खुला पत्र साझा किया। उन्होंने अपनी बात रखते हुए माफी मांगी।
इस घटनाक्रम ने कलाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी, राजनीतिक मुद्दों पर उनकी अभिव्यक्ति और किसी आंदोलन के समर्थन को लेकर एक बार फिर बहस शुरू कर दी है।
यह मामला एक बड़े सवाल को भी सामने लाता है—क्या किसी कलाकार से यह अपेक्षा की जानी चाहिए कि वह हर राजनीतिक या सामाजिक मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखे? या उसे यह तय करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए कि वह कब और किस विषय पर बोले?
फिलहाल, दिलजीत के बयान और CJP नेता की प्रतिक्रिया ने इस बहस को नया मोड़ दे दिया है।
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