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दशहरा 2026: राष्ट्रपति मुर्मू ने किया रावण दहन, PM मोदी बोले- जनकल्याण ही रामराज्य का आदर्श

विजयादशमी पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के दशहरा समारोहों में शामिल हुए। राष्ट्रपति ने समानता और समावेशिता पर जोर दिया, जबकि पीएम मोदी ने जनकल्याण को रामराज्य का आदर्श बताया।

दशहरा 2026: राष्ट्रपति मुर्मू ने किया रावण दहन, PM मोदी बोले- जनकल्याण ही रामराज्य का आदर्श

देशभर में विजयादशमी का पर्व मनाया जा रहा है। दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अलग-अलग दशहरा समारोहों में शामिल हुए। राष्ट्रपति ने द्वारका सेक्टर-10 में रावण के पुतले पर प्रतीकात्मक तीर चलाया, जबकि प्रधानमंत्री पूर्वी दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे।

दोनों नेताओं ने भगवान राम के आदर्शों, सामाजिक समानता और जनकल्याण का संदेश दिया।

राष्ट्रपति मुर्मू ने समानता और समावेशिता पर दिया जोर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारका सेक्टर-10 स्थित श्री रामलीला कमेटी के मैदान में आयोजित दशहरा समारोह में शामिल हुईं। उन्होंने रावण के पुतले पर प्रतीकात्मक तीर चलाकर रावण दहन किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि रामलीलाओं के जरिए लोग भगवान राम के आदर्शों को याद करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें यह देखकर खुशी होती है कि आज का भारत रामकथा में बताए गए समानता और समावेशिता के आदर्शों के अनुरूप आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने प्रकृति की रक्षा का भी संदेश दिया और कहा कि नदियों, झीलों, जंगलों और वन्यजीवों का संरक्षण भारतीय परंपरा के साथ-साथ संविधान में बताए गए नागरिकों के कर्तव्यों का भी हिस्सा है।

पीएम मोदी बोले- भारत का कोना-कोना राममय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्वी दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन में दशहरा समारोह में शामिल हुए। उन्होंने देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं और कहा कि रामलीलाएं भगवान राम के आदर्शों को जीवंत रखती हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि विजयादशमी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि अत्याचार के अंत और सत्य की जीत में विश्वास का प्रतीक है।

रामराज्य का मतलब क्या है?

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में रामराज्य की व्याख्या करते हुए कहा कि ऐसा शासन होना चाहिए, जहां किसी के साथ भेदभाव न हो, सभी को न्याय मिले और हर व्यक्ति को आगे बढ़ने का समान अवसर मिले।

उन्होंने कहा, सत्ता का उद्देश्य केवल शासन करना नहीं, बल्कि जनकल्याण होना चाहिए। पीएम मोदी ने गरीबों और वंचितों की सेवा को सर्वोपरि रखने की बात भी कही।

पीएम मोदी ने आत्मनिर्भरता और मेहनत का दिया संदेश

प्रधानमंत्री ने कहा कि मुश्किलें कितनी भी बड़ी हों, लोगों को दूसरों के भरोसे नहीं बैठना चाहिए। अपनी क्षमता, संसाधनों और मेहनत पर विश्वास करके समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए।

उन्होंने भगवान राम के समुद्र पार कर लंका पहुंचने के प्रसंग का उदाहरण देते हुए कहा कि सामूहिक प्रयास और जनभागीदारी से कठिन लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।

भारत की धरोहरों की वापसी का किया जिक्र

पीएम मोदी ने कहा कि सदियों तक भारत की सांस्कृतिक धरोहरों को देश से बाहर ले जाया गया। अब उन्हें वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने अपने संबोधन में दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में 650 से अधिक प्राचीन मूर्तियां भारत वापस लाई गई हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि अपनी सांस्कृतिक विरासत को पहचान दिलाना और उसकी रक्षा करना भी देश के लिए महत्वपूर्ण है।

क्या है विजयादशमी का संदेश?

विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक माना जाता है। दिल्ली के समारोहों में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने इसी परंपरा को सामाजिक समानता, न्याय, सेवा और जनकल्याण से जोड़कर अपनी बात रखी।

✓ संपादकीय जाँच: प्रूफ़रीडिंग DP Singh · प्रकाशन की मंज़ूरी DP Singh · हमारे मानक

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