ग्रेटर नोएडा PNB धोखाधड़ी मामला: 10.24 करोड़ रुपये के कथित गबन में CBI ने बैंक कर्मचारी समेत दो को किया गिरफ्तार
पंजाब नेशनल बैंक की ग्रेटर नोएडा स्थित Pi शाखा में ग्राहकों के खातों से 10.24 करोड़ रुपये के कथित अनधिकृत लेनदेन के मामले में CBI ने एक बैंक कर्मचारी और एक निजी व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की ग्रेटर नोएडा स्थित Pi शाखा में सामने आए 10.24 करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में एक बैंक कर्मचारी और एक निजी व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। दोनों की गिरफ्तारी 3 नवंबर 2026 को की गई।
CBI की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार बैंक कर्मचारी PNB की Pi शाखा में ऑफिस असिस्टेंट/सब-स्टाफ के पद पर कार्यरत था। आरोप है कि उसने एक निजी व्यक्ति और अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलीभगत कर विभिन्न ग्राहकों के खातों से अनधिकृत डेबिट लेनदेन किए और करीब 10.24 करोड़ रुपये की रकम का कथित तौर पर गबन किया।
CBI ने इस मामले में 29 अक्टूबर 2026 को बैंक की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की थी। एजेंसी अब कथित लेनदेन, इसमें शामिल लोगों और रकम के हस्तांतरण से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।
बैंक की शिकायत के बाद दर्ज हुआ मामला
CBI के मुताबिक, पंजाब नेशनल बैंक की शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ग्रेटर नोएडा की Pi शाखा में विभिन्न ग्राहक खातों से बिना अनुमति रकम डेबिट की गई। शुरुआती शिकायत में इस तरह के लेनदेन के जरिए कुल 10.24 करोड़ रुपये निकाले जाने की बात कही गई थी।
मामले की जांच CBI की गाजियाबाद स्थित भ्रष्टाचार निरोधक शाखा कर रही है। एजेंसी ने बैंक कर्मचारी, एक निजी व्यक्ति और अन्य अज्ञात लोगों के बीच कथित मिलीभगत की जांच शुरू की।
बैंकिंग लॉगिन और खातों के इस्तेमाल की जांच
मीडिया रिपोर्टों में बैंक की प्रारंभिक आंतरिक जांच के हवाले से बताया गया है कि कथित अनियमितताएं लगभग तीन वर्षों तक जारी रहीं। आरोप है कि बैंक कर्मचारी ने शाखा के अन्य अधिकारियों की बैंकिंग यूजर आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग कर ग्राहक खातों से अनधिकृत लेनदेन किए।
रिपोर्टों के अनुसार, जांच में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) खातों में बदलाव, खातों से रकम के हस्तांतरण और कुछ ग्राहकों के मोबाइल ट्रांजैक्शन अलर्ट बंद किए जाने जैसे पहलुओं की भी पड़ताल की गई है।
हालांकि, इन विवरणों को बैंक की आंतरिक जांच और मीडिया रिपोर्टों में सामने आए आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। CBI की जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही इनकी पुष्टि हो सकेगी।
ग्राहक की शिकायत से सामने आया मामला
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सितंबर 2026 में एक ग्राहक ने अपनी पासबुक अपडेट कराने के दौरान खाते में कुछ ऐसे डेबिट लेनदेन देखे, जिनकी अनुमति उसने नहीं दी थी। इसके बाद मामला बैंक प्रबंधन के संज्ञान में आया और खातों तथा लेनदेन के रिकॉर्ड की जांच शुरू हुई।
बैंक की शुरुआती जांच में विभिन्न ग्राहक खातों से 10.24 करोड़ रुपये के कथित अनधिकृत लेनदेन की पहचान की गई। कुछ ग्राहकों ने इससे अधिक रकम प्रभावित होने की आशंका भी जताई थी, लेकिन CBI में दर्ज मामले का आधार फिलहाल 10.24 करोड़ रुपये की कथित अनधिकृत निकासी है।
पुणे से गिरफ्तार निजी आरोपी का ट्रांजिट रिमांड
CBI की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, निजी व्यक्ति के संबंध में पुणे, महाराष्ट्र स्थित CBI मामलों की विशेष अदालत से ट्रांजिट रिमांड प्राप्त किया गया है।
ट्रांजिट रिमांड के जरिए किसी आरोपी को उस स्थान से जांच या आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए दूसरे क्षेत्र में ले जाने की अनुमति मिलती है। इस मामले में CBI ने पुणे की अदालत से संबंधित अनुमति प्राप्त की है।
मीडिया रिपोर्टों में निजी आरोपी की पहचान आशुतोष कुमार पाठक और बैंक कर्मचारी की पहचान दीपांशी के रूप में बताई गई है। हालांकि, CBI की उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति में दोनों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए थे।
आगे की जांच में किन पहलुओं पर रहेगा ध्यान?
CBI की जांच में अब कथित अनधिकृत लेनदेन का पूरा रिकॉर्ड, ग्राहक खातों से निकाली गई रकम का अंतिम गंतव्य, बैंकिंग लॉगिन क्रेडेंशियल के इस्तेमाल और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका अहम होगी।
एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि कथित तौर पर निकाली गई रकम किन खातों में भेजी गई और क्या इस मामले में अन्य बैंक कर्मचारियों या निजी व्यक्तियों की भी भूमिका थी।
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