NVS-03 की सफल लॉन्चिंग के बाद ISRO प्रमुख बोले- देश में फिर बहाल होंगी नेविगेशन सेवाएं
GSLV-F18 ने NVS-03 नेविगेशन सैटेलाइट को निर्धारित कक्षा में स्थापित किया। ISRO प्रमुख वी. नारायणन के मुताबिक, यह उपग्रह देश की पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग सेवाओं को बहाल करने में मदद करेगा।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए NVS-03 नेविगेशन सैटेलाइट की सफल लॉन्चिंग एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। श्रीहरिकोटा से GSLV-F18 रॉकेट के जरिए भेजे गए इस उपग्रह को निर्धारित कक्षा में स्थापित किया गया। ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने बताया कि रॉकेट ने उपग्रह को अपेक्षित कक्षा में सटीकता के साथ पहुंचाया है।
लॉन्च के बाद मीडिया से बातचीत में नारायणन ने कहा कि GSLV-F18 ने NVS-03 को निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया। उन्होंने कक्षा से जुड़े आंकड़े साझा करते हुए बताया कि उपग्रह का पेरीजी यानी पृथ्वी के सबसे नजदीक का बिंदु 170.36 किलोमीटर निर्धारित था, जबकि वास्तविक आंकड़ा 170.31 किलोमीटर रहा। इसी तरह, एपोजी यानी पृथ्वी से सबसे दूर का बिंदु 37,247 किलोमीटर निर्धारित था, जबकि हासिल आंकड़ा 38,080 किलोमीटर रहा।
नारायणन ने इस प्रदर्शन को रॉकेट की उच्च सटीकता का उदाहरण बताया। हालांकि, कक्षा से जुड़े इन आंकड़ों और उनकी व्याख्या को ISRO के आधिकारिक मिशन विवरण से मिलाकर देखना जरूरी है।
GSLV की 20वीं उड़ान
ISRO प्रमुख के अनुसार, यह GSLV रॉकेट की 20वीं उड़ान थी। अब तक इस प्रक्षेपण यान ने कुल 34 टन अंतरिक्ष यानों को कक्षा में पहुंचाया है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछली GSLV-F17 उड़ान के केवल 56 दिन बाद GSLV-F18 का प्रक्षेपण किया गया। उनके मुताबिक, GSLV के दो प्रक्षेपणों के बीच यह अब तक का सबसे कम अंतराल है।
NavIC प्रणाली के लिए चौथा उपग्रह
NVS-03 भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली NavIC का हिस्सा है। इस प्रणाली का उद्देश्य देश और उसके आसपास के क्षेत्र में पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराना है।
नारायणन ने बताया कि इस प्रक्षेपण से पहले कक्षा में तीन नेविगेशन सैटेलाइट मौजूद थे और NVS-03 के जुड़ने से इनकी संख्या चार हो गई है। उन्होंने कहा कि इन सेवाओं के लिए कम से कम चार उपग्रहों की जरूरत होती है और इस मिशन से देश में पोजिशनिंग, नेविगेशन तथा टाइमिंग सेवाओं को फिर से बहाल करने का रास्ता तैयार होगा।
NavIC का उपयोग परिवहन, समुद्री और हवाई नेविगेशन, आपदा प्रबंधन, सटीक समय निर्धारण तथा स्थान आधारित सेवाओं जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। हालांकि, उपग्रह के कक्षा में पहुंचने और सेवाओं के पूरी तरह उपलब्ध होने के बीच तकनीकी जांच, प्रणाली के परीक्षण और संचालन की प्रक्रियाएं भी होती हैं।
NVS-03 की सफल लॉन्चिंग भारत की स्वदेशी नेविगेशन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम है। इससे NavIC प्रणाली के संचालन और उसकी सेवाओं की उपलब्धता को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
गलती बताएँ
संबंधित खबरें
दिल्ली की गफ्फार मार्केट में दुकानों में लगी आग, कई दुकानें जलकर हुई खाक
दिल्ली के चावड़ी बाज़ार हादसे के ज़िम्मेदार : तीन ठेकेदार गिरफ्तार
केदारनाथ धाम के कपाट 11 नवंबर को होंगे बंद, अब तक 19 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
पाठकों की राय (0)
अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली राय आपकी हो सकती है।