जयशंकर ने राष्ट्रमंडल देशों से आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने और व्यापार विविधीकरण पर दिया जोर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राष्ट्रमंडल देशों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला, व्यापारिक संपर्क, डिजिटल तकनीक और कुशल श्रमिकों की आवाजाही को बढ़ावा देने की जरूरत बताई।
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने राष्ट्रमंडल देशों के बीच व्यापारिक सहयोग और आर्थिक साझेदारी को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने राष्ट्रमंडल प्रमुखों की शासनाध्यक्ष बैठक (CHOGM) के दौरान आयोजित रिट्रीट में राष्ट्रमंडल के प्रमुखों और कारोबारी नेताओं की नाश्ते पर हुई बैठक को संबोधित किया।
बैठक में जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में राष्ट्रमंडल के सदस्य देशों को अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक सुरक्षित और विविध बनाना चाहिए। इसके लिए छोटी, भरोसेमंद और प्रभावी आपूर्ति श्रृंखलाओं को विकसित करना जरूरी है।
व्यापारिक संपर्क और स्थानीय वितरण व्यवस्था पर जोर
विदेश मंत्री ने कहा कि विभिन्न देशों के बीच संपर्क गलियारों (Connectivity Corridors) का विस्तार व्यापार और कारोबार के नए अवसर पैदा कर सकता है। राष्ट्रमंडल देशों को स्थानीय वितरण व्यवस्था मजबूत करने के लिए भी अधिक प्रयास करने चाहिए, ताकि व्यापारिक गतिविधियों का लाभ व्यापक स्तर पर मिल सके।
उन्होंने दुनिया के विभिन्न देशों में मौजूद भारतीय कारोबारी समुदाय को राष्ट्रमंडल की एक महत्वपूर्ण ताकत बताया। उनके अनुसार, यह समुदाय सदस्य देशों के बीच व्यापारिक संबंधों और आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
डिजिटल तकनीक को बताया विकास का माध्यम
जयशंकर ने डिजिटल तकनीक की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डिजिटल व्यवस्था से कामकाज में दक्षता बढ़ती है, सुशासन को प्रोत्साहन मिलता है और आर्थिक विकास के नए अवसर तैयार होते हैं।
उन्होंने आपदा राहत और मानवीय सहायता (HADR) के क्षेत्र में भारत के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर सहायता केंद्र या हब विकसित करने की जरूरत है। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया और राहत कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
कुशल श्रमिकों की आवाजाही को बनाया जाए प्राथमिकता
विदेश मंत्री ने कहा कि राष्ट्रमंडल देशों के बीच कुशल पेशेवरों और श्रमिकों की आवाजाही (Mobility of Skills) को भी सहयोग का महत्वपूर्ण क्षेत्र बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल देशों के बीच पहले से मौजूद आपसी विश्वास और सहज संबंधों का उपयोग व्यापार, आर्थिक विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए किया जाना चाहिए।
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