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कर्नाटक में CSR के जरिए सरकारी स्कूलों को गोद लेने की योजना, DK शिवकुमार ने IT कंपनियों से मांगा सहयोग

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री DK शिवकुमार ने IT कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों से CSR के तहत सरकारी प्राथमिक स्कूलों को गोद लेने की अपील की है। सरकार का लक्ष्य ग्रामीण शिक्षा को मजबूत करना और शिक्षा के लिए शहरों की ओर पलायन कम करना है।

कर्नाटक में CSR के जरिए सरकारी स्कूलों को गोद लेने की योजना, DK शिवकुमार ने IT कंपनियों से मांगा सहयोग

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री DK शिवकुमार ने राज्य में सरकारी प्राथमिक स्कूलों की स्थिति बेहतर बनाने के लिए कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत स्कूलों को गोद लेने की पहल का विस्तार करने की घोषणा की है। इसके लिए उन्होंने IT कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों से आगे आने की अपील की है।

शिवकुमार ने बताया कि उन्होंने IT कंपनियों के प्रतिनिधियों को बैठक के लिए आमंत्रित किया है। सरकार एक ऐसे मॉडल पर काम कर रही है, जिसके तहत निजी कंपनियां और संस्थान सरकारी प्राथमिक स्कूलों को गोद लेकर उनके बुनियादी ढांचे और सुविधाओं को बेहतर बनाने में सहयोग करेंगे।

उन्होंने कहा कि उनके जिले में इस पहल के तहत पहले ही 30 सरकारी स्कूलों को गोद लिया जा चुका है। इन स्कूलों के विकास पर संबंधित संस्थान लगभग 10 से 12 करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं। स्कूलों का निर्माण और विकास करने के बाद उन्हें सरकार को सौंप दिया जाता है।

IT कंपनियां और संस्थान सरकारी स्कूलों को करेंगे विकसित

DK शिवकुमार ने बताया कि Prestige, Embassy और अन्य संस्थानों ने बेंगलुरु जिले में इस पहल के तहत सरकारी स्कूलों को गोद लेने का काम शुरू किया है।

अब सरकार इस मॉडल को बेंगलुरु से बाहर राज्य के दूसरे जिलों तक पहुंचाना चाहती है, ताकि पंचायत स्तर पर संचालित सरकारी स्कूलों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार केवल आर्थिक सहायता नहीं मांग रही है, बल्कि कंपनियों और संस्थानों से स्कूलों के विकास की जिम्मेदारी लेने का आग्रह कर रही है।

शिवकुमार ने उन संस्थानों से भी अपील की, जो पहले से अपने स्कूल संचालित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थान अपने एक स्कूल के साथ किसी दूसरे सरकारी स्कूल को भी गोद लेकर उसके विकास में सहयोग कर सकते हैं।

गांवों से शहरों की ओर पलायन रोकने पर जोर

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग बेहतर शिक्षा और रोजगार की तलाश में लगातार कस्बों और बड़े शहरों की ओर जा रहे हैं। इससे शहरी क्षेत्रों की आबादी पर दबाव बढ़ रहा है।

उन्होंने बताया कि पहले शहरी आबादी का हिस्सा लगभग 29 से 30 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर करीब 43 से 44 प्रतिशत हो गया है।

शिवकुमार ने हालिया सरकारी समीक्षा का हवाला देते हुए कहा कि अनुमान है कि वर्ष 2047 तक शहरी आबादी का हिस्सा 70 प्रतिशत से अधिक हो सकता है।

उन्होंने कहा कि सरकार इस प्रवृत्ति को कम करना चाहती है। इसके लिए गांवों में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि बच्चों को अच्छी पढ़ाई के लिए अपने परिवारों के साथ शहरों की ओर पलायन न करना पड़े।

पंचायत स्तर के स्कूलों को मजबूत करने की योजना

DK शिवकुमार ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करना है। पंचायत स्तर पर संचालित स्कूलों में बेहतर बुनियादी सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने से ग्रामीण परिवारों को लाभ मिल सकता है।

प्रस्तावित मॉडल में सरकार, IT कंपनियां, कॉरपोरेट संस्थान और स्कूल प्रबंधन मिलकर काम करेंगे।

सरकार का मानना है कि निजी संस्थानों की भागीदारी से सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी और ग्रामीण बच्चों को अपने क्षेत्र में ही अच्छी शिक्षा मिल सकेगी।

CSR मॉडल का राज्यभर में विस्तार करने की तैयारी

सरकार इस पहल को बेंगलुरु से आगे दूसरे जिलों में भी लागू करना चाहती है। हालांकि, अभी तक इसके लिए जिलेवार लक्ष्य, समयसीमा और विस्तृत कार्ययोजना की जानकारी साझा नहीं की गई है।

शिवकुमार के बयान के अनुसार, सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक कंपनियां और संस्थान सरकारी स्कूलों को गोद लेने के लिए आगे आएं।

यह पहल सरकारी स्कूलों के विकास में कॉरपोरेट भागीदारी बढ़ाने और ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार का प्रस्तावित कदम है।

✓ संपादकीय जाँच: प्रूफ़रीडिंग DP Singh · प्रकाशन की मंज़ूरी DP Singh · हमारे मानक

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