छठ से पहले यमुना पहुंचे मनोज तिवारी, बोले- पूजा के साथ जल की सफाई और संरक्षण भी जरूरी
दिल्ली के सोनिया विहार में यमुना किनारे पहुंचे बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने नदी की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने दावा किया कि रेखा गुप्ता सरकार ने यमुना के करीब 30 किलोमीटर हिस्से की सफाई कराई है।
छठ पूजा का त्योहार नजदीक है और दिल्ली में यमुना नदी के किनारे घाटों की तैयारियां भी चर्चा में हैं। इसी बीच बीजेपी सांसद मनोज तिवारी सोनिया विहार में यमुना के किनारे पहुंचे और नदी की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने लोगों से अपील की कि छठ पूजा की आस्था के साथ-साथ पानी की सफाई और उसके संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाए।
मनोज तिवारी ने कहा कि रेखा गुप्ता सरकार ने यमुना के करीब 30 किलोमीटर हिस्से की सफाई कराई है। हालांकि, यह आंकड़ा उनका दावा है। नदी के कितने हिस्से की सफाई हुई है और पानी की गुणवत्ता में कितना सुधार आया है, इसकी पुष्टि के लिए अलग से आधिकारिक आंकड़ों की जरूरत होगी।
मनोज तिवारी ने छठ पूजा को लेकर क्या कहा?
मनोज तिवारी ने अपने बयान में छठ पूजा की परंपरा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लोग पार्कों में गड्ढे बनाकर भी छठ पूजा करते हैं। यह उनकी आस्था है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए। लेकिन उनके मुताबिक, छठ पूजा की मूल भावना में जल की स्वच्छता और संरक्षण भी शामिल है।
उन्होंने दिल्ली के लोगों से यमुना किनारे आने की अपील करते हुए बुराड़ी का भी जिक्र किया, जहां छठ पूजा के लिए घाट बनाए जाते हैं।
उनकी बात का सीधा मतलब यह है कि छठ पूजा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पानी और प्रकृति के महत्व को समझने का अवसर भी है। अगर हम सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पानी को इतना महत्वपूर्ण मानते हैं, तो उसकी सफाई बनाए रखना भी हमारी जिम्मेदारी होनी चाहिए।
छठ पूजा और यमुना का क्या संबंध है?
छठ पूजा उत्तर भारत, खासकर बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड में बड़े स्तर पर मनाई जाती है। दिल्ली में भी पूर्वांचल से आकर बसे लाखों लोग इस पर्व को पूरे उत्साह से मनाते हैं।
इस पर्व में श्रद्धालु डूबते और उगते सूर्य को जल अर्पित करते हैं। इसके लिए आमतौर पर नदी, तालाब या घाट के किनारे पूजा की जाती है। इसलिए साफ पानी और सुरक्षित घाट इस त्योहार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
दिल्ली में यमुना के किनारे कई जगह छठ पूजा के घाट तैयार किए जाते हैं। लेकिन नदी के प्रदूषण को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है। ऐसे में त्योहार के समय घाटों की साफ-सफाई, कचरे का सही निपटान और श्रद्धालुओं की सुरक्षा जैसे सवाल भी अहम हो जाते हैं।
यमुना की सफाई का मुद्दा क्यों अहम है?
यमुना दिल्ली की प्रमुख नदियों में से एक है, लेकिन शहर में नदी के प्रदूषण की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। सीवेज का पानी, नालों से आने वाला गंदा पानी और कचरा इसकी हालत को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
नदी को साफ करने के लिए केवल किनारे से कचरा हटाना काफी नहीं है। इसके लिए गंदे पानी को नदी में जाने से रोकना, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ाना और नालों के पानी का सही उपचार करना भी जरूरी है।
दिल्ली सरकार ने यमुना को साफ करने के लिए कई परियोजनाओं पर काम करने की बात कही है। 22 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी यमुना से जुड़ी करीब 8,941 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया था। सरकार ने इन परियोजनाओं के जरिए नदी की सफाई और सीवेज व्यवस्था में सुधार का लक्ष्य रखा है।
लेकिन इन योजनाओं की असली सफलता का पता तभी चलेगा, जब नदी में प्रदूषण कम होगा और पानी की गुणवत्ता में सुधार दिखाई देगा।
क्या घाटों की सफाई से यमुना साफ हो जाएगी?
यहां एक अंतर समझना जरूरी है। छठ पूजा के लिए घाटों की सफाई और पूरी यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त करना दो अलग-अलग काम हैं।
घाटों पर कचरा हटाना, रास्ते साफ रखना, रोशनी और सुरक्षा की व्यवस्था करना त्योहार के लिए जरूरी है। इससे श्रद्धालुओं को सुविधा मिलती है। लेकिन नदी को लंबे समय तक साफ रखने के लिए सीवेज और प्रदूषित पानी को नियंत्रित करना भी उतना ही जरूरी है।
इसी तरह, नदी में पूजा सामग्री, प्लास्टिक और दूसरे कचरे को डालने से बचना चाहिए। प्रशासन को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि पूजा स्थलों पर कचरा जमा करने और उसके निपटान की उचित व्यवस्था हो।
आगे की चुनौती क्या है?
मनोज तिवारी की अपील ऐसे समय आई है, जब छठ पूजा की तैयारियां चल रही हैं। इस दौरान दिल्ली में बड़ी संख्या में श्रद्धालु यमुना के किनारे पहुंचते हैं। इसलिए प्रशासन और आम लोगों, दोनों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।
प्रशासन के लिए जरूरी है कि घाट साफ हों, सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हों और पूजा के बाद जमा होने वाले कचरे को सही तरीके से हटाया जाए। वहीं, श्रद्धालु भी पूजा के दौरान प्लास्टिक और अन्य कचरा नदी में डालने से बच सकते हैं।
यमुना की सफाई किसी एक दिन या त्योहार तक सीमित रहने वाला काम नहीं है। इसके लिए लगातार प्रयास करने होंगे। छठ पूजा के मौके पर नदी की स्वच्छता की बात उठना इस दिशा में जागरूकता बढ़ा सकता है, लेकिन स्थायी बदलाव के लिए योजनाओं का जमीन पर असर दिखना भी जरूरी है।
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