संजय राउत के अल्बानिया वाले बयान पर प्रियंका चतुर्वेदी का पलटवार, बोलीं- भारत को सीखने की जरूरत नहीं
अल्बानिया में हिंसा को लेकर संजय राउत की टिप्पणी पर प्रियंका चतुर्वेदी ने असहमति जताई। उन्होंने कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन लोकतांत्रिक तरीके से होता है और हिंसा से व्यवस्था बदलने का समर्थन नहीं किया जा सकता।
अल्बानिया में हुई हिंसा को लेकर शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत की टिप्पणी पर पार्टी की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने साफ कहा कि भारत को सत्ता परिवर्तन के लिए अल्बानिया या बांग्लादेश जैसे देशों से सीखने की जरूरत नहीं है। भारत में सरकारें चुनाव के जरिए बदलती हैं और लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
प्रियंका चतुर्वेदी ने क्या कहा?
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि लोगों का कानून अपने हाथ में लेना और सरकारी संस्थानों पर हमला करना किसी भी हालत में सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने अल्बानिया का जिक्र करते हुए कहा कि वहां लंबे समय तक कम्युनिस्ट शासन रहा है। ऐसे देश की घटनाओं को भारत के लिए उदाहरण बनाना उचित नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में आपातकाल के बाद भी सत्ता परिवर्तन चुनाव के जरिए हुआ था। इसलिए लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदलाव के लिए हिंसा का रास्ता अपनाने की जरूरत नहीं है।
बांग्लादेश का उदाहरण देने पर भी जताई आपत्ति
प्रियंका ने बांग्लादेश में हुए विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि सत्ता परिवर्तन के लिए वहां की घटनाओं से प्रेरणा लेने की बात अफसोसजनक है। उनके मुताबिक, ऐसे आंदोलनों के बाद अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं सामने आई थीं।
उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई गलत हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि लोगों को हिंसा करके सरकार बदलने के लिए कहा जाए।
संजय राउत ने क्या पोस्ट किया था?
शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अल्बानिया में हुई हिंसा का जिक्र किया था। उन्होंने दावा किया कि वहां लोग न्यायपालिका और सरकार से नाराज थे और प्रदर्शनकारियों ने संसद, सरकारी दफ्तरों तथा मंत्रियों के घरों को निशाना बनाया।
राउत ने अपनी पोस्ट में लिखा कि दूसरे देशों को इन घटनाओं से सबक लेना चाहिए, खासकर भारत को। उनकी इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक बहस शुरू हो गई।
विवाद की मुख्य वजह क्या है?
इस विवाद का मूल सवाल यह है कि सरकार और संस्थानों के खिलाफ नाराजगी जाहिर करने का तरीका क्या होना चाहिए। संजय राउत ने अल्बानिया की घटनाओं को भारत के संदर्भ में उठाया, जबकि प्रियंका चतुर्वेदी ने हिंसक विरोध के बजाय लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर जोर दिया।
उनके बयान से साफ है कि सत्ता से असहमति जताना और हिंसा के जरिए व्यवस्था बदलने की मांग करना दो अलग बातें हैं। भारत में सरकार बदलने का संवैधानिक रास्ता चुनाव है।
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