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SCO में बोले राजनाथ सिंह आतंकवाद पर कोई दोहरा मापदंड नहीं चलेगा

ताजिकिस्तान की राजधानी दुशान्बे में SCO की बैठक के दौरान राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के खिलाफ साझा कार्रवाई, व्यापार बढ़ाने और मध्य एशिया से संपर्क मजबूत करने पर जोर दिया। भारत ने 2026–2030 की आर्थिक सहयोग योजना का समर्थन किया।

SCO में बोले राजनाथ सिंह आतंकवाद पर कोई दोहरा मापदंड नहीं चलेगा

आतंकवाद से मुकाबला करना हो, व्यापार को बढ़ाना हो या एशियाई देशों के बीच बेहतर संपर्क बनाना हो भारत चाहता है कि शंघाई सहयोग संगठन (SCO) केवल चर्चाओं तक सीमित न रहे, बल्कि ऐसे फैसले ले जिनका फायदा सभी सदस्य देशों को मिले। भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 20 अक्टूबर 2026 को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशान्बे में SCO शासनाध्यक्ष परिषद की 25वीं बैठक को संबोधित करते हुए यही बात रखी।

उनका सबसे सख्त संदेश आतंकवाद को लेकर था। राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद शांति और विकास के सामने गंभीर खतरा है। इससे निर्दोष लोगों की जान जाती है, कारोबार और निवेश प्रभावित होते हैं और युवाओं के अवसर छिनते हैं। उन्होंने साफ कहा कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता। इसके खिलाफ कार्रवाई में दोहरे मापदंड नहीं होने चाहिए।

आतंकवाद के खिलाफ भारत ?

राजनाथ सिंह ने सदस्य देशों से आतंकवाद के पूरे तंत्र को खत्म करने के लिए मिलकर काम करने की अपील की। उनका कहना था कि सिर्फ आतंकवादी हमलों को रोकना पर्याप्त नहीं है। आतंकवादियों को पैसा देने, उनका समर्थन करने या उन्हें सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई जरूरी है।

इसका सीधा मतलब है कि आतंकवाद से लड़ाई केवल सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। इसके लिए देशों के बीच सहयोग और उन नेटवर्क पर कार्रवाई भी जरूरी है, जो आतंकवाद को चलाने में मदद करते हैं।

SCO क्या है और भारत इससे क्या चाहता है?

SCO यानी शंघाई सहयोग संगठन यूरेशिया क्षेत्र के देशों का एक संगठन है। इसके जरिए सदस्य देश सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, व्यापार, परिवहन और दूसरे साझा मुद्दों पर सहयोग करते हैं। भारत 2017 में इसका पूर्ण सदस्य बना था।

राजनाथ सिंह ने कहा कि संगठन की सफलता इस बात से तय होनी चाहिए कि उसके फैसलों से आम लोगों और कारोबारियों को कितना फायदा होता है। उन्होंने जोर दिया कि सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग ऐसा होना चाहिए, जिससे सभी को लाभ मिले।

भारत का यह भी कहना है कि संगठन में नए संस्थान या व्यवस्थाएं बनाने से पहले उनकी जरूरत स्पष्ट होनी चाहिए। काम दोहराने के बजाय ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जो व्यावहारिक समस्याओं को हल करे और सदस्य देशों को वास्तविक फायदा पहुंचाए।

व्यापार और अर्थव्यवस्था को लेकर क्या है भारत की सोच?

दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार में रुकावट, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा की चिंताएं तथा तकनीक के क्षेत्र में बढ़ता अंतर कई देशों के लिए चुनौती बने हुए हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि ऐसे हालात में SCO देशों को आपसी सहमति बनाकर ठोस कदम उठाने चाहिए।

उन्होंने व्यापार और निवेश को आसान बनाने, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने और तकनीक का इस्तेमाल करके विकास को गति देने पर जोर दिया। आपूर्ति श्रृंखला का मतलब उन रास्तों और व्यवस्थाओं से है, जिनके जरिए कच्चा माल, सामान और जरूरी उत्पाद एक जगह से दूसरी जगह पहुंचते हैं।

भारत ने 2026 से 2030 तक बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम की कार्ययोजना का समर्थन भी किया। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाना है।

मध्य एशिया तक पहुंच क्यों अहम है?

राजनाथ सिंह ने कहा कि बेहतर परिवहन और संपर्क व्यवस्था से देशों के बीच व्यापार बढ़ सकता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे और चाबहार बंदरगाह जैसी पहलों का जिक्र किया। भारत के नजरिए से ये रास्ते मध्य एशिया को बड़े बाजारों से जोड़ने में मदद कर सकते हैं।

लेकिन उन्होंने एक अहम शर्त भी रखी। संपर्क परियोजनाएं सभी संबंधित देशों से बातचीत और उनकी संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करते हुए आगे बढ़नी चाहिए। यानी किसी देश की सीमाओं और अधिकारों की अनदेखी करके बनाई गई परियोजना लंबे समय तक सफल नहीं हो सकती।

उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार को आसान बनाने के लिए सिर्फ सड़क, बंदरगाह और रेल नेटवर्क बनाना काफी नहीं है। सीमा शुल्क की प्रक्रिया सरल होनी चाहिए, दस्तावेज डिजिटल होने चाहिए और सामान की आवाजाही से जुड़ी व्यवस्थाओं में सुधार होना चाहिए। इससे व्यापार की लागत और समय दोनों कम किए जा सकते हैं।

नशे के खिलाफ सहयोग के लिए भी नए केंद्र

बैठक में ताशकंद में सार्वभौमिक केंद्र और दुशान्बे में मादक पदार्थ-रोधी केंद्र को SCO के स्थायी निकायों के रूप में स्थापित करने के फैसलों का भी स्वागत किया गया। राजनाथ सिंह ने कहा कि इन केंद्रों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे कितनी कुशलता से काम करते हैं और सदस्य देशों के बीच कितना अच्छा समन्वय बनाते हैं।

यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नशीले पदार्थों की तस्करी अक्सर एक देश तक सीमित नहीं रहती। ऐसे में जानकारी साझा करना और देशों के बीच तालमेल रखना कार्रवाई को अधिक प्रभावी बना सकता है।

तकनीक, स्टार्टअप और महिलाओं की भूमिका पर जोर

राजनाथ सिंह ने भारत के विकास अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि तकनीक और नवाचार लोगों की समस्याएं हल करने और अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने भारत के डिजिटल सार्वजनिक ढांचे का उदाहरण दिया, जिसने सरकारी सेवाओं की पहुंच और वित्तीय समावेशन को बढ़ाने में मदद की है।

उन्होंने भारत के स्टार्टअप तंत्र और महिलाओं के नेतृत्व में विकास पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, विकास का आकलन सिर्फ आर्थिक आंकड़ों से नहीं होना चाहिए। यह भी देखना चाहिए कि युवाओं को कितने अवसर मिल रहे हैं, उद्यमियों के लिए कितने नए बाजार खुल रहे हैं और किसानों तथा छोटे कारोबारियों तक तकनीक कितनी पहुंच रही है।

रक्षा मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा-रोधी अवसंरचना गठबंधन, मिशन लाइफ और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देने की जरूरत भी बताई।

बैठक में क्या फैसले हुए?

बैठक में SCO देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग की प्रगति की समीक्षा की गई। परिवहन, वित्त, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।

प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने बैठक की संयुक्त घोषणा को अपनाया। इसमें 2027 के लिए SCO के बजट से जुड़े फैसले और 2026 से 2030 तक के आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग कार्यक्रम की कार्ययोजना शामिल थी।

राजनाथ सिंह ने सदस्य देशों को इस साल के अंत में भारत में आयोजित होने वाले पहले SCO सभ्यता संवाद मंच में भाग लेने का निमंत्रण भी दिया।

भारत के संदेश का मतलब क्या है?

दुशान्बे की बैठक में भारत ने तीन मुख्य बातें रखीं—आतंकवाद के खिलाफ बिना भेदभाव कार्रवाई, ऐसा आर्थिक सहयोग जिससे सभी देशों को फायदा हो और संपर्क परियोजनाओं में संप्रभुता का सम्मान।

अब असली चुनौती इन बातों को जमीन पर लागू करने की होगी। आतंकवाद और नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ जानकारी साझा करना, व्यापार की रुकावटें कम करना और परिवहन परियोजनाओं को आगे बढ़ाना तभी सफल होगा, जब सदस्य देश घोषणाओं से आगे बढ़कर मिलकर काम करेंगे। यही SCO के लिए भी सबसे बड़ी कसौटी होगी।

✓ संपादकीय जाँच: प्रूफ़रीडिंग DP Singh · प्रकाशन की मंज़ूरी DP Singh · हमारे मानक

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