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सारा अली खान के केदारनाथ दर्शन पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का बयान, बोले- इस्लाम में इसकी इजाजत नहीं

अभिनेत्री सारा अली खान के केदारनाथ मंदिर जाकर पूजा करने पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने शरिया का हवाला देते हुए इसे नाजायज बताया। उनके बयान के बाद धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर चर्चा शुरू हो सकती है।

सारा अली खान के केदारनाथ दर्शन पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का बयान, बोले- इस्लाम में इसकी इजाजत नहीं

अभिनेत्री सारा अली खान का केदारनाथ मंदिर जाना और वहां पूजा करना एक बार फिर चर्चा में है। इस बार ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने इस मामले पर अपनी राय रखी है। उन्होंने इस्लामी शरीयत का हवाला देते हुए कहा कि किसी मुसलमान का दूसरे धर्म के धार्मिक रीति-रिवाजों में शामिल होना जायज नहीं है।

मौलाना का कहना है कि उन्हें कई युवाओं ने सारा अली खान के केदारनाथ मंदिर जाने को लेकर सवाल पूछे थे। लोग जानना चाहते थे कि क्या इस्लाम में किसी मुसलमान को दूसरे धर्म के मंदिर में जाकर पूजा करने की इजाजत है? इसी सवाल के जवाब में उन्होंने अपना पक्ष रखा।

उन्होंने कहा कि अगर सारा अली खान ने अपनी इच्छा से केदारनाथ मंदिर में पूजा की, भगवान से आशीर्वाद मांगा और धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया, तो उनके अनुसार शरीयत में इसे हराम माना जाएगा।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने क्या कहा?

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि इस्लाम में किसी दूसरे धर्म की धार्मिक आस्था और पूजा-पद्धति को अपनाने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि यह नियम मुस्लिम पुरुषों और महिलाओं, दोनों पर लागू होता है।

उनके मुताबिक, किसी दूसरे धर्म के धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होकर उसकी पूजा-पद्धति के अनुसार प्रार्थना करना शरीयत के हिसाब से नाजायज है।

उन्होंने सारा अली खान के मामले में भी यही बात दोहराई। मौलाना ने कहा कि यदि अभिनेत्री ने अपनी मर्जी से केदारनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की और वहां आशीर्वाद मांगा, तो इस्लामी मान्यता के अनुसार यह पाप और हराम का काम है।

यहां यह समझना जरूरी है कि मौलाना ने यह बात इस्लामी शरीयत की अपनी धार्मिक व्याख्या के आधार पर कही है। यह उनका धार्मिक मत है, न कि किसी अदालत या सरकारी संस्था का फैसला।

सारा अली खान के केदारनाथ जाने पर विवाद क्यों?

सारा अली खान कई बार केदारनाथ मंदिर जा चुकी हैं। वह मंदिर में दर्शन और पूजा करते हुए अपनी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर साझा कर चुकी हैं।

केदारनाथ उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित भगवान शिव के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह चारधाम यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

सारा अली खान के मंदिर जाने को लेकर पहले भी सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। कुछ लोगों ने इसे उनकी व्यक्तिगत आस्था और धार्मिक स्थलों के प्रति सम्मान से जोड़कर देखा, जबकि कुछ लोगों ने उनके धर्म के आधार पर सवाल उठाए।

अब मौलाना शहाबुद्दीन रजवी के बयान ने इस चर्चा को फिर से सामने ला दिया है।

शरीयत में 'नाजायज' और 'हराम' का क्या मतलब है?

इस बयान को समझने के लिए दो शब्दों का अर्थ जानना जरूरी है।

नाजायज: इस्लामी धार्मिक नियमों के अनुसार ऐसा काम, जिसकी अनुमति न हो।

हराम: ऐसा काम जिसे इस्लाम में धार्मिक रूप से निषिद्ध माना जाता है।

मौलाना ने अपने बयान में इन दोनों शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि दूसरे धर्म की पूजा-पद्धति में शामिल होना इस्लाम के नियमों के खिलाफ है।

हालांकि, धार्मिक मामलों में अलग-अलग विद्वानों की व्याख्या और विचार भी हो सकते हैं। इसलिए किसी एक मौलाना के बयान को सभी मुस्लिम विद्वानों या पूरे मुस्लिम समुदाय की एक जैसी राय मानना सही नहीं होगा।

धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सवाल

इस पूरे मामले में एक बड़ा सवाल यह भी है कि किसी व्यक्ति की धार्मिक आस्था और दूसरे धर्म के प्रति सम्मान को किस नजरिए से देखा जाना चाहिए।

भारत में हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने और अपनी व्यक्तिगत आस्था के अनुसार जीवन जीने का संवैधानिक अधिकार है। संविधान का अनुच्छेद 25 सभी व्यक्तियों को अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म को मानने, उसका पालन करने तथा प्रचार करने का अधिकार देता है। यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य जैसी संवैधानिक सीमाओं के अधीन है।

किसी व्यक्ति का मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा या चर्च जाना अपने आप में उसके धार्मिक विश्वास में बदलाव का प्रमाण नहीं होता। किसी धार्मिक स्थल पर जाने, वहां की परंपरा को समझने और उस धर्म की पूजा-पद्धति अपनाने के बीच भी अंतर है।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने सारा अली खान के मामले को शरीयत के धार्मिक नियमों के आधार पर देखा है। वहीं, किसी व्यक्ति की निजी आस्था और धार्मिक स्वतंत्रता का सवाल एक अलग विषय है।

इस बयान का मतलब क्या समझना चाहिए?

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का बयान मुख्य रूप से मुस्लिम युवाओं के सवालों के जवाब में दिया गया धार्मिक स्पष्टीकरण है। उन्होंने सारा अली खान के केदारनाथ जाने और पूजा करने को इस्लामी शरीयत के हिसाब से गलत बताया है।

✓ संपादकीय जाँच: प्रूफ़रीडिंग DP Singh · प्रकाशन की मंज़ूरी DP Singh · हमारे मानक

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