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ढाका में फिर गूंजा ‘दिल्ली ना ढाका’ का नारा, भारत-बांग्लादेश संबंधों पर बढ़ी बहस

30 अक्टूबर को ढाका में भारतीय उच्चायोग की ओर मार्च के दौरान भारत-विरोधी नारे लगाए गए। प्रदर्शन में शेख हसीना की वापसी, सीमा और जल बंटवारे जैसे मुद्दे उठे। हालांकि, इस मार्च का आयोजन NCP ने नहीं किया था।

ढाका में फिर गूंजा ‘दिल्ली ना ढाका’ का नारा, भारत-बांग्लादेश संबंधों पर बढ़ी बहस

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में 30 अक्टूबर 2026 को भारत के खिलाफ नारेबाजी और भारतीय उच्चायोग की ओर मार्च की घटना ने दोनों देशों के संबंधों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज कर दी है। जातीय बिप्लबी परिषद के कार्यकर्ताओं ने भारतीय उच्चायुक्त को वापस बुलाने और भारत के साथ हुए कुछ समझौतों की समीक्षा सहित कई मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान ‘दिल्ली ना ढाका, ढाका-ढाका’ और भारत के कथित वर्चस्व के खिलाफ नारे लगाए गए।

द डेली कैपिटल न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारी भारतीय उच्चायोग की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने गुलशन इलाके में बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया। संगठन ने सीमा पर बांग्लादेशी नागरिकों की मौत, साझा नदियों के पानी के बंटवारे और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत से वापस लाने जैसे मुद्दे उठाए।

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 30 अक्टूबर के इस मार्च को नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) की रैली बताने की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट से नहीं होती। हालांकि, ‘दिल्ली ना ढाका’ का नारा NCP की एक रैली में नवंबर 2025 में भी लगाया गया था। उस समय पार्टी ने अपने चुनाव चिह्न के प्रचार के लिए रैली निकाली थी। इसलिए दोनों घटनाओं को अलग-अलग संदर्भ में देखना जरूरी है।

शेख हसीना का भारत में रहना बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा

भारत और बांग्लादेश के बीच मौजूदा तनाव की सबसे प्रमुख वजह पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का भारत में रहना है। अगस्त 2024 में बांग्लादेश में छात्र आंदोलन और राजनीतिक उथल-पुथल के बाद हसीना देश छोड़कर भारत आ गई थीं। तब से वह भारत में रह रही हैं।

बांग्लादेश की मौजूदा सरकार ने भारत से उनकी प्रत्यर्पण की मांग की है। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इस अनुरोध की जांच स्थापित कानूनी और न्यायिक प्रक्रियाओं के तहत की जा रही है।

अगस्त 2026 में शेख हसीना के भारत से दिए गए सार्वजनिक बयान और बांग्लादेश लौटने की उनकी मंशा ने भी दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को प्रभावित किया। ढाका का कहना है कि उनके प्रत्यर्पण का मुद्दा द्विपक्षीय संबंधों में महत्वपूर्ण है, जबकि भारत ने इस मामले पर कानूनी प्रक्रिया का हवाला दिया है।

गंगा जल समझौते की अवधि दिसंबर में होगी पूरी

भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा नदी के पानी का बंटवारा भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। दोनों देशों ने 12 दिसंबर 1996 को 30 वर्ष के लिए गंगा जल बंटवारा समझौता किया था। इसकी अवधि 12 दिसंबर 2026 को पूरी हो रही है।

समझौते के अनुच्छेद 12 में स्पष्ट है कि इसकी अवधि 30 वर्ष होगी और इसे दोनों देशों की आपसी सहमति से नवीनीकृत किया जा सकता है। बांग्लादेश चाहता है कि नए समझौते में सूखे मौसम के दौरान पानी की उपलब्धता को लेकर अधिक स्पष्ट और भरोसेमंद प्रावधान हों।

2 नवंबर 2026 को बांग्लादेश की विदेश मामलों की राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने कहा कि उनकी सरकार समझौते के नवीनीकरण को लेकर आशावान है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने भारत के साथ बातचीत के लिए एक समिति गठित की है। भारत की ओर से भी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि जल संबंधी मुद्दों पर संयुक्त नदी आयोग के माध्यम से तकनीकी स्तर पर बातचीत जारी है।

इसलिए समझौते की अवधि समाप्त होने को लेकर चिंता वास्तविक है, लेकिन इसे दोनों देशों के बीच बातचीत पूरी तरह बंद होने के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।

जापान और अन्य देशों के साथ संबंध बढ़ाने की कोशिश

बांग्लादेश अपनी विदेश नीति में भारत के अलावा जापान, चीन और अन्य देशों के साथ भी आर्थिक एवं रणनीतिक संबंधों को विस्तार देने की कोशिश कर रहा है। जापान की सहायता से बांग्लादेश में बंदरगाह, परिवहन और शहरी कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाओं पर काम हुआ है।

बांग्लादेश की इस नीति को विदेश संबंधों में विविधता लाने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, इसे सीधे भारत के खिलाफ कदम बताने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं। किसी भी देश के साथ आर्थिक सहयोग और दूसरे देश के साथ कूटनीतिक तनाव दो अलग-अलग विषय हो सकते हैं।

भारत के कथित हस्तक्षेप को लेकर राजनीतिक आरोप

बांग्लादेश के कुछ राजनीतिक समूहों और नेताओं का आरोप है कि भारत वहां की घरेलू राजनीति में प्रभाव बनाए रखने की कोशिश करता रहा है। शेख हसीना को भारत में रहने देना भी इन आरोपों के समर्थन में उठाया जाने वाला प्रमुख मुद्दा है।

दूसरी ओर, भारत का कहना है कि वह बांग्लादेश के साथ स्थिर और रचनात्मक संबंध चाहता है। दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा, परिवहन और सीमा प्रबंधन से जुड़े सहयोग के कई तंत्र मौजूद हैं।

इन आरोपों और जवाबों को अलग-अलग राजनीतिक पक्षों के दृष्टिकोण के रूप में समझना जरूरी है। भारत के हस्तक्षेप के आरोप अपने आप में प्रमाणित तथ्य नहीं हैं।

आर्थिक चुनौतियां और घरेलू राजनीति का दबाव

बांग्लादेश में महंगाई, रोजगार, ऊर्जा आपूर्ति और गारमेंट उद्योग से जुड़े श्रमिकों के मुद्दे भी राजनीतिक बहस का हिस्सा हैं। ऐसे माहौल में भारत के साथ संबंधों का सवाल घरेलू राजनीति में अधिक महत्व हासिल कर सकता है।

हालांकि, यह कहना कि आर्थिक समस्याओं के कारण ही भारत-विरोधी नारे लगाए जा रहे हैं, उपलब्ध तथ्यों से साबित नहीं होता। इन प्रदर्शनों में उठाई गई मांगों में सीमा, जल बंटवारा, प्रत्यर्पण और द्विपक्षीय समझौते जैसे विशिष्ट मुद्दे भी शामिल हैं।

दोनों देशों के सामने कूटनीतिक चुनौती

भारत और बांग्लादेश के बीच करीब 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा है। दोनों देश 54 नदियां साझा करते हैं। व्यापार, ऊर्जा, परिवहन और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ एशियन स्टडीज के अक्टूबर 2026 के विश्लेषण के मुताबिक, शेख हसीना का मुद्दा दोनों देशों के राजनीतिक संबंधों में तनाव का प्रमुख कारण बना हुआ है। इसके बावजूद जल, ऊर्जा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग की जरूरत बनी हुई है।

30 अक्टूबर का प्रदर्शन बताता है कि भारत के साथ संबंध बांग्लादेश की घरेलू राजनीति और सार्वजनिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं। लेकिन राजनीतिक नारों और दोनों देशों के वास्तविक कूटनीतिक संबंधों के बीच अंतर समझना भी जरूरी है। गंगा जल समझौते की अवधि समाप्त होने से पहले बातचीत, सीमा संबंधी विवादों का समाधान और आपसी भरोसा बनाए रखना दोनों सरकारों के लिए अहम होगा।

✓ संपादकीय जाँच: प्रूफ़रीडिंग DP Singh · प्रकाशन की मंज़ूरी DP Singh · हमारे मानक

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