दिल्ली में विपक्षी रैली के बाद 11 हजार करोड़ के कारोबारी नुकसान का दावा, CTI ने उठाए सवाल
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) का दावा है कि 1 नवंबर की विपक्षी रैली और यातायात प्रतिबंधों के कारण दिल्ली के कारोबार को करीब 11,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। संगठन के मुताबिक, 22 से 25 प्रमुख बाजारों में लगभग 80 फीसदी दुकानें बंद रहीं।
दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित विपक्षी रैली के बाद राजधानी के व्यापारिक नुकसान को लेकर विवाद सामने आया है। व्यापारी संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने दावा किया है कि रैली और उससे जुड़े यातायात प्रतिबंधों के कारण दिल्ली के कारोबार को करीब 11,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। संगठन के मुताबिक, रैली के आसपास के 22 से 25 प्रमुख बाजारों में लगभग 80 फीसदी दुकानें बंद रहीं।
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि रैली के कारण बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हुई और व्यापारिक गतिविधियां सामान्य नहीं रह सकीं। संगठन का दावा है कि दिल्ली में लगभग 3 लाख दुकानों में से करीब 2.5 लाख दुकानें बंद रहीं।
माल की ढुलाई और सप्लाई पर भी असर का दावा
बृजेश गोयल के अनुसार, रैली के दौरान यातायात प्रतिबंधों और आवाजाही में आई बाधाओं का असर केवल दुकानों के खुलने तक सीमित नहीं रहा। माल की ढुलाई और सप्लाई चेन भी प्रभावित हुई, जिससे कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ा।
CTI ने दावा किया कि रैली के आसपास स्थित प्रमुख बाजारों में व्यापारिक गतिविधियां काफी कम रहीं। हालांकि, संगठन ने 11,000 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किस पद्धति से किया, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
त्योहारों से पहले कारोबार प्रभावित होने की चिंता
व्यापारियों के मुताबिक, धनतेरस और दिवाली से पहले का समय खुदरा कारोबार के लिए महत्वपूर्ण होता है। इस अवधि में बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही और खरीदारी बढ़ने की उम्मीद रहती है।
ऐसे समय में रैली और यातायात प्रतिबंधों के कारण बाजारों तक ग्राहकों की पहुंच प्रभावित होने से कारोबारियों की चिंता बढ़ी। CTI का कहना है कि त्योहारों से पहले व्यापारिक गतिविधियों में आई बाधा का असर दुकानदारों की बिक्री पर पड़ा।
राहुल गांधी को चार पत्र लिखने का दावा
CTI ने यह भी कहा है कि रैली से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी को कार्यक्रम टालने की मांग को लेकर चार बार पत्र लिखे गए थे। संगठन के अनुसार, इन पत्रों के माध्यम से रैली के कारण बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ने वाले संभावित असर की ओर ध्यान दिलाया गया था।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन पत्रों की प्रतियां, उनके भेजे जाने की तारीख और कांग्रेस या रैली आयोजकों की ओर से दिए गए जवाब का विवरण शामिल नहीं है। इस संबंध में उनका पक्ष सामने आने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।
नुकसान के आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी
CTI की ओर से बताया गया 11,000 करोड़ रुपये का नुकसान संगठन का अनुमान है। इसी तरह 3 लाख में से 2.5 लाख दुकानें बंद रहने और 22 से 25 बाजारों में 80 फीसदी दुकानें बंद होने के आंकड़ों की भी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
वास्तविक आर्थिक प्रभाव का आकलन करने के लिए बाजारवार बिक्री के आंकड़े, दुकानें बंद रहने का रिकॉर्ड, माल ढुलाई से जुड़े विवरण और यातायात प्रतिबंधों की अवधि जैसी जानकारी जरूरी होगी।
फिलहाल, CTI के दावों ने राजनीतिक आयोजनों के दौरान व्यापारिक गतिविधियों और आम नागरिकों की आवाजाही पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल खड़े किए हैं। इस मुद्दे पर व्यापारिक संगठनों और रैली आयोजकों के बीच संवाद तथा प्रशासनिक समन्वय की जरूरत भी सामने आती है।
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