दिवाली से पहले दिल्ली की हवा हुई जहरीली, 4 दिनों से लगातार बिगड़ रहा AQI; आखिर कब मिलेगी प्रदूषण से राहत?
दिवाली से पहले ही दिल्ली की हवा एक बार फिर जहरीली होने लगी है। राजधानी में लगातार चौथे दिन वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खराब से बेहद खराब श्रेणी में बना हुआ है। सुबह के समय कई इलाकों में धुंध और स्मॉग की मोटी परत देखने को मिली। हवा की धीमी रफ्तार, गाड़ियों से निकलने वाला धुआं और पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं प्रदूषण बढ़ने की प्रमुख वजहों में शामिल हैं। ऐसे में दिवाली से पहले दिल्ली की हवा लोगों की चिंता बढ़ा रही है।
दिवाली से पहले ही दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने लगा है। सुबह के समय अक्षरधाम समेत राजधानी के कई इलाकों में धुंध और स्मॉग की मोटी परत देखने को मिली। दिल्ली का AQI 230 से 250 के बीच दर्ज किया गया, जबकि कुछ इलाकों में हवा की स्थिति और भी खराब रही।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, 201 से 300 के बीच AQI को खराब और 301 से 400 के बीच बेहद खराब माना जाता है। खराब हवा का असर लोगों की सेहत पर पड़ सकता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस या दिल की बीमारी से परेशान लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, हवा की रफ्तार और मौसम की मौजूदा परिस्थितियां प्रदूषकों को फैलने से रोक सकती हैं, ऐसे में आने वाले दिनों में प्रदूषण से तत्काल राहत मिलने की संभावना मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगी.
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने की बड़ी वजहें
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई वजहें हैं। इनमें सबसे बड़ी वजहों में से एक सड़कों पर चलने वाले वाहनों से निकलने वाला धुआं है। राजधानी में रोजाना बड़ी संख्या में निजी गाड़ियां, डीजल बसें और व्यावसायिक वाहन चलते हैं। इनसे निकलने वाला धुआं हवा की गुणवत्ता को खराब करता है। इसके अलावा, सड़कों पर जमा धूल और निर्माण कार्यों के दौरान उड़ने वाली धूल भी प्रदूषण बढ़ाती है।
कई जगहों पर खुले में कचरा जलाने से भी हवा में धुआं और हानिकारक कण फैलते हैं। इन सभी कारणों का असर दिल्ली की हवा पर पड़ता है, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
प्रदूषण को कम करने के लिए जरूरी है कि वाहनों से निकलने वाले धुएं पर नियंत्रण रखा जाए और उनके प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) की नियमित जांच की जाए। इसके साथ ही, निर्माण स्थलों पर धूल को फैलने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं और खुले में कचरा जलाने पर सख्ती से रोक लगाई जाए। अगर इन नियमों को सही तरीके से लागू किया जाए, तो प्रदूषण के स्तर को कम करने और दिल्ली की हवा को साफ बनाने में मदद मिल सकती है।
प्रदूषण रोकने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए?
दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण को लागू करने का आदेश दिया। यह आदेश 21 अक्टूबर 2026 को खराब होती हवा को देखते हुए जारी किया गया।
GRAP का पहला चरण तब लागू होता है, जब AQI 201 से 300 के बीच पहुंच जाता है। इसके तहत सड़कों की मशीनों से सफाई, पानी का छिड़काव और निर्माण स्थलों पर उड़ने वाली धूल को रोकने जैसे कदम उठाए जाते हैं। साथ ही, खुले में कचरा जलाने पर रोक लगाई जाती है, ताकि हवा में प्रदूषण कम किया जा सके।
इन नियमों को लागू करने की जिम्मेदारी नगर निकायों और संबंधित विभागों की होती है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होता है कि सड़कों और निर्माण स्थलों से धूल कम फैले और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर रोक लगे।
इसके अलावा, सितंबर 2026 में CAQM ने GRAP के नियमों में कुछ बदलावों को भी मंजूरी दी थी। इसके तहत प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर नियंत्रण के उपायों को पहले चरण में शामिल किया गया है। इनमें NCR और आसपास के राज्यों से आने वाली BS-IV और उससे पुराने मानकों वाली बसों के प्रवेश पर प्रतिबंध से जुड़े नियम भी शामिल हैं। इन कदमों का उद्देश्य दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करना और लोगों को साफ हवा उपलब्ध कराने में मदद करना है।
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