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जालौन में ताई बाई का ऐतिहासिक महल बारिश से ढहा, विरासत संरक्षण पर उठे सवाल

जालौन की 18वीं सदी की ऐतिहासिक इमारत, जिसे ताई बाई से जुड़ी विरासत माना जाता है, बारिश के दौरान ढह गई। स्थानीय लोगों ने लंबे समय से भवन की जर्जर स्थिति और संरक्षण की अनदेखी पर चिंता जताई है।

जालौन में ताई बाई का ऐतिहासिक महल बारिश से ढहा, विरासत संरक्षण पर उठे सवाल

नगर की ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा ताई बाई का पुराना महल बारिश के दौरान ढह गया। इमारत का बड़ा हिस्सा गिरने से यह भवन अब मलबे में तब्दील हो गया है। इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह भवन 18वीं सदी से जुड़ा हुआ है और जालौन की शासिका ताई बाई की स्मृतियों का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। बताया जाता है कि पुराने तहसीलदार कार्यालय के रूप में भी इसकी पहचान रही है। समय के साथ भवन की हालत खराब होती गई। दीवारों में दरारें पड़ने और बारिश के पानी से इमारत को नुकसान पहुंचने की बात भी स्थानीय लोगों ने उठाई है।

संरक्षण के दावों और जमीनी स्थिति पर सवाल

स्थानीय स्तर पर इस भवन को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में संरक्षित किए जाने की बात कही जाती रही है। हालांकि, भवन की मौजूदा स्थिति और उसके संरक्षण को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इमारत की जर्जर हालत के बावजूद समय रहते मरम्मत या सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए।

इस बीच, ताई बाई के नाम पर करीब 78 लाख रुपये की लागत से प्रवेश द्वार बनाए जाने और उनकी प्रतिमा स्थापित करने की योजना का भी उल्लेख किया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि जब ऐतिहासिक भवन ही सुरक्षित नहीं रह सका, तो स्मारक और प्रवेश द्वार बनाने से विरासत संरक्षण का उद्देश्य किस हद तक पूरा होगा।

हालांकि, प्रवेश द्वार की परियोजना, उसकी स्वीकृत लागत और महल के संरक्षण के लिए संबंधित विभागों की ओर से किए गए प्रयासों की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

स्थानीय लोगों ने जताई चिंता

स्थानीय निवासी राजकुमार लाक्षाकार का कहना है कि पुराना तहसीलदार कार्यालय नगर की महिला शासिका ताई बाई की वीरता की याद दिलाता रहा है। यह भवन लोगों के बीच उनके इतिहास और योगदान को जीवित रखने का माध्यम था। उनके अनुसार, भवन के लगातार जर्जर होने और अब ढह जाने से नई पीढ़ी का इस ऐतिहासिक विरासत से जुड़ाव कमजोर हो सकता है।

वहीं, नरेश शिवहरे ने कहा कि नई पीढ़ी वर्तमान के साथ-साथ इतिहास से भी प्रेरणा लेती है। ऐसे में ताई बाई से जुड़े ऐतिहासिक भवन का उपेक्षा के कारण खंडहर में बदलना दुखद और चिंताजनक है। उन्होंने विरासत के संरक्षण को जरूरी बताया।

संरक्षण और जिम्मेदारी तय करने की जरूरत

महल का ढहना जालौन की ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण को लेकर गंभीर चिंता का विषय है। अब जरूरी है कि संबंधित विभाग भवन के ऐतिहासिक महत्व, स्वामित्व और संरक्षण की स्थिति की जानकारी सार्वजनिक करें। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया जाए कि इमारत को बचाने के लिए पहले क्या कदम उठाए गए थे और आगे शेष संरचना तथा उससे जुड़ी ऐतिहासिक सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए क्या योजना है।

✓ संपादकीय जाँच: प्रूफ़रीडिंग DP Singh · प्रकाशन की मंज़ूरी DP Singh · हमारे मानक

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