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अन्नामलाई ने CJP प्रदर्शन पर केंद्र को घेरा, पूछा—सवाल उठाना क्या अब देशविरोध है?

तमिलनाडु BJP के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने CJP प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई, जंतर-मंतर की स्थिति और दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के तरीकों से असहमति के बावजूद विरोध का अधिकार बना रहना चाहिए।

अन्नामलाई ने CJP प्रदर्शन पर केंद्र को घेरा, पूछा—सवाल उठाना क्या अब देशविरोध है?

किसी सरकार की आलोचना करना क्या देश के खिलाफ जाना है? और अगर कोई प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरता है, तो क्या उसे सिर्फ इसलिए गलत मान लिया जाना चाहिए क्योंकि उसकी बात सरकार को पसंद नहीं है? Cockroach Janta Party (CJP) के प्रदर्शन को लेकर अब यही सवाल राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं।

तमिलनाडु BJP के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व IPS अधिकारी के. अन्नामलाई ने इस मामले में केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि वे CJP के प्रदर्शन करने के तरीके से सहमत न हों, लेकिन किसी मुद्दे पर विरोध करने, बहस करने और अपनी बात रखने का अधिकार लोकतंत्र में सभी को है।

अन्नामलाई ने यह बातें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखीं। गौरतलब है कि उन्होंने जून में BJP की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उनके बयान में सिर्फ CJP का समर्थन नहीं, बल्कि सरकार की जवाबदेही, पुलिस की भूमिका और विरोध के अधिकार से जुड़े कई सवाल भी शामिल हैं।

अन्नामलाई ने 2011 की घटना क्यों याद दिलाई?

अपनी बात रखते हुए अन्नामलाई ने साल 2011 में दिल्ली में हुए भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई का जिक्र किया। उन्होंने उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी के एक बयान को याद किया, जिसमें मोदी ने केंद्र सरकार की कार्रवाई पर नाराजगी जताई थी।

अन्नामलाई का कहना है कि उस समय विरोध करने वालों के समर्थन में आवाज उठाना गलत नहीं था। ऐसे में आज जब प्रदर्शनकारियों की हिरासत और उनके साथ अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं, तो उन सवालों का जवाब भी दिया जाना चाहिए।

उनका तर्क है कि लोकतंत्र में सरकार से असहमत होने या किसी कार्रवाई की आलोचना करने पर लोगों को विदेशी एजेंट या देशविरोधी कहना उचित नहीं है। सरकार के फैसलों पर सवाल उठाना और उन पर जवाब मांगना भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।

जंतर-मंतर को लेकर क्या सवाल उठाए गए?

अन्नामलाई ने दिल्ली के जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित सूची से हटाए जाने पर सवाल किया। उनके मुताबिक, CJP ने प्रदर्शन की अनुमति मांगने के लिए पत्र दिया था। ऐसे में उन्होंने पूछा कि गृह मंत्रालय के आदेश के तहत जंतर-मंतर की स्थिति बदलने का फैसला किस आधार पर लिया गया।

यह सवाल इसलिए अहम है, क्योंकि जंतर-मंतर लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों के लिए एक प्रमुख स्थान रहा है। यहां प्रदर्शन की अनुमति, सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के बीच संतुलन जरूरी है।

हालांकि, जंतर-मंतर की अधिसूचना में बदलाव किस कानूनी और प्रशासनिक आधार पर किया गया, इसे स्पष्ट रूप से समझने के लिए संबंधित सरकारी आदेश और उसके नियमों को देखना जरूरी है। अन्नामलाई ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाया है, लेकिन उनके सवाल अपने आप में किसी कानूनी उल्लंघन का अंतिम प्रमाण नहीं हैं।

दिल्ली पुलिस और विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की भूमिका पर सवाल

अन्नामलाई ने निवारक हिरासत की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि दिल्ली पुलिस के सहायक आयुक्त स्तर के अधिकारी को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की भूमिका में ऐसे मामलों पर फैसला करने की कितनी शक्ति होनी चाहिए।

इसे सरल भाषा में समझें। निवारक कार्रवाई का उद्देश्य किसी संभावित अशांति को रोकना होता है। इसमें कुछ परिस्थितियों में प्रशासन व्यक्ति से शांति बनाए रखने के लिए बांड भरने को कह सकता है। लेकिन ऐसी कार्रवाई भी कानून और तय प्रक्रिया के दायरे में होनी चाहिए।

अन्नामलाई ने यह भी सवाल किया कि जब दिल्ली पुलिस ही प्रदर्शनकारियों के खिलाफ शिकायतकर्ता हो, तो पुलिस अधिकारी की दूसरी भूमिका में निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित की जाती है। उन्होंने 19 अक्टूबर की सुनवाई का हवाला देते हुए पूछा कि विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट सुनवाई में देर से क्यों पहुंचे और फिर अपनी जान को खतरा बताते हुए मामले से अलग क्यों हुए।

ये अन्नामलाई की ओर से उठाए गए सवाल हैं। इनका अंतिम जवाब संबंधित रिकॉर्ड, आदेशों और प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी से ही स्पष्ट हो सकेगा।

आठ जमानतदारों को क्यों खारिज किया गया?

अन्नामलाई ने CJP के प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामले में आठ जमानतदारों को अस्वीकार किए जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि जमानतदार के रूप में आए व्यक्ति से पूछताछ क्यों की गई और किन आधारों पर जमानत की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।

यहां जमानतदार का मतलब उस व्यक्ति से है, जो किसी आरोपी के लिए कानूनी शर्तों के तहत जिम्मेदारी लेने या निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के लिए सामने आता है। जमानत या रिहाई से जुड़ा फैसला संबंधित कानून और मामले की परिस्थितियों के अनुसार लिया जाता है।

अन्नामलाई का सवाल यह है कि क्या इस प्रक्रिया में सभी कानूनी नियमों का पालन किया गया? इस सवाल का जवाब देने के लिए संबंधित आदेशों और दस्तावेजों की जांच जरूरी है।

पेलेट गन के इस्तेमाल पर भी जवाब मांगा

अन्नामलाई ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित तौर पर पेलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या इस मामले में कोई कार्रवाई हुई और क्या पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान तय मानक संचालन प्रक्रियाओं का पालन किया।

पेलेट गन से निकलने वाले छोटे छर्रे गंभीर चोट पहुंचा सकते हैं, खासकर आंखों और चेहरे पर। इसलिए भीड़ को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले किसी भी उपकरण के उपयोग पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

हालांकि, पेलेट गन के इस्तेमाल और जिम्मेदार कर्मियों की भूमिका के बारे में अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध सबूतों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए। अन्नामलाई ने इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है।

BJP के प्रदर्शन और CJP को मिल रही चर्चा पर क्या बोले?

अन्नामलाई ने दशहरा समारोह के दौरान कॉकरोच के पुतले के दहन का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि इस आयोजन का नेतृत्व BJP विधायक अशोक गोयल ने किया था। इसके बाद उन्होंने सवाल उठाया कि क्या BJP CJP का विरोध कर रही है या अनजाने में उसे राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार दे रही है।

उनकी टिप्पणी का आशय यह था कि किसी संगठन का विरोध करते हुए भी राजनीतिक दल उसके नाम और गतिविधियों को अधिक चर्चा में ला सकते हैं। हालांकि, यह अन्नामलाई की राजनीतिक व्याख्या है, कोई स्थापित तथ्य नहीं कि इस आयोजन का उद्देश्य CJP को प्रचार देना था।

उन्होंने कांग्रेस के SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े विरोध पर भी सवाल उठाए। साथ ही कहा कि अगर किसी संस्था के कुछ व्यक्तियों से गलती होती है, तो उसके लिए पूरी लोकतांत्रिक संस्था को गलत ठहराना उचित नहीं है।

इस तरह अन्नामलाई ने केवल केंद्र सरकार की आलोचना नहीं की, बल्कि विपक्ष और CJP के तरीकों पर भी अपनी असहमति का जिक्र किया।

हर विरोध को देशविरोधी कहना सही है?

अन्नामलाई ने अपने बयान में उस राजनीतिक भाषा पर भी आपत्ति जताई, जिसमें सरकार के खिलाफ होने वाले प्रदर्शनों को विदेशी ताकतों से प्रेरित या देशविरोधी बताया जाता है।

उनका कहना है कि अगर किसी प्रदर्शन के पीछे विदेशी फंडिंग या किसी गैरकानूनी गतिविधि का संदेह है, तो संबंधित एजेंसियों को जांच करनी चाहिए। लेकिन बिना ठोस सबूत के हर विरोध को देशविरोधी बताना सही नहीं है।

लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना, किसी नीति का विरोध करना और प्रशासन से जवाब मांगना नागरिकों के अधिकारों का हिस्सा है। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों की भी जिम्मेदारी है कि वे कानून का पालन करें और हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से बचें।

इस पूरे मामले का असली सवाल यही है कि कानून का पालन कराने की जिम्मेदारी निभाते समय क्या नागरिकों के अधिकारों और निष्पक्ष प्रक्रिया का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है?

अन्नामलाई ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह सवालों का जवाब दे, न कि आलोचना करने वालों को नाम देकर बहस से दूर कर दे। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब CJP के प्रदर्शन और उसके नेताओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस तेज है।

अब यह देखना अहम होगा कि जंतर-मंतर की अधिसूचना, हिरासत की प्रक्रिया, जमानतदारों को खारिज करने और पेलेट गन के कथित इस्तेमाल पर संबंधित अधिकारी क्या जवाब देते हैं। क्योंकि लोकतंत्र में केवल सवाल पूछना ही नहीं, बल्कि तथ्यों के आधार पर उनका जवाब देना भी उतना ही जरूरी है।

✓ संपादकीय जाँच: प्रूफ़रीडिंग DP Singh · प्रकाशन की मंज़ूरी DP Singh · हमारे मानक

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