दिल्ली में INDIA गठबंधन की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली, खुली बस में सवार होकर रामलीला मैदान पहुंचे विपक्षी नेता
राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, प्रियंका गांधी और तेजस्वी यादव समेत विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे के आवास से खुली बस में सवार होकर रामलीला मैदान के लिए रवाना हुए। रैली में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित चुनावी अनियमितताओं के विरोध में INDIA गठबंधन ने रविवार, 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली आयोजित की। रैली में शामिल होने के लिए विपक्षी दलों के कई वरिष्ठ नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर एकत्र हुए। इसके बाद नेता खुली बस में सवार होकर रामलीला मैदान के लिए रवाना हुए। विपक्षी गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को भी इस प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा बनाया।
खुली बस में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नेताओं ने मल्लिकार्जुन खरगे के आवास से मिंटो रोड की ओर प्रस्थान किया। वहां से रामलीला मैदान तक मार्च किया गया।
विपक्षी दलों के नेताओं ने दिखाई एकजुटता
रैली में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए खरगे के आवास पहुंचीं।
इसके अलावा माकपा महासचिव एमए बेबी, भाकपा महासचिव डी. राजा और भाकपा-माले (लिबरेशन) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य सहित विभिन्न विपक्षी दलों के नेता भी इस आयोजन से जुड़े।
खुली बस में नेताओं के रवाना होने के दौरान सड़क के आसपास बड़ी संख्या में समर्थक और पार्टी कार्यकर्ता मौजूद दिखाई दिए। समर्थकों ने अपने-अपने दलों के झंडे और बैनर लेकर नेताओं का स्वागत किया। राजधानी के अलग-अलग इलाकों से भी INDIA गठबंधन के कार्यकर्ताओं के रामलीला मैदान पहुंचने की जानकारी सामने आई।
SIR और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा
विपक्षी गठबंधन ने रैली के जरिए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची में नाम हटाए जाने की प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। गठबंधन ने निर्वाचन आयोग से इस प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कथित अनियमितताओं पर जवाब देने की मांग की।
रैली का एक प्रमुख उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को उठाना भी रहा। विपक्षी दलों का कहना है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाताओं के मतदान के अधिकारों की रक्षा लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी है।
हालांकि, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और चुनावी अनियमितताओं को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित आधिकारिक आंकड़ों और निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड के आधार पर ही की जा सकती है।
सिद्धारमैया बोले- मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा मांगने आया हूं
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने रैली में शामिल होने के उद्देश्य पर कहा कि वह मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करने आए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा देंगे।
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सांसद ईटी मोहम्मद बशीर ने रैली को लेकर विश्वास जताते हुए कहा कि यह आयोजन अच्छा है और उन्हें उम्मीद है कि विपक्ष अपने उद्देश्य में सफल होगा।
समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने इसे अभूतपूर्व रैली बताते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा झूठ बोलती है और उसके दावों पर भरोसा करना मुश्किल है।
समर्थकों की भीड़ के बीच आगे बढ़ी खुली बस
खरगे के आवास से खुली बस में रवाना हुए विपक्षी नेताओं के आसपास बड़ी संख्या में समर्थक जुटे। बस के साथ-साथ पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक भी आगे बढ़ते दिखाई दिए। रैली में शामिल होने के लिए विभिन्न दलों के कार्यकर्ता राजधानी के अलग-अलग हिस्सों से रामलीला मैदान पहुंचे।
इस दौरान राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी और तेजस्वी यादव सहित कई नेताओं की मौजूदगी ने कार्यक्रम को विपक्षी गठबंधन की साझा राजनीतिक गतिविधि के रूप में सामने रखा।
‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के जरिए साझा राजनीतिक संदेश
INDIA गठबंधन की इस रैली में अलग-अलग राजनीतिक दलों ने मतदाता सूची की पारदर्शिता, चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और मताधिकार की सुरक्षा जैसे मुद्दों को साझा मंच पर उठाया।
विपक्षी दलों ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र का बुनियादी आधार है और निर्वाचन आयोग को इस अधिकार की रक्षा के लिए निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए। वहीं, रैली के दौरान उठाए गए आरोपों और मांगों पर निर्वाचन आयोग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद विवाद के विभिन्न पहलुओं की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
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