सोनम वांगचुक बोले- शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाने के बजाय जनता की बात सुनें सरकारें
मुंबई में IPF फेस्टिवल के दौरान सोनम वांगचुक ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन सरकारों के लिए जनता की समस्याएं समझने का जरिया हैं। उन्होंने चेताया कि लोगों को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला, तो हालात बिगड़ सकते हैं।
लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के अधिकार को लेकर सरकारों को चेताया है। उन्होंने कहा कि अगर लोगों को अपनी समस्याएं उठाने और अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया, तो हालात बिगड़ सकते हैं।
मुंबई में आयोजित IPF फेस्टिवल में बोलते हुए वांगचुक ने नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में हुए विरोध प्रदर्शनों का उदाहरण दिया। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन सरकार के लिए फीडबैक की तरह होते हैं। इनके जरिए सरकार को पता चलता है कि जनता किन मुद्दों को लेकर परेशान है और कहां सुधार की जरूरत है।
प्रदर्शन सरकार के लिए फीडबैक क्यों हैं?
वांगचुक के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए। जब लोगों को अपनी समस्याएं शांतिपूर्ण तरीके से रखने का मौका मिलता है, तो सरकार को जनता की नाराजगी और जरूरतों को समझने में मदद मिलती है।
उन्होंने कहा कि कई देशों में लोगों को संसद के आसपास प्रदर्शन करने की अनुमति है। ब्रिटेन, नॉर्वे और स्वीडन का उदाहरण देते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि भारत में लोगों को अपनी बात रखने के लिए तय जगहों तक ही सीमित क्यों रहना चाहिए।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति पर उठाए सवाल
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, वांगचुक ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की व्यवस्था का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध के लिए अनुमति की प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से जटिल नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने प्रदर्शन के दौरान अर्धसैनिक बलों की तैनाती पर भी दोबारा विचार करने की जरूरत बताई। उनके बयान का मुख्य संदेश था कि विरोध करने वाले लोगों को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में देखने के बजाय उनकी शिकायतों को समझना जरूरी है।
लद्दाख में स्थानीय लोगों की भागीदारी की मांग
वांगचुक ने लद्दाख के शासन में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि स्थानीय लोगों को अपने क्षेत्र से जुड़े फैसलों में अधिक भूमिका मिलनी चाहिए।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई और जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति को लेकर बहस जारी है। इस बयान ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार, सरकार की जवाबदेही और जनता की बात सुने जाने की जरूरत पर फिर से चर्चा शुरू कर दी है।
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