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यूपी MLC चुनाव में भाजपा को झटका, सपा ने 5 सीटें जीतकर बढ़ाई ताकत

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 स्नातक और शिक्षक सीटों के चुनाव में भाजपा ने 6 और समाजवादी पार्टी ने 5 सीटें जीतीं। वाराणसी और लखनऊ में सपा के प्रदर्शन को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अहम माना जा रहा है।

यूपी MLC चुनाव में भाजपा को झटका, सपा ने 5 सीटें जीतकर बढ़ाई ताकत

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद की 11 सीटों के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। इन चुनावों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 6 सीटें जीतीं, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) के खाते में 5 सीटें आईं। भाजपा अपनी पिछली सीटों की संख्या बरकरार रखने में सफल रही, लेकिन समाजवादी पार्टी ने अपना प्रदर्शन बेहतर करते हुए राजनीतिक मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।

इन चुनावों में सबसे ज्यादा चर्चा वाराणसी और लखनऊ की रही। वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकसभा क्षेत्र है। यहां समाजवादी पार्टी ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र पर अपनी पकड़ बनाए रखी और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भी जीत हासिल की। लखनऊ की स्नातक सीट पर भी सपा को सफलता मिली।

हालांकि, इन नतीजों को पूरे उत्तर प्रदेश के मतदाताओं की पसंद का सीधा संकेत नहीं माना जा सकता, क्योंकि इन सीटों पर आम मतदाता नहीं, बल्कि पंजीकृत स्नातक और शिक्षक ही मतदान करते हैं।

भाजपा और सपा के बीच क्या रहा मुकाबला?

विधान परिषद की जिन 11 सीटों पर चुनाव हुआ, उनमें 5 स्नातक और 6 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे। मतदान 23 अक्टूबर को हुआ और मतगणना 27 अक्टूबर से शुरू हुई। कुछ सीटों पर गिनती पूरी होने में समय लगा।

अंतिम नतीजों में भाजपा को 6 सीटें मिलीं, जबकि सपा ने 5 सीटें जीतीं। पिछले चुनाव में भाजपा के पास 6, सपा के पास 3 और निर्दलीय उम्मीदवारों के पास 2 सीटें थीं।

इस बार सपा का आंकड़ा 3 से बढ़कर 5 हो गया। भाजपा ने कुल सीटों की संख्या तो बरकरार रखी, लेकिन उसे कुछ ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों में हार का सामना करना पड़ा, जहां मुकाबला उसके लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था।

वाराणसी में सपा की जीत क्यों चर्चा में है?

वाराणसी में सपा के प्रदर्शन को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। पार्टी ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में लाल बिहारी यादव को फिर से जीत दिलाई। इसके अलावा, वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भी सपा के उम्मीदवार को सफलता मिली।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकसभा क्षेत्र होने के कारण वाराणसी के नतीजों पर राजनीतिक दलों की खास नजर रहती है। ऐसे में यहां सपा की जीत को भाजपा के लिए राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि विधान परिषद की इन सीटों का मतदाता वर्ग सीमित है। इसलिए वाराणसी के इन नतीजों से यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि पूरे लोकसभा क्षेत्र या जिले में मतदाताओं का रुझान पूरी तरह बदल गया है।

स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र क्या होते हैं?

इन चुनावों को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक सीटें आम विधानसभा सीटों से अलग होती हैं।

स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: यहां वही लोग मतदान कर सकते हैं, जो निर्धारित योग्यता पूरी करते हों और संबंधित मतदाता सूची में पंजीकृत हों। आम तौर पर इसके लिए मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक होने और तय अवधि की शर्तें लागू होती हैं।

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: इन सीटों पर निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले और मतदाता सूची में पंजीकृत शिक्षक मतदान करते हैं। इसके लिए शिक्षण अनुभव और संबंधित संस्थान की पात्रता जैसे नियम लागू होते हैं।

इसलिए इन सीटों के नतीजे मुख्य रूप से शिक्षित मतदाताओं और शिक्षकों के बीच राजनीतिक दलों की स्थिति का संकेत देते हैं। इन्हें विधानसभा चुनाव के नतीजों के बराबर मानना उचित नहीं होगा।

2027 के विधानसभा चुनाव पर क्या असर पड़ सकता है?

उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है। उससे पहले राजनीतिक दल संगठन को मजबूत करने, मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने और अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

विधान परिषद के इन चुनावों में सपा की पांच सीटों पर जीत पार्टी के लिए उत्साह बढ़ाने वाली है। खासकर वाराणसी और लखनऊ जैसे क्षेत्रों में प्रदर्शन से पार्टी को अपनी राजनीतिक रणनीति पर काम करने का अवसर मिलेगा।

दूसरी ओर, भाजपा के लिए यह जरूरी होगा कि वह उन क्षेत्रों में अपनी स्थिति की समीक्षा करे, जहां उसे हार मिली है। हालांकि, भाजपा का 6 सीटें जीतना भी बताता है कि पार्टी ने कई निर्वाचन क्षेत्रों में अपनी पकड़ बनाए रखी।

अब यह देखना होगा कि दोनों दल इन नतीजों से क्या सबक लेते हैं और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में उनका इस्तेमाल किस तरह करते हैं। असली मुकाबला विधानसभा चुनाव में होगा, जहां मतदाताओं का दायरा कहीं ज्यादा बड़ा होगा।

✓ संपादकीय जाँच: प्रूफ़रीडिंग DP Singh · प्रकाशन की मंज़ूरी DP Singh · हमारे मानक

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