36 रन पर ढेर होने के बाद घबरा गए थे अजिंक्य रहाणे, फिर ऑस्ट्रेलिया के सामने चली अपनी 'ब्लफ' की चाल
2020-21 में एडिलेड टेस्ट में भारत के 36 रन पर सिमटने के बाद अजिंक्य रहाणे पर कप्तानी की जिम्मेदारी आई। उन्होंने माना कि वह घबराए हुए थे, लेकिन टीम के सामने हिम्मत दिखाई और भारत ने सीरीज 2-1 से जीत ली।
क्रिकेट में कई बार मैच जीतने के लिए सिर्फ अच्छा खेलना ही काफी नहीं होता। मुश्किल समय में खुद पर भरोसा बनाए रखना और पूरी टीम का हौसला बढ़ाना भी उतना ही जरूरी होता है। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान अजिंक्य रहाणे ने ऑस्ट्रेलिया के अपने ऐतिहासिक दौरे से जुड़ा एक ऐसा ही किस्सा साझा किया है।
रहाणे ने बताया कि जब एडिलेड टेस्ट में भारतीय टीम सिर्फ 36 रन पर आउट हो गई थी, तब वह खुद भी घबराए हुए थे। इसके बाद विराट कोहली की जगह बाकी सीरीज में कप्तानी की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। हालात ऐसे थे कि चारों तरफ भारत की हार की चर्चा हो रही थी। लेकिन रहाणे ने टीम के सामने अपना आत्मविश्वास बनाए रखा। उन्होंने इसे ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों, मीडिया और अपने साथियों के सामने 'ब्लफ' यानी अपनी घबराहट छिपाकर मजबूत दिखने की कोशिश बताया।
आखिर एडिलेड टेस्ट में क्या हुआ था?
यह बात दिसंबर 2020 की है। भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर थी और दोनों देशों के बीच टेस्ट सीरीज खेली जा रही थी। एडिलेड में सीरीज का पहला टेस्ट मैच था। भारतीय टीम पहली पारी में बढ़त लेने के बाद दूसरी पारी में बुरी तरह लड़खड़ा गई।
भारत की पूरी टीम सिर्फ 36 रन पर आउट हो गई। यह टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम का अब तक का सबसे कम स्कोर है। ऑस्ट्रेलिया ने यह मैच आठ विकेट से जीत लिया और सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली।
इस हार ने भारतीय टीम को बड़ा झटका दिया। आलोचना शुरू हो गई और कई लोग मानने लगे कि अब ऑस्ट्रेलिया यह सीरीज आसानी से जीत जाएगा। उस समय यह भी चर्चा होने लगी थी कि भारत 0-4 से सीरीज हार सकता है।
विराट कोहली के जाने के बाद रहाणे पर आई जिम्मेदारी
एडिलेड टेस्ट के बाद विराट कोहली निजी कारणों से भारत लौट गए। इसके बाद बाकी तीन टेस्ट मैचों में भारतीय टीम की कप्तानी अजिंक्य रहाणे ने संभाली।
यह कोई सामान्य स्थिति नहीं थी। टीम पहला मैच बुरी तरह हार चुकी थी और अब उसे अपने नियमित कप्तान के बिना मैदान पर उतरना था। ऊपर से खिलाड़ियों के चोटिल होने का सिलसिला भी शुरू हो गया था।
रहाणे ने हाल ही में मुंबई में 'बियॉन्ड बाउंड्रीज' नाम के एक कार्यक्रम में इस दौर को याद किया। उन्होंने बताया कि वह अंदर से घबराए हुए थे, लेकिन उन्हें पता था कि अगर कप्तान ही परेशान दिखाई देगा, तो बाकी खिलाड़ियों का आत्मविश्वास भी कमजोर पड़ सकता है।
रहाणे ने किस 'ब्लफ' की बात की?
रहाणे के मुताबिक, उन्होंने अपने साथियों, ऑस्ट्रेलियाई टीम और मीडिया के सामने ऐसा दिखाया कि वह पूरी तरह आत्मविश्वास से भरे हुए हैं। उन्होंने माना कि वह वास्तव में घबराए थे, लेकिन एक खिलाड़ी और कप्तान के तौर पर उन्हें अपनी भावनाओं पर काबू रखना था।
यहां 'ब्लफ' का मतलब किसी मैच में गलत जानकारी देने या नियम तोड़ने से नहीं है। रहाणे इस शब्द का इस्तेमाल अपनी घबराहट छिपाकर मजबूत दिखने के लिए कर रहे थे।
उनका मानना था कि जब बाहर से लोग भारत की हार की भविष्यवाणी कर रहे हों, तब टीम को अपने खेल पर ध्यान देना चाहिए। कप्तान के तौर पर उनका काम सिर्फ रणनीति बनाना नहीं था, बल्कि खिलाड़ियों को यह भरोसा दिलाना भी था कि सीरीज अभी खत्म नहीं हुई है।
चोटों से परेशान थी टीम, फिर भी नहीं टूटा हौसला
इस दौरे पर भारतीय टीम को एक के बाद एक झटके लगे। कई प्रमुख खिलाड़ी चोटिल हो गए। इसके बावजूद टीम ने हार नहीं मानी।
रहाणे ने बताया कि उन्होंने अपने साथियों से कहा कि भारत के लिए खेलना अपने आप में बड़ी बात है। देश में ऐसे कई खिलाड़ी हैं जो भारतीय टीम की जर्सी पहनने का सपना देखते हैं, लेकिन उन्हें यह मौका नहीं मिल पाता।
उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि वे उन लोगों के लिए भी खेलें, जिन्हें भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर नहीं मिला और जो भविष्य में टीम में आने का सपना देख रहे हैं।
रहाणे का संदेश साफ था—मैच के नतीजे की चिंता करने के बजाय एक-दूसरे के लिए खेलो, अपने खेल का आनंद लो और मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ दो। उन्होंने टीम को यह भरोसा भी दिया कि नतीजा चाहे जो हो, उसकी जिम्मेदारी वह लेने के लिए तैयार हैं।
फिर भारत ने कैसे पलट दी बाजी?
एडिलेड की हार के बाद भारतीय टीम ने मेलबर्न में खेले गए दूसरे टेस्ट में शानदार वापसी की। रहाणे ने इस मैच में 112 रन की शानदार पारी खेली और भारत ने आठ विकेट से जीत दर्ज कर सीरीज 1-1 से बराबर कर दी।
इसके बाद सिडनी में तीसरा टेस्ट ड्रॉ रहा। इस मैच में भी भारतीय खिलाड़ियों ने संघर्ष करते हुए ऑस्ट्रेलिया को जीत से दूर रखा।
सीरीज का आखिरी टेस्ट ब्रिस्बेन के गाबा मैदान पर खेला गया। यहां भारत के कई प्रमुख खिलाड़ी चोटों के कारण उपलब्ध नहीं थे। इसके बावजूद टीम ने 328 रन का लक्ष्य हासिल करते हुए तीन विकेट से ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
यह जीत इसलिए भी खास थी क्योंकि ऑस्ट्रेलिया इस मैदान पर करीब 32 साल से कोई टेस्ट मैच नहीं हारा था। भारत ने न सिर्फ यह सिलसिला तोड़ा, बल्कि सीरीज भी 2-1 से अपने नाम कर ली।
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