वैभव सूर्यवंशी को अभी कप्तानी देना जल्दबाजी होगी: सचिन तेंदुलकर
15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन का उप-कप्तान बनाए जाने पर सचिन तेंदुलकर ने सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि इतनी कम उम्र में नेतृत्व की जिम्मेदारी देने से पहले खिलाड़ी को लाल गेंद के क्रिकेट का पर्याप्त अनुभव मिलना चाहिए।
भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को कम उम्र में नेतृत्व की जिम्मेदारी दिए जाने पर अपनी राय रखी है। 15 वर्षीय वैभव को 2026 की दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन का उप-कप्तान बनाया गया था। इस फैसले पर रेडिट के सवाल-जवाब सत्र में प्रतिक्रिया देते हुए तेंदुलकर ने कहा कि यह जिम्मेदारी देने के लिए अभी जल्दबाजी हुई है। उनके मुताबिक, वैभव को पहले लाल गेंद से अधिक मैच खेलने चाहिए और उसके बाद ही नेतृत्व की अगली जिम्मेदारी पर विचार करना चाहिए।
सचिन तेंदुलकर ने क्या कहा?
3 नवंबर को आयोजित रेडिट के 'Ask Me Anything' (AMA) सत्र में सचिन तेंदुलकर से वैभव सूर्यवंशी को 15 साल की उम्र में कप्तानी की जिम्मेदारी दिए जाने के बारे में सवाल पूछा गया। इसके जवाब में तेंदुलकर ने लिखा:
"मुझे लगता है कि अभी उनके लिए दलीप ट्रॉफी में उप-कप्तान बनना बहुत जल्दी होगा। हमें उन्हें लाल गेंद से ज्यादा मैच खेलने देना चाहिए और उसके बाद एक-एक कदम आगे बढ़ना चाहिए।"
तेंदुलकर की प्रतिक्रिया का कहना था कि युवा खिलाड़ी की प्रतिभा और कम उम्र में मिली सफलता को देखते हुए उसे तेजी से नेतृत्व की जिम्मेदारी देने के बजाय खेल के लंबे प्रारूप में अनुभव हासिल करने का समय दिया जाना चाहिए।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि तेंदुलकर ने वैभव की बल्लेबाजी क्षमता पर सवाल नहीं उठाया। उनकी टिप्पणी विशेष रूप से नेतृत्व की जिम्मेदारी और लाल गेंद के क्रिकेट में अनुभव को लेकर थी।
15 साल की उम्र में ईस्ट जोन के उप-कप्तान बने वैभव
वैभव सूर्यवंशी को 2026 की दलीप ट्रॉफी के लिए ईस्ट जोन की टीम में शामिल किया गया था। टीम की कप्तानी विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन को सौंपी गई, जबकि वैभव को उप-कप्तान बनाया गया।
यह फैसला इसलिए चर्चा में आया क्योंकि वैभव की उम्र केवल 15 वर्ष थी और घरेलू प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनका अनुभव अभी सीमित था। टीम में उनसे अधिक अनुभवी खिलाड़ी भी मौजूद थे।
दलीप ट्रॉफी जैसे घरेलू प्रथम श्रेणी टूर्नामेंट में उप-कप्तान की भूमिका केवल मैदान पर टॉस या रणनीति तक सीमित नहीं होती। इस जिम्मेदारी में कप्तान की सहायता करना, गेंदबाजों और फील्डरों के साथ संवाद करना तथा मैच की परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने में सहयोग करना शामिल होता है।
ईशान किशन की गैरमौजूदगी में संभाली कप्तानी
दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल मुकाबले में ईशान किशन के चोटिल होने के बाद वैभव को कुछ समय के लिए कप्तानी की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी। इस दौरान उनके निर्णयों और DRS लेने को लेकर भी चर्चा हुई।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, वैभव ने सेंट्रल जोन के खिलाफ सेमीफाइनल में 42 गेंदों पर अर्धशतक पूरा किया था। वह 81 गेंदों पर 92 रन बनाकर आउट हुए। इस पारी के साथ वह दलीप ट्रॉफी के इतिहास में अर्धशतक लगाने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने। उस समय उनकी उम्र 15 साल और 157 दिन थी।
इससे पहले यह रिकॉर्ड 1969 में 16 साल और 23 दिन की उम्र में अर्धशतक बनाने वाले लक्ष्मण सिंह के नाम था।
वैभव का यह प्रदर्शन इसलिए भी उल्लेखनीय रहा क्योंकि उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट के अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण प्रारूप में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी की क्षमता दिखाई। हालांकि, एक अच्छी पारी को लंबे प्रारूप में निरंतर सफलता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। यही वह पहलू है जिस पर तेंदुलकर ने अधिक अनुभव हासिल करने की बात कही है।
छोटे प्रारूप में शानदार प्रदर्शन, लाल गेंद में अभी अनुभव की जरूरत
वैभव सूर्यवंशी ने कम उम्र में ही क्रिकेट के छोटे प्रारूपों में अपनी पहचान बनाई है। आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेलते हुए उन्होंने तेज बल्लेबाजी से दर्शकों और क्रिकेट विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया।
इंडियन एक्सप्रेस की 1 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, वैभव ने 2025 के आईपीएल में सात पारियों में 252 रन बनाए थे। इसमें गुजरात टाइटंस के खिलाफ 35 गेंदों पर लगाया गया शतक भी शामिल था। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के आईपीएल सीजन में उन्होंने 16 मैचों में 776 रन बनाए और टूर्नामेंट के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे।
उनकी उपलब्धियां केवल आईपीएल तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2026 में इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में टी20 अंतरराष्ट्रीय पदार्पण करते हुए वह भारत के लिए खेलने वाले सबसे युवा पुरुष क्रिकेटर बने।
हालांकि, टी20 और प्रथम श्रेणी क्रिकेट की चुनौतियां अलग होती हैं। टी20 में तेजी से रन बनाने, सीमित ओवरों में रणनीति बनाने और कम समय में मैच का रुख बदलने पर जोर होता है। वहीं लाल गेंद के क्रिकेट में बल्लेबाज को लंबे समय तक एकाग्रता बनाए रखनी होती है। पिच और गेंद की बदलती परिस्थितियों के साथ तालमेल बैठाना, तकनीकी अनुशासन और धैर्य भी जरूरी होते हैं।
दलीप ट्रॉफी में बनाया रिकॉर्ड -
वैभव ने दलीप ट्रॉफी 2026 के सेमीफाइनल में 92 रन की पारी खेलकर अपनी प्रतिभा का एक और उदाहरण पेश किया। वह शतक से केवल आठ रन दूर रह गए थे। इस पारी ने उनके लाल गेंद के क्रिकेट में संभावित विकास की ओर भी ध्यान आकर्षित किया।
रिपोर्ट के अनुसार, उस पारी से पहले वैभव ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 13 पारियों में 215 रन बनाए थे। सेमीफाइनल की 92 रन की पारी उनके प्रथम श्रेणी करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हुई।
यह आंकड़ा उनके अनुभव की सीमित अवधि को भी दिखाता है। तेंदुलकर का सुझाव है कि उन्हें इस प्रारूप में लगातार खेलने का अवसर दिया जाए, ताकि तकनीक, धैर्य और मैच परिस्थितियों को समझने की क्षमता विकसित हो सके।
पसंदीदा विदेशी बल्लेबाजों के नाम भी बताए -
रेडिट पर हुए इसी सवाल-जवाब सत्र में तेंदुलकर से मौजूदा समय के पसंदीदा गैर-भारतीय बल्लेबाजों के बारे में भी पूछा गया। उन्होंने इंग्लैंड के हैरी ब्रूक और जो रूट तथा ऑस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ का नाम लिया।
जो रूट के बारे में एक अन्य सवाल पर तेंदुलकर ने उनकी बल्लेबाजी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि रूट के पहले टेस्ट मैच से ही उन्हें लगा था कि वह आगे चलकर बड़ी उपलब्धियां हासिल करेंगे।
पिता से किए वादे का भी किया जिक्र -
इस AMA सत्र में तेंदुलकर ने अपने क्रिकेट करियर से जुड़े निजी अनुभव भी साझा किए। उनसे पूछा गया कि वह किस ऐसी बात पर गर्व महसूस करते हैं, जिसके बारे में लोग आमतौर पर कम चर्चा करते हैं।
जवाब में उन्होंने अपने बड़े भाई अजित तेंदुलकर के योगदान को याद किया। सचिन ने बताया कि उनके और अजित के बीच उन्हें सफल क्रिकेटर बनाने का सपना साझा था। अजित ने उन्हें क्रिकेट से परिचित कराया और कोच रमाकांत आचरेकर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एक अन्य सवाल में उनसे पूछा गया कि वह पान मसाला और जुए से जुड़े विज्ञापनों से क्यों दूर रहते हैं। तेंदुलकर ने इसका संक्षिप्त जवाब दिया—'पिता से किया एक वादा।'
वैभव सूर्यवंशी का क्रिकेट सफर -
बिहार के वैभव सूर्यवंशी ने बहुत कम उम्र में पेशेवर क्रिकेट में कदम रखा। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने 2024 में रणजी ट्रॉफी के जरिए वरिष्ठ स्तर के प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया था।
इसके बाद आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के लिए उनके प्रदर्शन ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। 2025 में गुजरात टाइटंस के खिलाफ 35 गेंदों में शतक लगाने के बाद वह चर्चा में आए। 2026 में भी उनका प्रदर्शन प्रभावशाली रहा।
उनकी तेजी से बढ़ती लोकप्रियता और कम उम्र में मिली उपलब्धियों के कारण उनके भविष्य, भारतीय टीम में भूमिका और नेतृत्व क्षमता को लेकर चर्चा होती रही है।
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