एशियन पैरा गेम्स में भारत का जलवा, 62 पदकों के साथ पांचवें स्थान पर पहुंचा देश
जापान में चल रहे एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। 21 अक्टूबर तक भारत 14 स्वर्ण सहित 62 पदक जीतकर पदक तालिका में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है।
जापान में इन दिनों एशियन पैरा गेम्स 2026 चल रहे हैं और भारतीय खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। कोई दौड़ में अपनी ताकत दिखा रहा है, कोई ऊंची छलांग लगाकर गोल्ड जीत रहा है, तो कोई निशानेबाजी और तीरंदाजी में देश के लिए पदक हासिल कर रहा है।
21 अक्टूबर को प्रतियोगिता के तीसरे दिन का खेल समाप्त होने तक भारत कुल 62 पदक जीत चुका था। इनमें 14 स्वर्ण, 22 रजत और 26 कांस्य पदक शामिल थे। इस प्रदर्शन के साथ भारत पदक तालिका में पांचवें स्थान पर पहुंच गया।
एशियन पैरा गेम्स जापान के आइची-नागोया में 18 से 24 अक्टूबर तक आयोजित हो रहे हैं। इस प्रतियोगिता में एशिया की 45 राष्ट्रीय पैरालंपिक समितियों के खिलाड़ी 18 खेलों में हिस्सा ले रहे हैं। भारत 11 खेलों में चुनौती पेश कर रहा है।
भारत के लिए पैरा एथलेटिक्स बना सबसे बड़ा सहारा
भारत के पदकों में सबसे बड़ा योगदान पैरा एथलेटिक्स का रहा है। इस खेल में भारतीय खिलाड़ियों ने दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद और थ्रो जैसी स्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन किया है।
निशाद कुमार ने लंबी कूद और ऊंची कूद में दो स्वर्ण पदक जीतकर सबका ध्यान खींचा। सिमरन ने महिलाओं की 200 मीटर और 100 मीटर T12 स्पर्धाओं में गोल्ड जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की।
दीप्ति जीवनजी, रिंकू, प्रवीण कुमार, सचिन सरजेराव खिलारी, आयुष वर्मा, देवेंद्र कुमार और दिलीप गावित जैसे खिलाड़ियों ने भी स्वर्ण पदक जीतकर भारत की पदक संख्या बढ़ाई।
तीसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन खास तौर पर शानदार रहा। सचिन खिलारी ने पुरुषों की शॉट पुट F46 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता और खेलों का नया रिकॉर्ड भी बनाया। इसी स्पर्धा में मोहम्मद यासर ने रजत और प्रवीण ने कांस्य पदक जीता। यानी इस स्पर्धा के तीनों पदक भारतीय खिलाड़ियों के खाते में आए।
आसान भाषा में कहें तो भारत ने सिर्फ एक पदक नहीं जीता, बल्कि इस स्पर्धा के पूरे पोडियम पर कब्जा कर लिया।
निशानेबाजी में भी भारत ने की शानदार शुरुआत
भारत ने पदक जीतने की शुरुआत पैरा शूटिंग से की। महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग SH1 स्पर्धा में मोना अग्रवाल ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि अवनि लेखरा को रजत पदक मिला।
अवनि लेखरा पैरालंपिक चैंपियन हैं और उनसे इस प्रतियोगिता में भी काफी उम्मीदें थीं। मोना और अवनि का एक ही स्पर्धा में पहले और दूसरे स्थान पर रहना भारत के लिए बड़ी उपलब्धि रही।
यह प्रदर्शन बताता है कि भारतीय टीम की ताकत केवल दौड़ और मैदान तक सीमित नहीं है। निशानेबाजी जैसे खेलों में भी भारत लगातार बेहतर कर रहा है।
तीरंदाजी और पावरलिफ्टिंग में भी मिले पदक
तीरंदाजी में शीतल देवी और पायल नाग ने महिलाओं की कंपाउंड डबल्स स्पर्धा में रजत पदक जीता। दोनों ने फाइनल तक पहुंचकर भारत के खाते में एक और पदक जोड़ा।
पैरा पावरलिफ्टिंग में कस्तूरी राजामणि ने रजत पदक हासिल किया। इस तरह भारत को अलग-अलग खेलों से भी लगातार पदक मिल रहे हैं।
इस प्रदर्शन की खास बात यह है कि भारत की सफलता किसी एक खिलाड़ी या एक खेल पर निर्भर नहीं है। एथलेटिक्स में बड़ी संख्या में पदक मिलने के साथ शूटिंग, तीरंदाजी और पावरलिफ्टिंग में भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।
क्या भारत अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ पाएगा?
अब सवाल है कि क्या भारत इस बार अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ पाएगा?
2023 में चीन के हांगझोऊ में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में भारत ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया था। उस प्रतियोगिता में भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 111 पदक जीते थे, जिनमें 29 स्वर्ण, 31 रजत और 51 कांस्य पदक शामिल थे। भारत पदक तालिका में पांचवें स्थान पर रहा था।
इससे पहले 2018 में जकार्ता में भारत ने 72 पदक जीते थे। हांगझोऊ में पहली बार भारत ने एशियन पैरा गेम्स में 100 पदकों का आंकड़ा पार किया था।
इस बार प्रतियोगिता 24 अक्टूबर तक चलेगी। 21 अक्टूबर तक भारत 62 पदक जीत चुका था, इसलिए खिलाड़ियों के पास अपने खाते में और पदक जोड़ने का मौका है। हालांकि, पिछला रिकॉर्ड टूटेगा या नहीं, यह आने वाले मुकाबलों के नतीजों पर निर्भर करेगा।
भारत के लिए यह सफलता क्यों खास है?
पैरा खेलों में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों को कई बार शारीरिक चुनौतियों के साथ-साथ प्रशिक्षण, संसाधनों और प्रतियोगिताओं तक पहुंच जैसी मुश्किलों का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि उनकी मेहनत, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण का परिणाम है।
इन खिलाड़ियों की उपलब्धियां यह भी दिखाती हैं कि सही प्रशिक्षण, अवसर और समर्थन मिलने पर भारतीय खिलाड़ी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को चुनौती दे सकते हैं।
फिलहाल भारत पदक तालिका में पांचवें स्थान पर है और प्रतियोगिता के कुछ दिन अभी बाकी हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर रहेंगी कि भारतीय खिलाड़ी कितने और पदक जीतते हैं और क्या देश हांगझोऊ में बनाए गए अपने 111 पदकों के रिकॉर्ड के करीब पहुंच पाता है।
एक बात तय है—एशियन पैरा गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों ने एक बार फिर साबित किया है कि हौसले और मेहनत के दम पर बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना किया जा सकता है।
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