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पत्रकारिता का सवाल: क्या मीडिया सत्ता से सवाल पूछना भूल रहा है?

पत्रकारिता का सवाल: क्या मीडिया सत्ता से सवाल पूछना भूल रहा है?

लोकतंत्र में प्रेस को चौथा स्तंभ माना जाता है लेकिन बीते दिनों में प्रेस और पत्रकारिता ने जिस प्रकार से सूचना को प्रसारित करने का प्रयास किया है संभवतः उसकी सुचिता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या सूचना केवल महिमामंडन तक सीमित रह गया है या फिर जिसने भी सत्ता पक्ष से सवाल करने की जहमत उठाई उसे खत्म करने की साजिश तक पहुंच गई।

देश की प्रतिष्ठित मीडिया एबीपी न्यूज़ के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जिस प्रकार से नेहा सिंह राठौर के बारे में सूचना फैलाई गई और तत्काल क्षमा मांगी गई, यह कहीं ना कहीं इस बात पर विचार करने के लिए बाध्य करती है कि कहीं अब प्रेस केवल छद्मवेष में सत्ता के गलियारे में बैठे लोगों के लिए एक रक्षक दल के रूप में तो कार्य नहीं कर रही है ?

हर दिन जेन-जी की असहमति और प्रदर्शन को हिंसावादी प्रवृत्ति बताकर अखबार में विचारकों द्वारा अलग-अलग विचार दिये जा रहे हैं। उन्हें संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करने वाला करार दिया जा रहा है लेकिन क्या हम पल भर के लिए रूक कर इस बात पर विचार नहीं कर सकते हैं कि आखिर में ये युवा आज इतने असंतुष्ट और भ्रमित क्यों हो गए हैं क्या इसमें हमारी सरकार की कोई भूमिका नहीं है? यह राष्ट्र के लिए दुखद है कि इन युवाओं की ऊर्जा सकारात्मक कार्यों के बजाय पूर्ण रूप से नकारात्मक कार्यों की तरफ बढ़ रही है क्योंकि ये युवा जिन्हें हम देश का भविष्य कहते हैं वर्तमान में वह हताशा से भर चुके हैं उनके अंदर एक निराशा घर कर गई है कि इतना पढ़ने लिखने के बावजूद शायद कल वे आत्मनिर्भर ना हो पाएं।

जिस प्रकार से पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने परीक्षा व्यवस्था की गड़बड़ी देखी है उनके अंदर पूरी व्यवस्था के प्रति निराशा घर कर चुकी है क्या इतना के बावजूद हमारे सत्ता पक्ष में बैठे गणमान्य लोगों के लिए यह नैतिक जिम्मेदारी नहीं बनती है कि एक बार वे मीडिया से मुखातिब होकर इन युवाओं को संदेश दें। लेकिन हमारे लोकतंत्र की आवाज “मीडिया” लगातार इन्हें गुनहगार साबित करने पर आमादा है।

Dr. Kumari Anupama

Assistant Professor

✓ संपादकीय जाँच: प्रूफ़रीडिंग DP Singh · प्रकाशन की मंज़ूरी DP Singh · हमारे मानक

पाठकों की राय (5)

A
ANKITA NIRALA 2 सप्ताह पहले

Great and informative article for today's situation in Indian democracy

K
Km Sapana 2 सप्ताह पहले

Mam aapka Media ki fourth pillar of democracy ki bhumika me girabat par vishleshan ek dam sahi hai media ki loktantrik or netik jimmedari hai janta ke mudde government ke samksh rakna sarkar ko accountable banana lekin present bhartiya media sarkar ki chatukar bankar rahe gayi hai jisme sudhar ke liye and digital democracy nishpaksh media or patrakarita ko badane ki jarurat hai....

A
Arpan Singh 2 सप्ताह पहले

Jesa ki hum dekh pa rhe hai ki duniya me alag alag desh me Gen Z protest chal rhe hai.france , albaniya, Italy. Sabka reason same he hai.. Inflation, Corruption, unemployment,Corporatocracy etc. jinpar unbiased hokar media ko sawal puchna tha.. wo kam Activist kar rhe hai then they are facing consequences.. jab long time tak people's interest ko sideline kiya jayega to awaj uthna expected hai.. or jabab dena sarkar ki jimedari.

k
kripal singh 2 सप्ताह पहले

निसंदेह मीडिया के स्तम्भ की गिरती हुई साख पर आपकी टिप्पणी रोचक है... भारत मैं सत्ताधारी लोग इनोसेंट छात्रों को एंटी-नेशनल, अर्बन नक्सल की उपाधिया दें रहें हैं... और मीडिया सरकार की गोद मैं जाकर बैठी हुई है... दिल्ली मैं CJP के जंतर मंतर 2 के प्रोटेस्ट को रोकने के लिए दिल्ली को पुलिस छावनी मैं तब्दील कर दिया गया.. आर्टिकल 19 को सरकार ने दफ़न कर दिया है... ये सब होने के बावजूद भी मीडिया सरकार से सवाल नहीं कर रही हैं यही कारण हैं की भारतीय मीडिया की रैंक 157 हैं आउट ऑफ़ 180...

D
Deepika Rai 2 सप्ताह पहले

प्रासंगिक और जरूरी लेख 👍👌

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