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अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन की हार के बाद तेहरान में ट्रंप, वेंस और नेतन्याहू के बैनर जलाए गए

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगने के एक दिन बाद ईरान की राजधानी तेहरान में अमेरिका और इजरायल विरोधी प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने डोनाल्ड ट्रंप, जेडी वेंस और बेंजामिन नेतन्याहू की तस्वीरों वाले विशाल बैनर को आग के हवाले किया।

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन की हार के बाद तेहरान में ट्रंप, वेंस और नेतन्याहू के बैनर जलाए गए

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को मिडटर्म चुनाव में बड़ा राजनीतिक झटका लगने के बाद ईरान की राजधानी तेहरान में अमेरिका और इजरायल विरोधी प्रदर्शन देखने को मिले। बुधवार, 4 नवंबर 2026 को इंकलाब स्क्वायर में आयोजित रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तस्वीरों वाले विशाल बैनर को आग लगा दी।

एसोसिएटेड प्रेस (AP) की तस्वीरों के अनुसार, जलाए गए विशाल बैनर पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ की तस्वीर भी थी। प्रदर्शन के दौरान अमेरिकी और इजरायली झंडे भी जलाए गए। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारेबाजी की।

यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ, जब अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजों ने ट्रंप प्रशासन के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी थी। ईरान ने इन नतीजों को अपनी युद्ध संबंधी नीति के समर्थन में अमेरिकी जनता की नाराजगी के रूप में पेश किया।

1979 के अमेरिकी दूतावास संकट की वर्षगांठ पर हुई रैली

तेहरान में आयोजित यह प्रदर्शन केवल अमेरिकी चुनाव परिणामों से जुड़ा नहीं था। इसका एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संदर्भ भी है।

4 नवंबर 1979 को ईरान की इस्लामी क्रांति के बाद ईरानी छात्रों ने तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर लिया था। इस दौरान 52 अमेरिकी राजनयिकों और नागरिकों को बंधक बनाया गया था। यह बंधक संकट 444 दिनों तक चला और 1981 में समाप्त हुआ।

इस घटना ने अमेरिका और ईरान के संबंधों को गहरे संकट में डाल दिया। इसके बाद दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित नहीं हो सके।

इसी घटना की 47वीं वर्षगांठ पर हर साल ईरान में अमेरिका विरोधी रैलियां आयोजित की जाती हैं। इस वर्ष भी हजारों लोग तेहरान की सड़कों पर उतरे। रैली में अमेरिका और इजरायल के झंडे जलाए गए तथा ट्रंप और नेतन्याहू के पुतलों और कैरिकेचर का प्रदर्शन किया गया।

अमेरिकी चुनाव में रिपब्लिकन को बड़ा झटका

ईरान में प्रदर्शन का राजनीतिक संदर्भ समझने के लिए अमेरिका के मिडटर्म चुनाव के नतीजे भी महत्वपूर्ण हैं।

3 नवंबर 2026 को हुए अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में नियंत्रण हासिल किया। इससे ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा राजनीतिक नुकसान हुआ।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने भी स्वीकार किया कि ईरान के साथ युद्ध का उनकी पार्टी के चुनावी प्रदर्शन पर असर पड़ा। उन्होंने कहा कि ईरान का मुद्दा चुनावी नतीजों को प्रभावित करने वाले कारणों में शामिल था। हालांकि, उन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के अपने फैसले का बचाव भी किया।

चुनावी अभियान के दौरान डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने ईरान युद्ध के कारण बढ़ती ईंधन कीमतों और रोजमर्रा की वस्तुओं की महंगाई को मुद्दा बनाया था। युद्ध का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार पर भी पड़ा है।

ईरान ने चुनाव परिणामों को युद्ध विरोधी जनमत बताया

अमेरिकी चुनाव परिणाम आने के बाद ईरान के राजनीतिक नेतृत्व ने भी प्रतिक्रिया दी।

ईरान की संसद के अध्यक्ष और अमेरिका के साथ वार्ता में प्रमुख भूमिका निभाने वाले मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि अमेरिकी जनता ने 'युद्ध के खिलाफ मतदान' किया है और ईरान इस संदेश का समर्थन करता है।

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने भी अमेरिकी राजनीतिक बदलावों से ईरान के प्रति वाशिंगटन की नीति में बड़े परिवर्तन की उम्मीदों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के प्रति ईरान का रुख केवल वहां की राजनीतिक पार्टियों में बदलाव से नहीं बदलेगा।

तेहरान के मेयर अलीरेजा जकानी ने रैली को संबोधित करते हुए अमेरिका और इजरायल की हालिया राजनीतिक और सैन्य परिस्थितियों को उनकी हार बताया। ईरानी नेतृत्व ने चुनाव परिणामों को अपनी राजनीतिक स्थिति के समर्थन के तौर पर प्रस्तुत किया।

ईरान युद्ध ने बढ़ाया अमेरिका और इजरायल के साथ तनाव

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लंबे समय से चला आ रहा है, लेकिन 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर सैन्य हमले शुरू होने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई।

एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, इन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हुई और संघर्ष ने क्षेत्रीय सुरक्षा तथा वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हुई।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में शामिल है। यहां से सामान्य परिस्थितियों में वैश्विक समुद्री तेल और गैस व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग पर तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ जाती है।

इस संघर्ष के बीच अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत के प्रयास भी जारी रहे हैं। हालांकि, सैन्य टकराव और समुद्री व्यापार पर प्रतिबंधों के कारण क्षेत्र में तनाव बना हुआ है।

चुनावी हार के बाद भी तनाव कम होने के संकेत नहीं

अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी की हार और तेहरान में हुए विरोध प्रदर्शनों ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि ईरान युद्ध अब केवल सैन्य संघर्ष तक सीमित नहीं रहा। इसका असर अमेरिका की घरेलू राजनीति, वैश्विक ऊर्जा बाजार और मध्य पूर्व की कूटनीतिक परिस्थितियों पर भी पड़ रहा है।

हालांकि, तेहरान में बैनर जलाने की घटना को सीधे अमेरिकी चुनाव परिणामों की वजह से आयोजित प्रदर्शन कहना सही नहीं होगा, क्योंकि यह रैली 1979 के दूतावास संकट की वार्षिक वर्षगांठ पर आयोजित की गई थी। लेकिन चुनाव परिणामों और युद्ध विरोधी संदेशों ने इस वर्ष के प्रदर्शन को अतिरिक्त राजनीतिक महत्व जरूर दिया।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि अमेरिकी चुनावों के बाद ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ अपने सैन्य और कूटनीतिक रुख में कोई बदलाव करता है या नहीं। इसके साथ ही यह भी देखना होगा कि चुनाव में मिली हार के बाद अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेट्स की बढ़ी भूमिका ईरान नीति को किस तरह प्रभावित करती है।

✓ संपादकीय जाँच: प्रूफ़रीडिंग DP Singh · प्रकाशन की मंज़ूरी DP Singh · हमारे मानक

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