अमेरिकी चुनाव में डेमोक्रेट्स की बड़ी जीत, क्या ट्रंप के खिलाफ तीसरे महाभियोग की तैयारी?
2026 के मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में बहुमत हासिल कर लिया है। इससे ट्रंप प्रशासन पर संसदीय निगरानी और जांच का रास्ता मजबूत हुआ है, लेकिन तीसरे महाभियोग को लेकर पार्टी नेतृत्व ने अभी कोई फैसला नहीं किया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए 2026 के मिडटर्म चुनाव के नतीजे बड़ा राजनीतिक झटका साबित हुए हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट में बहुमत हासिल कर लिया है। इस जीत के बाद ट्रंप प्रशासन के फैसलों की जांच, सरकारी कामकाज पर निगरानी और राष्ट्रपति के खिलाफ संभावित महाभियोग की चर्चा तेज हो गई है।
हालांकि, डेमोक्रेटिक पार्टी के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वह ट्रंप के खिलाफ तीसरी बार महाभियोग की कार्यवाही शुरू करेगी या अपना ध्यान प्रशासनिक जवाबदेही और आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित रखेगी।
ट्रंप ने पहले ही दी थी महाभियोग की चेतावनी
मिडटर्म चुनाव से पहले 6 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों को चुनाव जीतने की जरूरत बताते हुए महाभियोग की आशंका जताई थी।
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के रिपब्लिकन सांसदों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा था कि यदि उनकी पार्टी मिडटर्म चुनाव हार जाती है तो डेमोक्रेट्स उन्हें महाभियोग के जरिए हटाने का कोई न कोई कारण तलाश लेंगे।
ट्रंप ने कहा था, "आपको मिडटर्म चुनाव जीतना ही होगा, क्योंकि अगर हम चुनाव नहीं जीतते हैं तो वे मुझे महाभियोग के जरिए हटाने का कोई बहाना ढूंढ लेंगे।"
अब चुनाव परिणामों में रिपब्लिकन पार्टी को दोनों सदनों में बहुमत गंवाना पड़ा है। डेमोक्रेट्स ने टेक्सस, कंसास और साउथ कैरोलाइना जैसे पारंपरिक रिपब्लिकन प्रभाव वाले राज्यों में भी सीनेट की सीटें जीतकर राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं।
कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स को बहुमत
अमेरिकी कांग्रेस के दो सदन हैं। इनमें 435 सदस्यों वाली प्रतिनिधि सभा और 100 सदस्यों वाली सीनेट शामिल हैं।
प्रतिनिधि सभा में बहुमत के लिए 218 सीटों की आवश्यकता होती है। चुनाव में डेमोक्रेट्स इस आंकड़े को पार कर चुके हैं। वहीं, सीनेट में भी पार्टी ने बहुमत हासिल कर लिया है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, डेमोक्रेट्स को सीनेट में कम से कम 54 सीटों का समर्थन हासिल हुआ है।
चुनाव से पहले सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के पास 53 और डेमोक्रेटिक खेमे के पास 47 सीटें थीं। अब सत्ता का समीकरण बदल गया है।
हालांकि, चुनावी जीत के बावजूद नई कांग्रेस का कार्यकाल जनवरी 2027 में शुरू होगा। तब तक मौजूदा कांग्रेस काम करती रहेगी।
क्या डेमोक्रेट्स ट्रंप के खिलाफ महाभियोग चला सकते हैं?
इस सवाल का संवैधानिक जवाब है- हां। प्रतिनिधि सभा में बहुमत मिलने के बाद डेमोक्रेट्स के पास राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग के प्रस्ताव को पारित कराने की संख्या है।
अमेरिकी संविधान के अनुसार, प्रतिनिधि सभा साधारण बहुमत से महाभियोग के आरोपों को मंजूरी दे सकती है। इसके बाद मामला सीनेट में सुनवाई के लिए जाता है।
लेकिन महाभियोग पारित होना और राष्ट्रपति को पद से हटाना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।
सीनेट में राष्ट्रपति को दोषी ठहराने के लिए उपस्थित सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है। यदि सभी 100 सीनेटर उपस्थित हों तो इसके लिए 67 वोट चाहिए।
इसलिए केवल सीनेट में साधारण बहुमत हासिल कर लेना ट्रंप को राष्ट्रपति पद से हटाने के लिए पर्याप्त नहीं होगा।
राष्ट्रपति के खिलाफ सुनवाई के दौरान अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अध्यक्षता करते हैं। दोषी ठहराए जाने पर राष्ट्रपति को पद से हटाया जा सकता है। कुछ मामलों में भविष्य में सरकारी पद संभालने से अयोग्य ठहराने का फैसला भी लिया जा सकता है।
हकीम जेफ्रीज ने महाभियोग को प्राथमिकता नहीं बताया
डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हकीम जेफ्रीज ने चुनावी जीत के बाद महाभियोग को तत्काल प्राथमिकता बनाने के संकेत नहीं दिए हैं।
4 नवंबर को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि हाउस डेमोक्रेटिक कॉकस के किसी भी सदस्य ने उनसे महाभियोग के बारे में चर्चा नहीं की है।
जेफ्रीज के अनुसार, पार्टी का प्रमुख ध्यान महंगाई, आम लोगों की जीवनयापन लागत कम करने और सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने पर रहेगा।
उन्होंने कहा कि डेमोक्रेट्स ऐसी कांग्रेस का नेतृत्व करेंगे जो कार्यपालिका के कामकाज पर निगरानी रखेगी और अमेरिकी सत्ता व्यवस्था में संतुलन बनाए रखेगी।
दूसरी ओर, हाउस ओवरसाइट कमेटी में डेमोक्रेटिक पार्टी के शीर्ष सदस्य रॉबर्ट गार्सिया ने ट्रंप प्रशासन को लेकर जांच की तैयारी के संकेत दिए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "अपने वकीलों को तैयार रखिए।"
डेमोक्रेट्स के पास बहुमत आने के बाद संसदीय समितियों के माध्यम से दस्तावेज मांगने, समन जारी करने और प्रशासनिक कामकाज की जांच करने की शक्ति भी बढ़ जाएगी।
ट्रंप प्रशासन के लिए क्यों बढ़ेंगी मुश्किलें?
कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक बहुमत का असर ट्रंप के विधायी एजेंडे पर भी पड़ेगा।
अब प्रशासन को नए कानूनों और नीतियों को आगे बढ़ाने के लिए विपक्ष के साथ सहमति बनानी होगी। इसके अलावा सरकारी खर्च, प्रशासनिक फैसलों, सरकारी अनुबंधों और राष्ट्रपति के परिवार से जुड़े व्यावसायिक मामलों की जांच भी संसदीय समितियों के दायरे में आ सकती है।
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, डेमोक्रेट्स ने ट्रंप प्रशासन के कामकाज की व्यापक जांच और निगरानी को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है।
वहीं, ट्रंप ने चुनावी नतीजों के बाद डेमोक्रेट्स के विधायी प्रस्तावों को वीटो करने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि वह अगले दो वर्षों तक हर विधेयक पर वीटो लगाना नहीं चाहते, लेकिन जरूरत पड़ने पर ऐसा कर सकते हैं।
रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं ने भी डेमोक्रेट्स की नीतियों का विरोध करने के संकेत दिए हैं।
ट्रंप का महाभियोग से पुराना नाता
डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी इतिहास के ऐसे राष्ट्रपति हैं जिनके खिलाफ एक ही कार्यकाल में दो बार महाभियोग की कार्यवाही हुई।
पहला महाभियोग, दिसंबर 2019: प्रतिनिधि सभा ने ट्रंप के खिलाफ सत्ता के दुरुपयोग और कांग्रेस की जांच में बाधा डालने के आरोपों को मंजूरी दी थी। यह मामला यूक्रेन के तत्कालीन राष्ट्रपति से जुड़े विवाद पर आधारित था। फरवरी 2020 में सीनेट ने उन्हें दोनों आरोपों से बरी कर दिया।
दूसरा महाभियोग, जनवरी 2021: अमेरिकी कैपिटल में 6 जनवरी 2021 को हुई हिंसा के बाद ट्रंप पर विद्रोह के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया। प्रतिनिधि सभा ने उनके खिलाफ महाभियोग पारित किया। सीनेट में 57 सदस्यों ने दोषी ठहराने के पक्ष में और 43 ने विरोध में मतदान किया। हालांकि, आवश्यक दो-तिहाई समर्थन नहीं मिलने के कारण ट्रंप दोषी नहीं ठहराए गए।
दोनों मामलों में सीनेट से बरी होने के कारण ट्रंप राष्ट्रपति पद पर बने रहे।
आगे क्या होगा?
2026 के मिडटर्म चुनाव ने अमेरिकी राजनीति में सत्ता का संतुलन बदल दिया है। डेमोक्रेट्स के पास अब ट्रंप प्रशासन की नीतियों की जांच करने, अधिकारियों को जवाबदेह बनाने और विधायी एजेंडे को चुनौती देने के अधिक अवसर होंगे।
लेकिन तीसरी बार महाभियोग की कार्यवाही शुरू करना अभी पार्टी का घोषित निर्णय नहीं है। हकीम जेफ्रीज के बयान से स्पष्ट है कि फिलहाल डेमोक्रेटिक नेतृत्व महंगाई, आर्थिक राहत और प्रशासनिक जवाबदेही पर ध्यान देना चाहता है।
इसलिए आने वाले दिनों में सबसे अहम सवाल यह होगा कि डेमोक्रेट्स अपनी चुनावी जीत का इस्तेमाल ट्रंप के खिलाफ महाभियोग के लिए करते हैं या संसदीय निगरानी और जांच के माध्यम से उनके प्रशासन पर दबाव बनाते हैं।
अमेरिकी राजनीति में यह बदलाव ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के शेष दो वर्षों को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है।
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