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इजराइल चुनाव: नेतन्याहू और आइजनकोट में कड़ा मुकाबला, सरकार बनाने के लिए अरब पार्टियों पर नजर

इजराइल के संसदीय चुनाव में बेंजामिन नेतन्याहू और गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाले खेमों में से कोई भी बहुमत के आंकड़े तक पहुंचता नहीं दिख रहा। सरकार गठन में अरब पार्टियों की भूमिका अहम हो सकती है।

इजराइल चुनाव: नेतन्याहू और आइजनकोट में कड़ा मुकाबला, सरकार बनाने के लिए अरब पार्टियों पर नजर

इजराइल के संसदीय चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और विपक्षी नेता गादी आइजनकोट के बीच मुकाबला कड़ा हो गया है। बुधवार सुबह सामने आए शुरुआती नतीजों में किसी भी खेमे को संसद में सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटें मिलती नहीं दिख रही हैं। ऐसे में चुनाव के बाद छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन बनाने की कोशिशें तेज हो सकती हैं। अरब पार्टियों का समर्थन भी सरकार गठन की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकता है।

इजराइल की संसद, जिसे नेसेट कहा जाता है, में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार सुबह लगभग 40% मतपत्रों की गिनती के दौरान प्रधानमंत्री नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को करीब 21.7% वोट मिले थे, जबकि आइजनकोट की याशर पार्टी को लगभग 15.7% वोट मिले। हालांकि, किसी पार्टी को मिले वोट और पूरे गठबंधन की सीटों का आंकड़ा अलग होता है। मतगणना पूरी होने तक सीटों के अनुमान बदल सकते हैं।

नेतन्याहू और आइजनकोट ने सरकार बनाने का दावा पेश किया

चुनाव के बाद दोनों नेताओं ने अपने-अपने समर्थकों के सामने सरकार बनाने की उम्मीद जताई। नेतन्याहू ने मजबूत दक्षिणपंथी सरकार बनाने की बात कही। उन्होंने अरब पार्टियों के समर्थन पर निर्भर सरकार का विरोध किया।

दूसरी ओर, आइजनकोट ने कहा कि मतदाताओं ने बदलाव के पक्ष में फैसला दिया है। उन्होंने नेतन्याहू से पद छोड़ने और राजनीति से हटने की अपील भी की। हालांकि, शुरुआती नतीजों से यह तय नहीं है कि आइजनकोट अपने दम पर बहुमत जुटा पाएंगे।

नेतन्याहू के नेतृत्व वाला खेमा दक्षिणपंथी और धार्मिक दलों के समर्थन पर निर्भर है। आइजनकोट के सामने चुनौती यह है कि उनके साथ मौजूद विपक्षी दलों के अलावा उन्हें सरकार बनाने के लिए अतिरिक्त सांसदों का समर्थन जुटाना पड़ सकता है।

अरब पार्टियां बन सकती हैं निर्णायक

इजराइल की अरब पार्टियों ने इस चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जॉइंट लिस्ट गठबंधन में हदाश, ताल और बलद शामिल हैं, जबकि राअम अलग पार्टी है। शुरुआती अनुमानों में इन पार्टियों को मिलने वाली सीटों की संख्या सरकार गठन के लिहाज से अहम मानी जा रही है।

अरब पार्टियों का समर्थन मिलने पर आइजनकोट के खेमे की सरकार बनाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। लेकिन यह रास्ता आसान नहीं है। आइजनकोट और उनके सहयोगियों ने अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने को लेकर अब तक स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं दिखाई है। वहीं, नेतन्याहू ने भी अरब पार्टियों के समर्थन पर निर्भर सरकार का विरोध किया है।

इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव के बाद कौन-सी पार्टी किस खेमे को समर्थन देती है और क्या किसी संभावित गठबंधन के पास संसद में पर्याप्त समर्थन होगा।

ट्रम्प ने नेतन्याहू के प्रदर्शन का बचाव किया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चुनाव के दौरान नेतन्याहू के प्रदर्शन को लेकर सकारात्मक टिप्पणी की। AP की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने उन अनुमानों पर सवाल उठाया जिनमें नेतन्याहू की हार की संभावना जताई जा रही थी। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू ने अच्छा प्रदर्शन किया है।

हालांकि, शुरुआती मतगणना और एग्जिट पोल के आधार पर किसी भी खेमे की जीत तय नहीं मानी जा सकती। ट्रम्प की टिप्पणी के बावजूद अंतिम नतीजे और गठबंधन की स्थिति ही तय करेगी कि अगली सरकार किसकी बनेगी।

डुप्लीकेट लिफाफों में डाले गए वोटों की गिनती भी अहम

इजराइल में कुछ मतदाताओं के वोट डबल लिफाफे में रखे जाते हैं। इनमें सेना में तैनात ऐसे सैनिक, अस्पतालों में भर्ती कुछ मरीज, जेलों में बंद कैदी और विदेश में तैनात इजराइली राजनयिक शामिल हो सकते हैं, जो अपने सामान्य मतदान केंद्र पर वोट नहीं डाल पाते।

इस प्रक्रिया में मतदाता का मतपत्र एक छोटे लिफाफे में रखा जाता है। इसे पहचान संबंधी जानकारी वाले दूसरे लिफाफे में रखा जाता है। चुनाव अधिकारी पहले यह जांचते हैं कि मतदाता ने दूसरी जगह मतदान तो नहीं किया। इसके बाद बाहरी लिफाफा हटाकर अंदर का लिफाफा खोला जाता है, ताकि वोट की गोपनीयता बनी रहे।

इन मतों की गिनती पूरी होने पर नतीजों में बदलाव संभव है। इसलिए शुरुआती आंकड़ों को अंतिम परिणाम नहीं माना जाना चाहिए।

सरकार बनाने के लिए क्या है प्रक्रिया?

इजराइल में आधिकारिक नतीजे आने के बाद राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग विभिन्न राजनीतिक दलों से बातचीत करेंगे। इसके बाद वह उस नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं, जिसके पास संसद में समर्थन जुटाने की सबसे बेहतर संभावना हो।

नामित नेता को सरकार बनाने के लिए आम तौर पर 28 दिन मिलते हैं। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति 14 दिन का अतिरिक्त समय दे सकते हैं। इस दौरान नेता दूसरी पार्टियों से बातचीत करके समर्थन जुटाने और गठबंधन समझौते करने की कोशिश करता है।

यदि कोई नेता सरकार बनाने में सफल नहीं होता, तो आगे दूसरे नेता को मौका देने या अंततः नए चुनाव की स्थिति बन सकती है। जब तक नई सरकार नहीं बनती, नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में काम करते रह सकते हैं।

फिलहाल इजराइल के चुनाव में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नेतन्याहू अपने मौजूदा सहयोगियों के साथ बहुमत जुटा पाएंगे या आइजनकोट अरब पार्टियों और अन्य दलों के समर्थन से सरकार बनाने का रास्ता निकालेंगे। अंतिम मतगणना और चुनाव के बाद होने वाली बातचीत से ही इसका जवाब मिलेगा।

✓ संपादकीय जाँच: प्रूफ़रीडिंग DP Singh · प्रकाशन की मंज़ूरी DP Singh · हमारे मानक

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