यूक्रेन युद्ध पर पुतिन, ट्रंप और जिनपिंग की संभावित बैठक, लेकिन अभी कोई फैसला नहीं
रूस, अमेरिका और चीन के राष्ट्रपति अगले महीने चीन में होने वाले APEC सम्मेलन के दौरान मिल सकते हैं। यूक्रेन युद्ध पर चर्चा के लिए ऐसी बैठक की संभावना जरूर सामने आई है, लेकिन अभी इसकी तारीख और एजेंडा तय नहीं है।
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को खत्म करने की कोशिशों के बीच एक नई कूटनीतिक चर्चा शुरू हुई है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले महीने चीन में एक साथ बैठक कर सकते हैं। यह बैठक एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग यानी APEC के शिखर सम्मेलन के दौरान होने की संभावना है।
हालांकि, इस खबर को लेकर अभी सबसे जरूरी बात समझने वाली है। बैठक की संभावना पर चर्चा हुई है, लेकिन इसे लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। रूस ने भी साफ किया है कि न तो बैठक की रूपरेखा तय हुई है और न ही यह तय है कि उसमें किन मुद्दों पर बातचीत होगी।
आखिर यह बैठक चर्चा में क्यों आई?
यह पूरा मामला उस रिपोर्ट के बाद सामने आया, जिसमें द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया कि पुतिन ने ट्रंप के सामने चीन में ऐसी त्रिपक्षीय बैठक का विचार रखा था। रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक का मकसद यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के रास्तों पर चर्चा करना हो सकता है।
सोमवार को क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव से जब इस रिपोर्ट के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने माना कि तीनों नेताओं की संभावित बैठक का विषय बातचीत में उठा था। लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी ने बैठक या उसके एजेंडे को लेकर कोई ठोस प्रस्ताव या समझौता पेश नहीं किया है।
यानी फिलहाल यह कूटनीतिक स्तर पर सामने आया एक विचार है, न कि तय हो चुकी शांति वार्ता।
यूक्रेन को इस बैठक से क्या परेशानी है?
इस प्रस्ताव पर यूक्रेन ने चिंता जताई है। यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा का कहना है कि अगर युद्ध खत्म करने के लिए कोई बड़ी बैठक होती है, तो उसमें यूक्रेन की भागीदारी जरूरी है।
उनका तर्क सीधा है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध चल रहा है, इसलिए उसके भविष्य का फैसला करने वाली बातचीत में यूक्रेन को शामिल किया जाना चाहिए। सिबिहा ने सोशल मीडिया मंच X पर कहा कि यूक्रेन, अमेरिका और रूस के नेताओं की बैठक युद्ध को जल्द खत्म करने में मदद कर सकती है। इसके उलट, रूस, अमेरिका और चीन के नेताओं की बैठक से पुतिन को युद्ध जारी रखने का प्रोत्साहन मिल सकता है।
यूक्रेन की चिंता यह है कि अगर उसके बिना बड़े देश उसके भविष्य से जुड़े फैसलों पर चर्चा करते हैं, तो उसकी जमीन, सुरक्षा और राजनीतिक हितों पर असर पड़ सकता है।
क्या यूक्रेन के बिना युद्ध खत्म करने का समझौता हो सकता है?
रूस ने भी माना है कि अंतिम शांति समझौते के लिए यूक्रेन की भागीदारी जरूरी होगी। पेस्कोव ने कहा कि कीव की भागीदारी के बिना किसी अंतिम समाधान तक पहुंचना संभव नहीं है।
इसका मतलब यह है कि पुतिन, ट्रंप और जिनपिंग के बीच अगर बैठक होती भी है, तो वह अपने आप रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म नहीं कर सकती। ऐसी बातचीत से शांति का रास्ता तलाशने में मदद मिल सकती है, लेकिन युद्ध से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर रूस और यूक्रेन के बीच सहमति बनना जरूरी होगा।
मसलन, युद्ध के दौरान रूस के नियंत्रण में आए इलाकों का भविष्य क्या होगा, यूक्रेन की सुरक्षा की गारंटी कैसे दी जाएगी और दोनों देशों के बीच संघर्ष रोकने की शर्तें क्या होंगी—ये ऐसे सवाल हैं जिन पर सहमति बनाना आसान नहीं है।
अमेरिका की मध्यस्थता कहां तक पहुंची?
रूस के मुताबिक, अमेरिका अभी भी युद्ध खत्म कराने के लिए मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है और मॉस्को इन प्रयासों को महत्व देता है। हालांकि, रूस और यूक्रेन के बीच शांति की शर्तों को लेकर मतभेद बने हुए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की मध्यस्थता में रूस और यूक्रेन के बीच पिछली शांति वार्ता फरवरी में हुई थी। उसके बाद बातचीत में आगे बढ़ने को लेकर कोई बड़ा नतीजा सामने नहीं आया है।
यही वजह है कि तीनों बड़े देशों के नेताओं की संभावित बैठक पर दुनिया की नजर है। लेकिन केवल बैठक की चर्चा से यह मान लेना सही नहीं होगा कि युद्ध जल्द खत्म होने वाला है।
APEC सम्मेलन में क्या हो सकता है?
APEC एशिया-प्रशांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने वाला मंच है। इसमें सदस्य अर्थव्यवस्थाओं के नेता व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा करते हैं। इस बार सम्मेलन चीन में अगले महीने होना है।
अगर पुतिन, ट्रंप और जिनपिंग एक ही समय पर वहां मौजूद रहते हैं, तो उनके बीच अलग से बातचीत की संभावना बन सकती है। लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि तीनों नेता औपचारिक रूप से एक साथ बैठेंगे या नहीं।
फिलहाल स्थिति यही है कि बैठक का विचार सामने आया है, लेकिन शांति समझौते की दिशा में कोई ठोस नतीजा घोषित नहीं हुआ है। असली परीक्षा तब होगी, जब बातचीत के प्रस्तावों को रूस और यूक्रेन के बीच स्वीकार्य शर्तों में बदला जा सकेगा।
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