यूक्रेन के ड्रोन पर पाबंदी से क्यों बढ़ा अमेरिका से तनाव? जानिए पूरा मामला
यूक्रेन का कहना है कि सैटेलाइट इंटरनेट से जुड़ी गति संबंधी पाबंदियों ने उसके ड्रोन अभियानों को प्रभावित किया। इस मुद्दे पर राष्ट्रपति जेलेंस्की और ट्रंप प्रशासन के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
रूस के साथ जारी युद्ध में यूक्रेन के लिए ड्रोन बेहद अहम हथियार बन चुके हैं। इनकी मदद से रूसी सैन्य ठिकानों पर हमले किए जाते हैं, ईंधन केंद्रों को निशाना बनाया जाता है और दुश्मन के ड्रोन से अपने शहरों को बचाने की कोशिश होती है। लेकिन अब यूक्रेनी अधिकारियों ने शिकायत की है कि सैटेलाइट इंटरनेट से जुड़ी कुछ पाबंदियों के कारण उनके ड्रोन अभियानों में परेशानी आई है।
यूक्रेन के अधिकारियों के मुताबिक, कई ड्रोन का संपर्क टूट गया और कुछ सैन्य इकाइयों को करीब तीन दिन तक अपनी ज्यादातर कार्रवाई रोकनी पड़ी। इस घटना ने अमेरिका और यूक्रेन के बीच तनाव बढ़ा दिया है। हालांकि, अमेरिका ने जानबूझकर यूक्रेन की सैन्य मदद रोकने के आरोपों को खारिज किया है।
Starlink और Starshield क्या हैं?
इस पूरे विवाद को समझने के लिए पहले इन दोनों सेवाओं का अंतर जानना जरूरी है।
Starlink, एलन मस्क की कंपनी SpaceX की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा है। यह उन इलाकों में भी इंटरनेट उपलब्ध कराने में मदद करती है, जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट की सुविधा कमजोर होती है।
Starshield इसी तकनीक का सैन्य इस्तेमाल के लिए बनाया गया संस्करण है। यूक्रेन की कुछ सैन्य इकाइयां सैटेलाइट कनेक्शन का इस्तेमाल ड्रोन को नियंत्रित करने और आपस में संपर्क बनाए रखने के लिए करती हैं।
आसान भाषा में समझें तो ड्रोन को दूर बैठकर उड़ाने के लिए ऑपरेटर और ड्रोन के बीच लगातार संपर्क जरूरी होता है। अगर यह संपर्क टूट जाए, तो ड्रोन को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। इससे हमला नाकाम होने या ड्रोन खोने का खतरा बढ़ जाता है।
40 मील प्रति घंटे की रफ्तार पर भी आई परेशानी
यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती दौर में कुछ ड्रोन का कनेक्शन लगभग 40 मील प्रति घंटे की रफ्तार पर टूटने लगा था। बाद में स्थिति में सुधार हुआ, लेकिन अधिकारियों का दावा है कि 100 मील प्रति घंटे से अधिक की गति पर अब भी दिक्कत हो सकती है।
40 मील प्रति घंटा लगभग 64 किलोमीटर प्रति घंटा और 100 मील प्रति घंटा करीब 161 किलोमीटर प्रति घंटा होता है।
यूक्रेनी ब्रिगेडियर जनरल एंड्री बिले्त्स्की ने कहा कि पहले Starshield का इस्तेमाल करने वाले कुछ ड्रोन लगभग 250 मील प्रति घंटे यानी करीब 402 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी अपना कनेक्शन बनाए रख सकते थे। उनके मुताबिक, 100 मील प्रति घंटे की सीमा पहले से मौजूद थी, लेकिन उसे सख्ती से लागू नहीं किया जा रहा था।
यूक्रेन की चिंता यह है कि अगर तेज रफ्तार पर ड्रोन का संपर्क टूटता है, तो वे अपने लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्वतंत्र रूप से स्पष्ट नहीं है कि कितने ड्रोन इस वजह से नष्ट हुए या कितने हमले प्रभावित हुए।
शहरों की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है असर
यह विवाद सिर्फ रूसी सैन्य ठिकानों पर हमले करने वाले ड्रोन तक सीमित नहीं है। यूक्रेन रूस के ड्रोन हमलों को रोकने के लिए इंटरसेप्टर ड्रोन का भी इस्तेमाल करता है।
इन ड्रोन का काम दुश्मन के ड्रोन का पीछा करके उन्हें हवा में रोकना होता है। इसके लिए कई बार उन्हें अपने लक्ष्य से तेज उड़ना पड़ता है।
यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि गति संबंधी पाबंदियां इन इंटरसेप्टर ड्रोन की क्षमता को भी प्रभावित कर सकती हैं। उनका मानना है कि इससे शहरों और आम नागरिकों की सुरक्षा पर असर पड़ने का खतरा है।
लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि यह यूक्रेनी अधिकारियों की चिंता और उनका आकलन है। पाबंदियों से नागरिकों की सुरक्षा पर वास्तविक असर कितना पड़ा, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
क्या अमेरिका यूक्रेन पर युद्ध खत्म करने का दबाव बना रहा है?
यूक्रेन को आशंका है कि ये पाबंदियां रूस की तेल रिफाइनरियों पर किए गए यूक्रेनी हमलों के जवाब में लगाई गई होंगी। उसे यह भी डर है कि सैन्य तकनीक और दूसरी मदद में रुकावट डालकर उसे युद्ध समाप्त करने के लिए किसी समझौते पर दबाव में लाया जा सकता है।
यूक्रेनी अधिकारियों ने अमेरिकी सैन्य खुफिया जानकारी साझा करने में कमी और इंटरसेप्टर मिसाइलों की आपूर्ति में देरी को लेकर भी चिंता जताई है।
हालांकि, अमेरिका ने जानबूझकर यूक्रेन की मदद रोकने के आरोपों को खारिज किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इस बदलाव में उनका हाथ नहीं था। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा कि यूक्रेन में Starlink की सेवा धीमी होने जैसी स्थिति पैदा हुई थी और उनके अनुसार सेवा बहाल कर दी गई थी।
इस मामले में यह सवाल भी उठा कि इन सेवाओं तक पहुंच को नियंत्रित कौन करता है। एलन मस्क ने कहा कि Starshield पर नियंत्रण पेंटागन का है, जबकि रुबियो ने कहा कि Starlink और Starshield तक पहुंच तय करने में SpaceX की भूमिका है।
यानी मामला सिर्फ तकनीकी खराबी का नहीं है। इसके साथ यह सवाल भी जुड़ा है कि युद्ध के दौरान किसी निजी कंपनी की तकनीक पर निर्भर रहने वाले देश की सैन्य क्षमता कितनी प्रभावित हो सकती है।
जेलेंस्की और ट्रंप प्रशासन के बीच बयानबाजी
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने Starshield में हुए बदलाव को योजनाबद्ध कार्रवाई बताया। इस बयान पर अमेरिकी प्रशासन ने आपत्ति जताई।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और विदेश मंत्री रुबियो स्पष्ट कर चुके हैं कि अमेरिकी प्रशासन में किसी ने जानबूझकर ऐसा कदम नहीं उठाया। उन्होंने जेलेंस्की के आरोपों को गैर-जिम्मेदाराना बताया।
जेलेंस्की के अनुसार, उन्होंने रुबियो से बातचीत में Starshield के अलावा इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी और रूस की बैलिस्टिक मिसाइलों के हमलों से पहले चेतावनी देने वाली प्रणालियों में आई रुकावट का मुद्दा भी उठाया।
रुबियो ने इस आरोप से इनकार किया कि अमेरिका जानबूझकर यूक्रेन को रूसी हमलों की चेतावनी से जुड़ी जानकारी नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि Patriot मिसाइलों को रोकने वाली इंटरसेप्टर मिसाइलों की दुनिया भर में कमी है।
यूक्रेनी सैनिकों ने क्या कहा?
यूक्रेन की 23वीं असॉल्ट रेजिमेंट में कंपनी कमांडर लेफ्टिनेंट यूरी बुतुसोव ने कहा कि ड्रोन अभियानों में आई रुकावट से रूसी सेना को राहत मिली।
उनके मुताबिक, इस दौरान रूसी सैनिकों को यूक्रेनी ड्रोन हमलों से कुछ समय के लिए राहत मिल गई। उन्होंने चिंता जताई कि इसका नुकसान केवल ड्रोन या सैन्य वाहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे यूक्रेनी सैनिकों की जान को भी खतरा हो सकता है।
उनकी बात से यह समझ आता है कि आधुनिक युद्ध में संचार तकनीक कितनी अहम हो गई है। अब युद्ध केवल टैंक, तोप और मिसाइलों से नहीं लड़ा जाता। ड्रोन को नियंत्रित करने वाला नेटवर्क भी मैदान में लड़ रहे सैनिकों की सुरक्षा और सैन्य अभियानों के नतीजों पर असर डाल सकता है।
इस पूरे विवाद से क्या समझ आता है?
इस मामले में तीन बातें अहम हैं। पहली, यूक्रेन के कई सैन्य अभियान ड्रोन और सैटेलाइट संचार पर निर्भर हैं। दूसरी, तकनीकी पाबंदियां युद्ध के मैदान में इस्तेमाल होने वाले हथियारों की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। तीसरी, अमेरिका और यूक्रेन के बीच सैन्य सहयोग को लेकर भरोसे का सवाल सामने आया है।
फिलहाल, यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि अमेरिका ने जानबूझकर यूक्रेन को कमजोर करने के लिए पाबंदियां लगाईं। यूक्रेन ने इनके असर पर चिंता जताई है, जबकि अमेरिकी अधिकारियों ने जानबूझकर मदद रोकने के आरोपों को नकारा है।
अब सबसे अहम सवाल यही है कि पाबंदियां क्यों लगाई गईं, क्या तकनीकी समस्याएं पूरी तरह दूर हो गई हैं और यूक्रेन के सैन्य अभियानों पर इनका वास्तविक असर कितना पड़ा है।
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