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दिल्ली में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च पर पुलिस की कार्रवाई, 100 से अधिक लोग हिरासत में; CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

कनॉट प्लेस में करीब 2,000 प्रदर्शनकारी जुटे। CJP संस्थापक अभिजीत डिपके और AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने के बाद विपक्षी दलों ने उनकी तत्काल रिहाई की मांग की।

दिल्ली में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च पर पुलिस की कार्रवाई, 100 से अधिक लोग हिरासत में; CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शुक्रवार शाम ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च के दौरान पुलिस ने 100 से अधिक लोगों को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए लोगों में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा भी शामिल हैं। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

प्रदर्शन के लिए कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क और उसके आसपास करीब 2,000 लोग एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों में बड़ी संख्या में लोग राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लेकर पहुंचे थे। स्थिति को देखते हुए दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की भारी तैनाती की गई थी।

CJP ने इस मार्च का आह्वान किया था। वहीं, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और अन्य वामपंथी छात्र संगठनों ने शाम करीब 6 बजे फिरोजशाह रोड पर भी प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद जॉन ब्रिटास भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारी मार्च करते हुए कनॉट प्लेस की ओर बढ़े।

मार्च से पहले CJP संस्थापक अभिजीत डिपके हिरासत में

अभिजीत डिपके को मार्च शुरू होने से पहले करोल बाग से हिरासत में लिया गया। वहीं, नेहा बोरा को मंडी हाउस से मार्च निकालने की कोशिश के कुछ समय बाद हिरासत में ले लिया गया।

डिपके करोल बाग स्थित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रवक्ता अनीश गावंडे के आवास पर ठहरे हुए थे। पुलिस की एक टीम ने उन्हें नोटिस देकर बिना वैध अनुमति मार्च आयोजित नहीं करने की चेतावनी दी थी।

पुलिस के नोटिस में अदालत के निर्देशों का हवाला देते हुए कार्रवाई को उचित ठहराया गया। नोटिस के मुताबिक, कनॉट प्लेस में व्यापारियों की आजीविका और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका थी। पुलिस ने यह भी कहा कि कनॉट प्लेस प्रदर्शन के लिए अधिसूचित स्थल नहीं है और प्रदर्शनकारी आवश्यक अनुमति लेकर निर्धारित स्थलों पर कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं।

शाम करीब 4:50 बजे जब डिपके आवास से बाहर निकले, तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया। पुलिस वैन में बैठाए जाने से पहले उन्होंने तिरंगा लहराया और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा, “मैं अकेला हूं। आप मुझे क्यों रोक रहे हैं?”

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, डिपके को दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के जाफरपुर कलां थाने ले जाया गया। उन्हें 24 घंटे तक निवारक हिरासत में रखे जाने की संभावना जताई गई थी।

पहले भी गिरफ्तार हो चुके हैं CJP के दो वरिष्ठ सदस्य

डिपके बुधवार को दिल्ली पहुंचे थे। इससे पहले CJP के दो वरिष्ठ सदस्यों अशुतोष रांका और सौरव दास को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया गया था।

उन पर सोमवार को सुरक्षा व्यवस्था का उल्लंघन कर जंतर-मंतर क्षेत्र में प्रवेश करने का आरोप लगाया गया था। इन गिरफ्तारियों के बाद डिपके का दिल्ली पहुंचना और प्रस्तावित मार्च को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई थीं।

कनॉट प्लेस में प्रदर्शनकारियों के सामने व्यापारियों का विरोध

प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही सेंट्रल पार्क के आसपास लोगों की भीड़ जुटने लगी थी। इलाके में पुलिस और CAPF के जवान तैनात थे।

इस दौरान पालिका बाजार के कुछ स्थानीय व्यापारियों ने भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ नारेबाजी की। व्यापारियों का आरोप था कि इस तरह के प्रदर्शनों से उनके कारोबार और ग्राहकों की आवाजाही पर असर पड़ता है।

कनॉट प्लेस दिल्ली का प्रमुख व्यावसायिक और सार्वजनिक क्षेत्र है। ऐसे में यहां प्रदर्शन को लेकर पुलिस की तैयारियां और प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी के बीच तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली।

विपक्षी दलों ने की नेताओं की तत्काल रिहाई की मांग

अभिजीत डिपके और नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने के बाद CJP और AISA ने देर रात तक उनके ठिकाने को लेकर चिंता जताई।

इसके बाद द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK), समाजवादी पार्टी (SP), तृणमूल कांग्रेस (TMC) और कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने हिरासत में लिए गए नेताओं की तत्काल रिहाई की मांग की। विपक्षी दलों ने पुलिस की कार्रवाई और केंद्र सरकार की भूमिका की आलोचना भी की।

प्रदर्शन के दौरान हुई गिरफ्तारियों ने राजधानी में विरोध-प्रदर्शनों की अनुमति, सार्वजनिक स्थलों पर राजनीतिक गतिविधियों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर बहस तेज कर दी है।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। वहीं, पुलिस ने मार्च को लेकर अनुमति और कनॉट प्लेस में सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित प्रतिबंधों का हवाला दिया है।

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