शुक्रवार, 6 नवम्बर 2026 हमारे बारे में संपर्क विज्ञापन दें न्यूज़रूम
सच की खोज
जनता की आवाज़
ज़मीनी हकीकत, जनता की आवाज़
ब्रेकिंग न्यूज़
बलिया: बजरंग पीजी कॉलेज के खेल मैदान में झाड़ियां और गंदगी, प्राचार्य ने बताई सफाई में देरी की वजह

वोट चोरी के आरोप पर INDIA ब्लॉक का बड़ा प्लान, 1 नवंबर को दिल्ली में महारैली; व्यापारियों ने जताई चिंता

INDIA ब्लॉक 30 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ और 1 नवंबर को रामलीला मैदान में महारैली करने जा रहा है। व्यापारियों ने दिवाली के कारोबार पर असर पड़ने की आशंका जताई है।

वोट चोरी के आरोप पर INDIA ब्लॉक का बड़ा प्लान, 1 नवंबर को दिल्ली में महारैली; व्यापारियों ने जताई चिंता

चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर विपक्षी INDIA ब्लॉक ने दिल्ली में बड़े प्रदर्शन की तैयारी की है। गठबंधन 30 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ कार्यक्रम आयोजित करेगा। इसके बाद 1 नवंबर को ‘दिल्ली चलो मार्च’ निकाला जाएगा, जिसका समापन रामलीला मैदान में प्रस्तावित महारैली के साथ होगा।

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि गठबंधन इस अभियान के जरिए चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं जनता के सामने रखेगा। उन्होंने दावा किया कि 1 नवंबर की रैली में कम से कम 10 लाख लोग शामिल होंगे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी INDIA ब्लॉक के घटक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं से दिल्ली पहुंचने की अपील की है।

लेकिन इस राजनीतिक कार्यक्रम के बीच दिल्ली के व्यापारियों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि दिवाली से पहले बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे समय में बड़ी रैली और उससे जुड़ी यातायात पाबंदियों के कारण कारोबार प्रभावित हो सकता है।

30 अक्टूबर को क्या होगा?

INDIA ब्लॉक ने 30 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ आयोजित करने की योजना बनाई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह कार्यक्रम दिल्ली के अशोक होटल में मॉक पार्लियामेंट यानी प्रतीकात्मक संसद की तरह आयोजित किया जाएगा।

विपक्ष का कहना है कि वह इस कार्यक्रम के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की अपनी मांग और चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों को सार्वजनिक रूप से उठाना चाहता है।

यहां एक बात समझना जरूरी है। ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ कोई औपचारिक संवैधानिक महाभियोग प्रक्रिया नहीं है। यह विपक्ष की ओर से आयोजित प्रतीकात्मक राजनीतिक कार्यक्रम है। इसमें जनता के सामने आरोप और मांगें रखी जा सकती हैं, लेकिन इससे अपने आप मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से नहीं हटाया जा सकता।

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संविधान और संबंधित कानूनों में निर्धारित औपचारिक प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है।

1 नवंबर को रामलीला मैदान में महारैली

30 अक्टूबर के कार्यक्रम के बाद INDIA ब्लॉक 1 नवंबर को ‘दिल्ली चलो मार्च’ निकालने की तैयारी में है। इसका समापन दिल्ली के रामलीला मैदान में होगा, जहां बड़ी रैली आयोजित करने की योजना है।

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के मुताबिक, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गठबंधन के सभी घटक दलों से इस दौरान अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी सुनिश्चित करने को कहा है।

इस अभियान का मुख्य मुद्दा कथित ‘वोट चोरी’ है। विपक्ष चुनाव प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर सवाल उठा रहा है। हालांकि, ये विपक्ष के आरोप हैं; इन्हें साबित हो चुका तथ्य मानने के बजाय संबंधित शिकायतों और उपलब्ध सबूतों के आधार पर समझना चाहिए।

व्यापारियों ने राहुल गांधी से रैली टालने की अपील क्यों की?

दिल्ली के व्यापारियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर 1 नवंबर की रैली आगे बढ़ाने की अपील की है। संगठन के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने सुझाव दिया है कि रैली 10 नवंबर के बाद आयोजित की जाए।

व्यापारियों की चिंता की मुख्य वजह दिवाली से पहले का व्यस्त कारोबारी समय है। इस दौरान लोग सोना-चांदी, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, बर्तन, मिठाई, सूखे मेवे और उपहार जैसी चीजों की खरीदारी करते हैं। बाजारों में ग्राहकों की संख्या बढ़ने से दुकानदारों के लिए यह समय काफी अहम होता है।

CTI का कहना है कि रामलीला मैदान के आसपास थोक और खुदरा बाजार बड़ी संख्या में मौजूद हैं। अगर रैली के कारण सड़कों पर भीड़, यातायात प्रतिबंध या लोगों की आवाजाही में परेशानी होती है, तो इसका असर दुकानों और कारोबार पर पड़ सकता है।

क्या सचमुच ₹10,000 करोड़ का नुकसान हो सकता है?

CTI ने आशंका जताई है कि रैली के कारण दिवाली के व्यस्त कारोबारी समय में लगभग ₹10,000 करोड़ के कारोबार पर असर पड़ सकता है। यह आंकड़ा व्यापारियों के संगठन का अनुमान है, किसी वास्तविक नुकसान का प्रमाणित आंकड़ा नहीं।

संगठन के मुताबिक, धनतेरस और दिवाली से पहले दिल्ली के विभिन्न बाजारों में बड़ी मात्रा में कारोबार होता है। इस बार धनतेरस 6 नवंबर को पड़ रही है, इसलिए व्यापारियों को 1 नवंबर की रैली और उसके आसपास की व्यवस्थाओं को लेकर चिंता है।

हालांकि, यह जरूरी नहीं कि अनुमानित कारोबार प्रभावित होने का पूरा आंकड़ा वास्तविक नुकसान में बदल जाए। वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कितनी सड़कें बंद होती हैं, यातायात की व्यवस्था कैसी रहती है और बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही कितनी प्रभावित होती है।

राजनीति और कारोबार के बीच संतुलन की चुनौती

इस मामले में दो अलग-अलग चिंताएं सामने हैं। INDIA ब्लॉक का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाना जरूरी है। वहीं, व्यापारी चाहते हैं कि दिवाली के आसपास बाजारों में कारोबार सामान्य रूप से चलता रहे।

लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन और राजनीतिक असहमति जताना महत्वपूर्ण है। साथ ही, प्रशासन के लिए यह भी जरूरी है कि बड़ी रैलियों के दौरान यातायात, बाजारों और आम लोगों की आवाजाही पर पड़ने वाले असर को कम किया जाए।

अब देखना होगा कि INDIA ब्लॉक अपने तय कार्यक्रम के अनुसार रैली आयोजित करता है या व्यापारियों की अपील के बाद तारीख में बदलाव होता है। फिलहाल, 30 अक्टूबर के प्रतीकात्मक कार्यक्रम और 1 नवंबर की महारैली की तैयारी जारी है।

✓ संपादकीय जाँच: प्रूफ़रीडिंग DP Singh · प्रकाशन की मंज़ूरी DP Singh · हमारे मानक

पाठकों की राय (0)

अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली राय आपकी हो सकती है।

संबंधित खबरें