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1 नवंबर को दिल्ली में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली, खड़गे ने लोगों से की शामिल होने की अपील

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और SIR के विरोध में 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली का ऐलान किया। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे समेत कई मांगें रखी हैं।

1 नवंबर को दिल्ली में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली, खड़गे ने लोगों से की शामिल होने की अपील

त्योहारों के बीच महंगाई और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोगों से 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली में शामिल होने की अपील की है। यह रैली विपक्षी INDIA गठबंधन की ओर से चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के विरोध में आयोजित की जा रही है।

खड़गे ने आरोप लगाया है कि देश में बड़े पैमाने पर 'वोट चोरी' हुई है और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह पर उन्हें संरक्षण देने का आरोप लगाया।

विपक्ष की मुख्य मांगें क्या हैं?

खड़गे ने अपने बयान में चुनावी व्यवस्था को लेकर विपक्ष की मांगें सामने रखीं। इनमें मुख्य रूप से तीन बातें शामिल हैं:

मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा: विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और 2023 के उस कानून को वापस लेने की मांग की है, जो मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति तथा कानूनी सुरक्षा से जुड़ा है।

SIR प्रक्रिया रोकना: विपक्ष चाहता है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए और जिन योग्य मतदाताओं के नाम कथित तौर पर गलत तरीके से हटाए गए हैं, उन्हें वापस जोड़ा जाए।

बैलेट पेपर से चुनाव: विपक्ष ने भविष्य के सभी चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के बजाय कागजी मतपत्रों से कराने की मांग भी रखी है।

SIR को लेकर विवाद क्यों है?

SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची की विशेष जांच और संशोधन की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और उसमें मौजूद गलतियों को ठीक करना है। इस प्रक्रिया में नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, पात्रता की जांच करने और अपात्र या गलत प्रविष्टियों को हटाने जैसे काम हो सकते हैं।

विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान योग्य मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। खड़गे ने उत्तर प्रदेश में Form-6 के 16.18 लाख आवेदनों का विवरण सार्वजनिक नहीं किए जाने और पीलीभीत में 10,470 मतदाताओं के रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं का भी जिक्र किया है।

खड़गे ने यह भी कहा कि SIR में इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर की जानकारी RTI के जरिए मांगी गई थी, लेकिन चुनाव आयोग ने कथित तौर पर 'ट्रेड सीक्रेट' का हवाला देकर जानकारी देने से इनकार कर दिया। विपक्ष इस मामले में अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहा है।

क्या रैली 1 नवंबर को ही होगी?

फिलहाल रैली की घोषित तारीख 1 नवंबर 2026 है। दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान में आयोजन के लिए अनुमति जारी किए जाने की जानकारी भी दी है।

हालांकि, दिल्ली के व्यापारियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने त्योहारों के दौरान कारोबार और यातायात पर संभावित असर का हवाला देते हुए रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित करने की अपील की है। खड़गे ने कहा है कि इस अनुरोध पर विचार किया जाएगा और बातचीत के बाद फैसला लिया जाएगा। इसलिए आयोजन की तारीख में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

इस रैली का उद्देश्य क्या है?

कांग्रेस और INDIA गठबंधन इस रैली के जरिए मतदाता सूची, चुनाव आयोग की पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों को राष्ट्रीय मुद्दा बनाना चाहते हैं। खड़गे ने इसे सिर्फ वोट बचाने की लड़ाई नहीं, बल्कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा का अभियान बताया है।

दूसरी ओर, चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों की पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड और स्वतंत्र जांच से ही हो सकती है। फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में है और 1 नवंबर की प्रस्तावित रैली में विपक्ष इसे लेकर सरकार तथा चुनाव आयोग पर दबाव बनाने की कोशिश करेगा।

✓ संपादकीय जाँच: प्रूफ़रीडिंग DP Singh · प्रकाशन की मंज़ूरी DP Singh · हमारे मानक

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